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फिर ब्लैक होल ने घुमाया खगोलविदों का सिर! बिना फटे गायब हो गया तारा और दिखा 'ब्रह्मांडीय दैत्य', ऐसे कैसे?

Supernova Mystery: ब्लैक होल ब्रह्मांड की सबसे बड़ी रहस्यमयी चीजों में से एक है और इसके अपने अलग ही नियम हैं। खगोलविदों को जब कभी ऐसा महसूस होता है कि वह ब्लैक होल को समझने लगे हैं तभी इससे उलट घटना होता है। एक नए शोध में एक ऐसे बड़े तारे के बारे में पता चला है, जो बिना सुपरनोवा के ही ब्लैक होल में तब्दील हो गया तो चलिए विस्तार से उसके बारे में जानते हैं।

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एम31 आकाशगंगा

Photo : iStock
KEY HIGHLIGHTS
  • M31 के इस तारे ने घुमाया खगोलविदों का सिर।
  • सुपरनोवा के बिना ढह गया बड़ा तारा।

Supernova Mystery: सूर्य से लगभग आठ गुना बड़े तारे जब अपने जीवन के अंतिम पड़ाव पर होते हैं तो सुपरनोवा विस्फोट जैसी खगोलीय घटना होती है। इस विस्फोट की वजह से एक ब्लैक होल या न्यूट्रॉन तारे का जन्म होता है। इस दरमियां सुपरनोवा की चमक इतनी ज्यादा होती है कि महीनों तक मेजबान आकाशगंगाओं की चमक उनके सामने फीकी लग सकती है।

साइंस अलर्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, खगोलविदों ने एक ऐसा विशालकाय तारा देखा जिसके जीवन के आखिरी चरण में सुपरनोवा विस्फोट नहीं हुआ और वह सीधे ब्लैक होल में तब्दील हो गया। इस खगोलीय घटना को देखकर खगोलविदों का दिमाग चकरा गया है। एक नए शोध में एंड्रोमेडा आकाशगंगा (M31), जिसे मेसियर 31 के नाम से भी जाना जाता है, में मौजूद एक विशालकाय तारे का उल्लेख किया गया है।

कोर-कोलैप्स सुपरनोवा

MIT के कावली इंस्टीट्यूट फॉर एस्ट्रोफिजिक्स एंड स्पेस रिसर्च में पोस्टडॉक्टरल स्कॉलर किशाले डे 'M31 में एक विशाल तारे का लुप्त होना एक ब्लैक होल के जन्म को दर्शाता है' नामक शोध के मुख्य लेखक हैं। बकौल रिपोर्ट, इस प्रकार के सुपरनोवा को कोर-कोलैप्स सुपरनोवा या टाइप II भी कहा जाता है। हमारी घरेलू मिल्की-वे आकाशगंगा में लगभग हर 100 साल में ऐसी घटना एक बार होती है। इसीलिए इस तरह की खगोलीय घटनाएं अपेक्षाकृत दुर्लभ होती हैं।

खगोलिवदों को क्यों है इतनी दिलचस्पी?

दरअसल, खगोलविद सुपरनोवा में इतनी दिलचस्पी इसलिए दिखाते हैं, क्योंकि सुपरनोवा कई भारी तत्वों के निर्माण के लिए जिम्मेदार हैं और उनकी शॉक वेव्स से तारों का निर्माण हो सकता है। साथ ही वह कॉस्मिक किरणें भी बनाते हैं, जो पृथ्वी तक पहुंच सकती हैं।

इस नए शोध से एक बात तो साफ है कि खगोलविद सुपरनोवा को उतनी अच्छी तरह से नहीं समझ पाए हैं जितना हम सोचते हैं। मेसियर 31 में मौजूद M31-2014-DS1 नामक तारे में ऐसी दुर्लभ खगोलीय घटना हुई, जिसकी चमक हजार दिनों तक स्थिर रही। बता दें कि खगोलविदों ने 2014 में M31-2014-DS1 तारे के मध्य अवरक्त (MIR) को चमकते हुए देखा जिसकी चमक हजार दिनों तक स्थिर रही। इसके बाद 2016 और 2019 के बीच हजार दिनों के लिए यह नाटकीय रूप से फीका पड़ गया।

सुपरनोवा विस्फोट के नहीं मिले कोई सबूत

शोधकर्ताओं का कहना है कि M31-2014-DS1 तारे का जन्म लगभग 20 तारकीय द्रव्यमान के आरंभिक द्रव्यमान के साथ हुआ था और यह लगभग 6.7 तारकीय द्रव्यमान के साथ अपने अंतिम परमाणु-दहन चरण तक पहुंचा। उनके अवलोकनों से पता चलता है कि यह तारा सुपरनोवा विस्फोट के अनुरूप हाल ही में निकले धूल के आवरण से घिरा हुआ है, लेकिन प्रकाशीय विस्फोट का कोई सबूत नहीं है।

Anurag Gupta
अनुराग गुप्ताauthor

अनुराग गुप्ता टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और मीडिया में 9 वर्षों का अनुभव रखते हैं। जर्नलिज़्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से ही वे न्यूजरूम के विभिन्न आयामों—कॉपी एडिटिंग, कंटेंट क्यूरेशन और रियल-टाइम न्यूज मॉनिटरिंग में दक्षता के साथ काम कर रहे हैं। राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और ब्रेकिंग न्यूज पर उनकी मजबूत पकड़ है। अनुराग खबरों की बारीकियों को समझने, फैक्ट चेकिंग और स्टोरी के अहम पहलुओं को पाठकों तक सरल भाषा में पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अब तक 10 हजार से अधिक खबरें प्रकाशित की हैं, जिनमें ब्रेकिंग अपडेट्स, एनालिटिकल कंटेंट, स्पेशल स्टोरीज और न्यूज एक्सप्लेनर्स शामिल हैं।

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