क्या टीपू सुल्तान शिवाजी के ‘समकक्ष’ थे? सपकाल के बयान से चढ़ा महाराष्ट्र का सियासी पारा
- Edited by: शिव शुक्ला
- Updated Feb 14, 2026, 11:03 PM IST
टीपू सुल्तान को लेकर इतिहास में अलग-अलग मत रहे हैं। एक वर्ग उन्हें अंग्रेजों के खिलाफ डटकर लड़ने वाला योद्धा मानता है। वहीं दूसरा वर्ग दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में हिंदुओं के साथ कथित दुर्व्यवहार के आरोपों को लेकर उनकी आलोचना करता है।
टीपू सुल्तान बनाम शिवाजी पर सियासत तेज।
महाराष्ट्र की सियासत में उस समय नया विवाद खड़ा हो गया जब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने 18वीं शताब्दी के मैसूर शासक टीपू सुल्तान को छत्रपति शिवाजी के 'समकक्ष' बताया। जिसके बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सपकाल की तीखी आलोचना करते हुए उनकी टिप्पणी को शर्मनाक करार दिया। इतना ही नहीं सीएम ने तत्काल उनसे माफी की मांग भी की है।
क्या है पूरा मामला?
बुलढाणा में पत्रकारों से बातचीत के दौरान सपकाल ने मालेगांव महानगरपालिका की उप-महापौर शान-ए-हिंद निहाल अहमद के कार्यालय में टीपू सुल्तान का चित्र लगाए जाने को लेकर हुए विवाद पर प्रतिक्रिया दी। इस पर शिवसेना पार्षदों और कुछ हिंदू संगठनों ने आपत्ति जताई थी। सपकाल ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने ‘स्वराज’ की जो अवधारणा दी, उसी आदर्श से प्रेरित होकर टीपू सुल्तान ने अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि टीपू सुल्तान एक योद्धा और भारत के भूमिपुत्र के रूप में उभरे। हमें उन्हें वीरता के प्रतीक के रूप में शिवाजी महाराज के समकक्ष मानना चाहिए।
हालांकि बाद में उन्होंने बाद में सपकाल ने ’एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज की वीरता अतुलनीय है, जबकि टीपू सुल्तान वीर और स्वराज प्रेमी थे। उन्होंने लिखा कि छत्रपति शिवाजी महाराज को आदर्श मानकर ही टीपू सुल्तान ने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी।
सपकाल ने दावा किया कि जब टीपू सुल्तान विदेशी शासकों से लड़ रहे थे, तब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की विचारधारा पर अमल करने वाले लोग अंग्रेजों के लिए जासूसी और गुलामी कर रहे थे। इसलिए देवेंद्र फडणवीस को इतिहास पढ़ाने का दिखावा नहीं करना चाहिए। महाराष्ट्र के लोग नहीं भूले हैं कि भाजपा-आरएसएस, (पूर्व राज्यपाल) भगतसिंह कोश्यारी और अन्य लोगों ने छत्रपति शिवाजी महाराज के खिलाफ क्या-क्या बोला और कैसे उनका अपमान किया।
फडणवीस का पलटवार
वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष के बयान नागपुर में मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने तीखी प्रतिक्रिया दी। फडणवीस ने सपकाल पर निशाना साधते हुए कहा कि यह तुलना निंदनीय है और कांग्रेस नेता को खुद पर शर्म आनी चाहिए। उन्होंने नागपुर में संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "महाराष्ट्र इसे बर्दाश्त नहीं करेगा। सपकाल को छत्रपति शिवाजी महाराज की तुलना टीपू सुल्तान से करने के लिए माफी मांगनी चाहिए। कांग्रेस को इस मामले का संज्ञान लेना चाहिए और उसके सहयोगी दलों को सपकाल की टिप्पणी पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।
कांग्रेस का बचाव
महाराष्ट्र कांग्रेस प्रवक्ता अतुल लोंढे ने भाजपा पर “सांप्रदायिक तनाव भड़काने” का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा 'समकक्ष' शब्द को मुद्दा बनाकर बेरोजगारी, महंगाई, किसान आत्महत्या और बिजली दरों जैसे असली मुद्दों से ध्यान भटकाना चाहती है।
बढी राजनीतिक गर्मी
सपकाल ने अपने बयान में आरएसएस और भाजपा की विचारधारा पर भी निशाना साधा, जिससे विवाद और गहरा गया है। उन्होंने दावा किया कि टीपू सुल्तान विदेशी शासकों से लड़ रहे थे, जबकि कुछ विचारधाराएं अंग्रेजों के साथ खड़ी थीं। महाराष्ट्र की राजनीति में यह विवाद आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि शिवाजी महाराज की विरासत राज्य की राजनीति और जनभावनाओं से गहराई से जुड़ी है।
टीपू सुल्तान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर मतभेद
बता दें कि टीपू सुल्तान को लेकर इतिहास में अलग-अलग मत रहे हैं। एक वर्ग उन्हें अंग्रेजों के खिलाफ डटकर लड़ने वाला योद्धा मानता है। वहीं दूसरा वर्ग दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में हिंदुओं के साथ कथित दुर्व्यवहार के आरोपों को लेकर उनकी आलोचना करता है। इसके विपरीत, छत्रपति शिवाजी महाराज को सैन्य कौशल, सुशासन और जनकल्याणकारी नीतियों के लिए व्यापक सम्मान प्राप्त है।
देश और दुनिया की ताजा ख़बरें (News in Hindi) पढ़ें हिंदी में और देखें छोटी बड़ी सभी न्यूज़ Times Now Navbharat Live TV पर। देश (India News) अपडेट और चुनाव (Elections) की ताजा समाचार के लिए जुड़े रहे Times Now Navbharat से ।
