भारत के 8 स्मारक, जिन्हें राजाओं ने नहीं बल्कि रानियों ने बनवाया; खूबसूरती देख चौंधिया जाएंगी आंखें

8 Famous Indian Monuments: भारत के कई ऐसे प्रसिद्ध स्मारक हैं, जिन्हें राजाओं ने नहीं बल्कि रानियों ने बनवाया। इनमें से कई तो ऐसे हैं जहां अक्सर आप घूमने जाते हैं, लेकिन उसका इतिहास आपको पता ही नहीं होता। आज हम स्थापत्य कला के ऐसे ही नायाब स्मारकों, किलों और मंदिर-मकबरों के बारे में बताएंगे जो अपने में एक शानदार विरासत समेटे हुए आज भी शान से खड़े हैं। इनमें से एक तो राजधानी दिल्ली में ही है...

Authored by: शिव शुक्लाUpdated Dec 13 2025, 21:07 IST
भारत के प्रसिद्ध स्मारकImage Credit : ट्विटर01 / 09

भारत के प्रसिद्ध स्मारक

जब हम भारतीय इतिहास को पढते हैं तो अक्सर पुरुष योद्धाओं और राजाओं की कहानियां सामने आती हैं, लेकिन इन्ही पन्नों में कई ऐसी महिलाओं की कहानियां भी हैं, जिनका नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। इन महिलाओं ने न सिर्फ तख्तोताज संभाला, बल्कि अपनी सोच, नेतृत्व और दूरदर्शिता से अपना नाम अमिट कर दिया। उन्होंने निर्णय, निर्माण और शासन...हर मोर्चे पर अपनी छाप छोड़ते हुए पत्थरों पर भी अपना नाम दर्ज कराया। कहीं घाट बनवाए, कहीं मस्जिदों की नींव रखी, तो कहीं किलों को नया आकार दिया। आज हम ऐसी ही रानियों-बेगमों और उनके द्वारा बनवाए गए किलों स्मारकों और मंदिरों और मकबरों के बारे में बताएंगे जिनके बारे में लोगों को बहुत कम पता है। तो हमारे साथ चलिए इतिहास की इस यात्रा पर....

महेश्वर का किलाImage Credit : ट्विटर02 / 09

महेश्वर का किला

मध्य प्रदेश के खरगोन जिला मुख्यालय से करीब 59 किलोमीटर दूर नर्मदा के किनारे पर महेश्वर का किला ऐसे स्मारकों में शुमार है, जिसे किसी राजा ने नहीं बल्कि रानी ने बनवाया। भारतीय स्थापत्य कला की मराठा शैली के इस अद्भुत नमूने का निर्माण होलकर राजवंश की महारानी अहिल्याबाई ने महेश्वर को अपनी राजधानी बनाने के साथ ही 1700 ई. में करवाया था। इसके साथ ही उन्होंने नर्मदा के किनारे घाट भी बनवाए। नर्मदा के किनारे बसे अहिल्या-घाट की सीढ़ियां और महेश्वर किले की भव्यता आज भी उनके संवेदनशील और दूरदर्शी शासन का प्रतीक है।

​हुमायूं का मकबराImage Credit : ट्विटर03 / 09

​हुमायूं का मकबरा

राजधानी दिल्ली स्थित हुमायूं का मकबरा अक्सर लोग घूमने जाते हैं, वहां फोटो खिंचाते हैं लेकिन उन्हें शायद ये नहीं मालूम की इसे एक महिला ने बनवाया था। भारतीय वास्तुकला में फारसी शैली का मिश्रण लिए इस कब्रगाह का निर्माण मुगल बादशाह हुमायूं की पत्नी हाजी बेगम ने अपने पति की याद में करवाया था। इसका काम 1565 में शुरू हुआ और 1572 में पूरा हुआ। इसे भारत का पहली गार्डन टॉम्ब (उद्यान-शैली वाली कब्रगाह) माना जाता है। इसी के आधार पर बाद में मुगलों ने और मकबरों का निर्माण करवाया, जिनमें ताजमहल मुख्य है।

इतिमा<em>​</em>द-उद-दौला का मकबरा​Image Credit : ट्विटर04 / 09

इतिमाद-उद-दौला का मकबरा​

ताजमहल को अक्सर मुगल वास्तुकला की पराकाष्ठा कहा जाता है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इसकी बुनियाद जिस स्मारक ने रखी, वह एक महिला ने बनवाया था। और वह स्मारक है उत्तर प्रदेश के आगरा में ही स्थित इतिमाद-उद-दौला मकबरा। इतिमाद-उद-दौला मकबरा मुगल बादशाह जहांगीर की बेगम नूरजहां ने अपने पिता मिर्ज़ा गियास बेग (इतिमाद-उद-दौला) की याद में 1622–1628 में बनवाया था। इसे बेबी ताज भी कहा जाता है क्योंकि यह ताजमहल से पहले पूरी तरह संगमरमर से बना पहला मुगल स्मारक माना जाता है।

रानी की​ वाव, पाटन (गुजरात)​Image Credit : ट्विटर05 / 09

रानी की​ वाव, पाटन (गुजरात)​

गुजरात के पाटन में स्थित रानी की वाव सिर्फ एक बावड़ी नहीं, बल्कि भारतीय शिल्पकला का अद्भुत नमूना है जिसे 1063 ईस्वी में सोलंकी राजा भीमदेव प्रथम की याद में उनकी पत्नी रानी उदयमति ने बनवाया था। उदयमति जूनागढ़ के चूड़ासमा वंश के शासक रा खेंगार की पुत्री थीं। आज रानी की वाव को सीढ़ीनुमा कुओं की सर्वश्रेष्ठ मिसाल माना जाता है। 2014 में इसे यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा मिला था। आज यह भारत की सांस्कृतिक पहचान का गौरव बनकर दुनिया भर के पर्यटकों को आकर्षित कर रही है।

विरुपाक्ष मंदिर, पट्टदकल (कर्नाटक)​Image Credit : ट्विटर06 / 09

विरुपाक्ष मंदिर, पट्टदकल (कर्नाटक)​

कर्नाटक के बागलकोट में पट्टदकल का विरुपाक्ष मंदिर अपनी नक्काशी, कलात्मक स्तंभ और शिल्प कला के लिए विश्व प्रशिद्ध है। 8वीं सदी में बना यह मंदिर यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों की सूची में भी शामिल है। यह चालुक्य काल की वास्तुकला का शिखर माना जाता है। इस मंदिर का निर्माण बादामी के चालुक्य राजा विक्रमादित्य द्वितीय की पत्नी रानी लोकमहा देवी ने अपने पति की पल्लवों पर विजय के सम्मान में बनवाया था। भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर चालुक्य और द्रविड़ कला शैली में बना है।

मिर्जन कि​ला​Image Credit : ट्विटर07 / 09

मिर्जन कि​ला​

कर्नाटक के उत्तरी कन्नड जिले में होन्नावर तालुक में स्थित मिर्जन किला अपनी मजबूती और विशाल प्रांगण के लिए जाना जाता है। इसता निर्माण 16वीं शताब्दी में सालुवा वंश की शासक रानी चेन्नाभैरदेवी ने कराया था। कालीमिर्च के व्यापार पर उनके नियंत्रण के कारण उन्हें कालीमिर्च की रानी के नाम से भी जाना जाता है। व्यापार को मजबूत करने समृद्धि और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने मिर्जन किले का निर्माण करवाया। आप अगर मानसून के बाद यहां की यात्रा करते हैं तो यह किला काई की एक सुंदर चादर से ढका हुआ दिखाई देता है। यह किला स्थानीय रूप से उपलब्ध लेटराइट पत्थरों से निर्मित है और इसमें चार प्रवेश द्वार, कुएँ और गुप्त मार्ग हैं जिन्हें चतुराई से बनाया गया है। वर्तमान में इसकी देखरेख भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा की जाती है।

ताज-उल-मसाजिद, भोपालImage Credit : ट्विटर08 / 09

ताज-उल-मसाजिद, भोपाल

मध्यप्रदेश के भोपाल में स्थित ताज-उल-मसाजिद न सिर्फ भारत बल्कि एशिया की सबसे बड़ी मस्जिदों में शुमार है। शाहजहां बेगम ने इसकी नींव रखी थी। उनके बाद सुल्तान जहां बेगम ने इसे और विस्तार दिया और सजावट पूरी कराई। मुगल-इंडो-इस्लामिक शैली में बनी इस मस्जिद में विशाल गुम्बद, मेहराबें और लाल पत्थर की भव्यता शामिल है।

दक्षिणेश्वर काली मंदिरImage Credit : ट्विटर09 / 09

दक्षिणेश्वर काली मंदिर

कोलकाता के हुगली नदी किनारे स्थित दक्षिणेश्वर काली मंदिर आज भी बंगाल की आध्यात्मिक पहचान है। यह स्वामी रामकृष्ण परमहंस की साधना स्थली के रूप में विश्वभर में जाना जाता है। इस भव्य मंदिर का निर्माण रानी रश्मोनी ने करवाया था। कहा जाता है कि रानी रश्मोनी को एक दिव्य स्वप्न आया, जिसमें देवी ने उन्हें आदेश दिया कि नदी किनारे उनकी मूर्ति स्थापित कर एक मंदिर बनवाया जाए। इसके बाद रानी ने इस विशाल मंदिर परिसर का निर्माण करवाया। मंदिर का निर्माण 1847 में शुरू होकर 1855 में पूरा हुआ।

End of Photo Gallery
Subscribe to our daily Newsletter!