नॉलेज

भारत के किस शहर को कहा जाता है ‘ज्ञान की नगरी’, जानें इसका उत्थान और पतन कैसे हुआ?

Land of Knowledge: भारत अपनी समृद्ध संस्कृति, प्राचीन ज्ञान परंपरा और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। इसी धरती पर एक ऐसा शहर भी बसा है, जिसे सदियों से "ज्ञान की नगरी" या "विद्या की भूमि" कहा जाता है। यह स्थान शिक्षा, दर्शन और बौद्धिकता का केंद्र रहा है, जहां दूर-दूर से विद्यार्थी ज्ञान प्राप्त करने आते थे। आज भी यह शहर भारत की गौरवशाली शैक्षिक विरासत का प्रतीक बना हुआ है। तो आइए जानते हैं इसके बारे में।

Image

ज्ञान का शहर किसे कहा जाता है?

Land of Knowledge: भारत का इतिहास सदियों से समृद्ध और बहुआयामी रहा है। इसकी सांस्कृतिक विरासत, अनोखी परंपराएं और ऐतिहासिक धरोहरें न केवल देश में बल्कि पूरे विश्व में प्रशंसा का विषय रही हैं। हर वर्ष लाखों लोग भारत की इन विशिष्ट विशेषताओं को नजदीक से देखने और अनुभव करने के लिए यहां आते हैं। भारत केवल अपनी ऐतिहासिक इमारतों और प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि शिक्षा और ज्ञान के क्षेत्र में भी विश्वभर में प्रसिद्ध है। देश के कई शहर सदियों से विद्या और ज्ञान के केंद्र के रूप में ख्याति प्राप्त हैं।

ये शहर केवल शिक्षा का गढ़ ही नहीं बल्कि संस्कृति, दर्शन, साहित्य और विज्ञान के विकास का भी केंद्र रहे हैं। विभिन्न युगों में इन स्थानों ने अपने शैक्षिक संस्थानों, गुरुकुलों और पुस्तकालयों के माध्यम से ज्ञान के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज हम आपको भारत के उस विशेष शहर के बारे में बताएंगे जिसे पूरे देश और विश्व में "ज्ञान का शहर" या "विद्या की भूमि" के रूप में जाना जाता था और है। यह शहर शिक्षा और अध्ययन के प्रति अपनी गहरी प्रतिबद्धता, समृद्ध शिक्षण परंपरा और विद्वानों के योगदान के कारण अद्वितीय पहचान रखता है। इसकी सांस्कृतिक और बौद्धिक धरोहर आज भी देशवासियों और विदेशियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

ज्ञान का शहर किसे कहा जाता है।

भारत में कुल 28 राज्य और 8 केंद्र शासित प्रदेश हैं, लेकिन इनमें से एक राज्य ऐसा भी है, जहां स्थित एक शहर को “ज्ञान की भूमि” कहा जाता है। यह शहर है नालंदा, जो बिहार राज्य में स्थित है। प्राचीन काल में नालंदा उच्च शिक्षा का विश्व प्रसिद्ध केंद्र था। यहां स्थित नालंदा महाविहार में बौद्ध धर्म के अनुयायी और देश-विदेश से आए अनेक विद्यार्थी अध्ययन करते थे। ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, इस विश्वविद्यालय में लगभग 10,000 विद्यार्थी और 2,000 आचार्य शिक्षा से जुड़े हुए थे।

Chinese Scholar Xuanzang (Photo: Canva)

चीनी विद्वान ह्वेन त्सांग (फोटो: Canva)

प्रसिद्ध चीनी यात्री ह्वेन त्सांग (Xuanzang) ने भी यहां एक वर्ष तक विद्यार्थी और शिक्षक के रूप में समय बिताया था। उस समय चीन, कोरिया, जापान, तिब्बत, इंडोनेशिया, तुर्की और फारस जैसे देशों से छात्र नालंदा में ज्ञान प्राप्त करने के लिए आते थे। इस महान विश्वविद्यालय की स्थापना का श्रेय गुप्त वंश के शासक कुमारगुप्त प्रथम को दिया जाता है, जिन्होंने चौथी शताब्दी में इसकी नींव रखी थी। बाद में उनके उत्तराधिकारियों ने भी विश्वविद्यालय के विकास में योगदान दिया। गुप्त साम्राज्य के पतन के बाद भी नालंदा को अन्य राजवंशों का संरक्षण मिलता रहा, जिसके कारण यह शिक्षा का केंद्र सदियों तक फलता-फूलता रहा।

नालंदा विश्वविद्यालय का पतन कैसे हुआ?

ऐतिहासिक अभिलेखों के अनुसार, नालंदा विश्वविद्यालय पर तीन बार विनाशकारी हमले हुए थे, जिनमें से केवल दो बार ही इसका पुनर्निर्माण किया गया। पहली बार इसका विध्वंस स्कंदगुप्त (455–467 ईस्वी) के शासनकाल में हुआ, जब हूण शासक मिहिरकुल ने इस पर आक्रमण किया था। हालांकि, स्कंदगुप्त के उत्तराधिकारियों ने विश्वविद्यालय को दोबारा पुनर्स्थापित किया और इसके पुस्तकालय तथा भवनों का विस्तार भी करवाया।

Remains of Nalanda University (Photo: Canva)

नालंदा विश्वविद्यालय के अवशेष (फोटो: Canva)

दूसरा विनाश 7वीं शताब्दी के आरंभ में गौदास द्वारा किया गया था। इसके बाद सम्राट हर्षवर्धन (606–648 ईस्वी) ने नालंदा की पुनर्स्थापना करवाई और इसे फिर से शिक्षा का केंद्र बनाया। तीसरा और सबसे गंभीर आक्रमण 1193 ईस्वी में हुआ, जब तुर्क सेनापति इख्तियारुद्दीन मुहम्मद बिन बख्तियार खिलजी ने नालंदा विश्वविद्यालय को पूरी तरह नष्ट कर दिया। माना जाता है कि इस हमले में विश्वविद्यालय का विशाल पुस्तकालय जलकर राख हो गया, जिससे बौद्ध धर्म को भारी क्षति पहुंची। इस विनाश के बाद भारत में बौद्ध धर्म का प्रभाव तेजी से घटा और यह सदियों तक अपनी पुरानी प्रतिष्ठा पुनः प्राप्त नहीं कर सका। लेकिन आज भी इसे ज्ञान की भूमि के रूप में देखा जाता है।

Nilesh DwivedI
निलेश द्विवेदीauthor

निलेश द्विवेदी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में काम कर रहे हैं। वे शहरों से जुड़ी लोकल घटनाएं, क्राइम, राजनीति, इंफ्रास्ट्रक्चर और राज्यवार अपडेट्स पर लगातार काम करते हैं। निलेश महत्वपूर्ण विवरणों को चुनने और पाठकों की रुचि के हिसाब से कंटेंट को प्रभावी तरीके से पेश करने के लिए जाने जाते हैं। डिजिटल न्यूजरूम के रफ्तार भरे माहौल में वे हर खबर को सटीक एंगल, आसान भाषा और उपयोगी जानकारी के साथ पेश करने पर फोकस करते हैं और अबतक 2,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं।

और पढ़ें
End of Article
Subscribe to our daily Newsletter!

संबंधित खबरें