Raipur Name History: भारत एक अनोखा देश है। इसके रग-रग में कोई न कोई विरासत छिपी है। इसी भूमि पर छत्तीसगढ़ नाम का एक राज्य है, जिसकी राजधानी रायपुर है। छत्तीसगढ़ की धरती पर बसा रायपुर, इतिहास और संस्कृति की अनमोल धरोहर है। यह शहर अपनी रौनक, परंपराओं और विशिष्ट पहचान के लिए जाना जाता है। इसकी गलियों में आज भी पुरातन और आधुनिक जीवन का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यहां की मिट्टी में ऐसी कहानी बसती है, जो हर राहगीर को अपनी ओर खींच लेती है। रायपुर सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि समय के साथ बदलती सभ्यता का साक्षी है। इसकी पहचान में छिपा है गौरव, रहस्य और गर्व का अद्भुत मेल। जब भी इसके नाम की बात होती है, मन में जिज्ञासा जाग उठती है कि आखिर कैसे इसका नाम पड़ा और इसका इतिहास क्या है? इसी सवाल में छिपी है इसकी रोचक दास्तान, जो जानने लायक है। तो ऐसे में आइए जानते हैं इसके बारे में।
किसके नाम पर पड़ा रायपुर का नाम? (Raipur Name History)
छत्तीसगढ़ राजभवन पर दी गई जानकारी के मुताबिक, ऐतिहासिक और पुरातात्त्विक दृष्टि से रायपुर का विशेष महत्व है। प्राचीन काल में यह क्षेत्र दक्षिण कोसल का हिस्सा रहा है और मौर्य साम्राज्य के अधीन माना जाता था। लंबे समय तक रायपुर, हैहय वंश के शासकों की राजधानी के रूप में प्रसिद्ध रहा। नौवीं शताब्दी से इस नगर के अस्तित्व के प्रमाण मिलते हैं। शहर के दक्षिणी हिस्से में आज भी पुराने किलों और ऐतिहासिक स्थलों के अवशेष देखे जा सकते हैं।

रायपुर के नाम का इतिहास (फोटो: iStock)
दूसरी से तीसरी शताब्दी तक यहां सातवाहन वंश का शासन था। चौथी शताब्दी में सम्राट समुद्रगुप्त ने इस क्षेत्र को अपने साम्राज्य में सम्मिलित किया और पांचवीं से छठी शताब्दी तक यहां शरभपुरी वंश का शासन रहा। कुछ समय के लिए नल वंश ने भी इस क्षेत्र पर अपना प्रभाव स्थापित किया। इसके पश्चात सोमवंशी शासकों ने यहां सत्ता संभाली और सिरपुर (जिसे “श्रीपुर” या “संपत्ति का नगर” कहा जाता था) से शासन किया। इस वंश के सबसे प्रभावशाली राजा महाशिवगुप्त बालार्जुन थे। उनकी माता रानी वसाटा, राजा हर्षगुप्त की विधवा थीं, जिन्होंने सिरपुर के प्रसिद्ध लक्ष्मण मंदिर का निर्माण कराया था।
कब बना रायपुर छत्तीसगढ़ की राजधानी? (When Raipur became Capital of Chhattisgarh)
इतिहासकारों के मुताबिक, तुम्माण के कलचुरी शासकों ने रतनपुर को अपनी राजधानी बनाकर इस क्षेत्र पर लंबे समय तक शासन किया। रतनपुर, राजिम और खल्लारी में मिले शिलालेख इस वंश की सत्ता के प्रमाण प्रस्तुत करते हैं। ऐसा माना जाता है कि कलचुरी वंश के राजा रामचंद्र ने रायपुर नगर की स्थापना की और इसे अपने राज्य की राजधानी बनाया। एक अन्य मत के अनुसार, उनके पुत्र ब्रम्हदेव राय ने इस नगर की नींव रखी थी। उस समय उनकी राजधानी खल्लवाटिका (वर्तमान खल्लारी) थी, और नए बसे इस नगर का नाम उनके नाम पर “रायपुर” रखा गया।

रायपुर के नाम का इतिहास (फोटो: iStock)
बाद में, शासक अमरसिंह देव की मृत्यु के साथ ही कलचुरी वंश का पतन आरंभ हो गया। उनके पश्चात यह क्षेत्र भोंसले शासकों के नियंत्रण में आ गया। रघुजी तृतीय की मृत्यु के बाद ब्रिटिश शासन ने इस इलाके पर अधिकार कर लिया और 1854 में यहां ब्रिटिश कमिश्नरी का मुख्यालय स्थापित किया गया। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद, 1947 में रायपुर को ‘सेंट्रल प्रोविंसेज एंड बरार’ में सम्मिलित किया गया। राज्यों के पुनर्गठन के पश्चात 1956 में मध्य प्रदेश का गठन हुआ, जिसमें छत्तीसगढ़ क्षेत्र भी शामिल था। अंततः 1 नवंबर 2000 को मध्य प्रदेश के दक्षिण-पूर्वी हिस्से को विभाजित कर छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना हुई, और रायपुर को इसकी राजधानी घोषित किया गया।
