इस किले की दीवारों को कहा जाता है 'ग्रेट वॉल ऑफ इंडिया', जानें क्या है इसका इतिहास
- Authored by: Nilesh Dwivedi
- Updated Dec 12, 2025, 02:38 PM IST
भारत अपनी शाही विरासत और भव्य किलों के लिए हमेशा से जाना जाता रहा है। दुनिया की प्रसिद्ध दीवारों में से एक, विशाल और ऐतिहासिक दीवार, भारत में भी मौजूद है, जो एक किले की सुरक्षा के लिए बनाई गई थी। ऐसे में आइए जानते हैं इस किले और इसकी अद्भुत दीवार के बारे में।
भारत की सबसे लंबी दीवार
Kumbhalgarh Fort History: भारत को हमेशा से ही राजा-महाराजाओं की भूमि कहा गया है, जहां कई शक्तिशाली साम्राज्यों ने समय-समय पर शासन किया। अलग-अलग क्षेत्रों में राजाओं ने अपनी सत्ता स्थापित की और इतिहास में अमिट छाप छोड़ी। आज भी इन शाही किलों के अवशेष हमें उनकी शान और भव्यता का अहसास कराते हैं। आप निश्चित रूप से चीन की "The Great Wall of China" के बारे में जानते होंगे, जिसे दुनिया की सबसे लंबी दीवार माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया की एक और विशाल दीवार भारत में स्थित है? यह दीवार खासतौर पर एक किले की सुरक्षा के लिए बनाई गई थी और इसका नाम भारतीय इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। आइए जानते हैं इस ऐतिहासिक किले के बारे में।

भारत की सबसे लंबी दीवार वाले किले का नाम
क्या है इस किले का नाम?
कुंभलगढ़ किला अपनी भव्य और विशाल दीवारों के लिए प्रसिद्ध है। इसकी दीवारें लगभग 36 किलोमीटर लंबी हैं, जो इसे चीन की ग्रेट वॉल के बाद दुनिया की दूसरी सबसे लंबी दीवार बनाती हैं। इसी वजह से इसे अक्सर भारत की सबसे लंबी दीवार के रूप में जाना जाता है। यह अद्भुत किला राजस्थान के राजसमंद जिले में अरावली की पश्चिमी पहाड़ियों पर स्थित है और उदयपुर से लगभग 84 किलोमीटर की दूरी पर है। इसे 15वीं शताब्दी में मेवाड़ के शासक राणा कुंभा ने बनवाया था।
महाराणा प्रताप का जन्मस्थान
अपनी सुदृढ़ संरचना और दूरदराज स्थित होने के कारण कुंभलगढ़ किला भारत के सबसे कठिन पराजित होने वाले किलों में गिना जाता था। इसे मेवाड़ का किला भी कहा जाता है और यही स्थान महान राजपूत शासक महाराणा प्रताप का जन्मस्थान भी रहा है। किले की हर संरचना और निर्माण इस तरह से किया गया था कि यह किसी भी संभावित आक्रमण से सुरक्षित रहे। किले में मौजूद सात दरवाजे, 13 पहाड़ी चोटियाँ और कई निगरानी टावर इसे दुश्मनों के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण बनाते थे। ऐतिहासिक रिकॉर्ड के अनुसार, इस किले को केवल एक ही बार घेर लिया गया था।

यूनेस्को विश्व धरोहर के रूप में कुंभलगढ़
कितने हैं किले में द्वार?
इस विशाल किले में प्रवेश के लिए सात प्रमुख गढ़वाले द्वार बनाए गए हैं। इन द्वारों के नाम हैं – अरेट पोल, हनुमान पोल, राम पोल, विजय पोल, निंबू पोल, पाघरा पोल और टॉप खाना पोल। इसके अलावा किले के भीतर बादल महल भी स्थित है, जो किले की सबसे ऊँची चोटी पर बना है। यहां से आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों और बादलों का मनोरम दृश्य देखा जा सकता है, यही कारण है कि इसे बादल महल कहा जाता है। साथ ही, किले के परिसर में 360 से अधिक मंदिर हैं, जिनमें सबसे प्रमुख और प्रसिद्ध श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर है।
यूनेस्को विश्व धरोहर है कुंभलगढ़ किला
अपनी ऐतिहासिक महत्व और भव्यता के कारण कुंभलगढ़ किला यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों की सूची में शामिल किया गया है। यह किला राजस्थान के पहाड़ी किलों का हिस्सा है और इसे 2013 में यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता दी गई थी। आज भी बड़ी संख्या में लोग इसकी भव्यता और इतिहास को देखने के लिए यहां आते हैं। शाम के समय आने वाले पर्यटक किले में आयोजित लाइट और साउंड शो का आनंद ले सकते हैं, जिसमें कुंभलगढ़ के समृद्ध इतिहास और उसकी कहानियों को जीवंत रूप में पेश किया जाता है।