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Amritpal Singh: अपने तेवरों से भिंडरावाले की याद दिला रहा अमृतपाल सिंह, अब कहा- मैं भारतीय नागरिक नहीं

  • Written by: अमित कुमार मंडल
  • Updated Feb 26, 2023, 01:19 PM IST

पंजाब में कट्टरपंथ के नए चेहरे अमृतपाल ने कहा कि खालिस्तान की चर्चा पंजाब में एक बहुत सामान्य बात है और बाहरी लोगों को यह इसलिए डरावना लगता है क्योंकि वे इसे मीडिया के चश्मे से देखते हैं।

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भिंडरावाले जैसा है अमृतपाल का अंदाज और तेवर

Photo : ANI

पिछले कुछ समय से पंजाब में खालिस्तान का शोर कुछ ज्यादा ही सुनाई देने लगा है और अलगाववादी खुलकर इसकी मांग उठा रहे हैं। इसी को लेकर इन दिनों एक प्रमुख शख्स और संगठन चर्चा में है। ये संगठन है 'वारिस पंजाब दे'और इसका चीफ है अमृतपाल सिंह, जो अपने तेवरों से जनरैल सिंह भिंडरावाले की याद दिला रहा है। वहीं भिंडरावाले जिसने 80 के दशक में पंजाब को आतंकवाद की आग में झोंक दिया था। भारतीय सेना ने उसे निपटने के लिए सख्त कदम उठाया था, जिसका नतीजा बाद में इंदिरा गांधी की हत्या के रूप में सामने आया था।

'वारिस पंजाब दे' का प्रमुख है अमृतपाल सिंह

'वारिस पंजाब दे' संगठन का प्रमुख 30 साल का अमृतपाल सिंह खुद को भिंडरावाले की तरह पेश करने की कोशिश कर रहा है। खालिस्तान की मांग करने वाले अमृतपाल सिंह ने अमृतसर के अजनला थाने में हथियार बंद लोगों के साथ अपने साथी लवप्रीत सिंह तूफान की रिहाई के लिए तांडव मचा दिया था। इस दौरान उसने प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को भी धमकी दी लेकिन पंजाब सरकार और पुलिस मूकदर्शक बनी रही। .

अमृतपाल बोला, खुद को भारतीय नागरिक नहीं मानता हूं...

अमृतपाल ने अब नया बयान देकर सनसनी मचा दी है। उसने कहा है कि वह खुद को भारतीय नागरिक ही नहीं मानता है। अमृतपाल सिंह ने शनिवार को अपने भारतीय पासपोर्ट को महज एक यात्रा दस्तावेज बताते हुए कहा कि वह खुद को भारत का नागरिक नहीं मानता है। अमृतपाल ने कहा कि पासपोर्ट उसे भारतीय नहीं बनाता है। उसने कहा कि अमित शाह के खिलाफ उसकी टिप्पणी केंद्रीय गृह मंत्री के लिए खतरा नहीं है, बल्कि शाह की टिप्पणी खुद उसके लिए खतरा है।

अमित शाह ने कहा था कि वह खालिस्तान आंदोलन को बढ़ने नहीं देंगे। अमृतपाल ने कहा- मैंने कहा था कि इंदिरा गांधी ने भी ऐसा ही किया था और अगर आप (गृह मंत्री) ऐसा करते हैं तो आपको परिणाम भुगतने होंगे। समाचार एजेंसी एएनआई के साथ एक बातचीत में अमृतपाल ने उग्रवाद को बहुत स्वाभाविक घटना करार दिया और कहा कि अगर पुलिस उनके अहिंसक विरोध को रोकने की कोशिश करती है तो हिंसा उसके नियंत्रण में नहीं होगी।

अमृतपाल ने हिंदू राष्ट्र और खालिस्तान के बीच एक समानांतर रेखा खींचते हुए एक अलग राज्य के लिए खालिस्तान के नारे का बचाव किया। पंजाब में कट्टरपंथ के नए चेहरे अमृतपाल ने कहा कि खालिस्तान पंजाब में एक बहुत सामान्य चर्चा है और बाहरी लोगों को ये इसलिए डरावना लगता है क्योंकि वे इसे मीडिया के चश्मे से देखते हैं। उसने कहा, जब आप पंजाबी नहीं हैं और बार-बार राज्य का दौरा नहीं करते हैं, और जब आप मीडिया के चश्मे से सब कुछ देखते हैं, तो यह बहुत डरावना लगता है। लेकिन ऐसा नहीं है। खालिस्तान यहां एक बहुत ही सामान्य चर्चा है।

कैसे चर्चा में आया अमृतपाल?

पंजाब पुलिस ने 17 फरवरी को अमृतपाल और उनके 30 समर्थकों के खिलाफ रूपनगर जिले के चमकौर साहिब के रहने वाले और सिख उपदेशक वरिंदर सिंह को कथित तौर पर अगवा करने और पिटाई करने के आरोप में मामला दर्ज किया था। वरिंदर ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि अमृतपाल के सहयोगियों ने उन्हें अजनाला से अगवा कर लिया और उसे एक अज्ञात स्थान पर ले गए। एहां अमृतपाल के कट्टरपंथी भाषणों को लेकर उसकी आलोचना करने और झूठा प्रचार फैलाने का आरोप लगाकर उसे बेरहमी से पीटा गया।

अजनाला पुलिस स्टेशन के बाहर दिखाई अपनी ताकत

इसके बाद अमृतपाल ने बुधवार को घोषणा की कि वह अपने समर्थकों के साथ अजनाला पुलिस स्टेशन के बाहर विरोध प्रदर्शन करेगा, जहां मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने भीड़ को रोकने के लिए अजनाला की ओर जाने वाली सभी सड़कों पर नाकाबंदी की थी, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। दोपहर तक वारिस पंजाब दे प्रमुख के नेतृत्व में हजारों समर्थक पुलिस कर्मियों के साथ भिड़ गए, बैरिकेड्स तोड़ दिए, सड़क पर लड़ाई हुई और फिर पुलिस स्टेशन की घेराबंदी की गई। पुलिस द्वारा अमृतपाल के प्रमुख सहयोगी लवप्रीत सिंह को छोड़ने की सहमति जताने के बाद ही प्रदर्शनकारियों ने धरना खत्म किया। इसके बाद तूफान के नाम से मशहूर लवप्रीत सिंह शुक्रवार को रिहा कर दिया गया। इस घटना के बाद अचानक हर कोई अमृतपाल के बारे में बात कर रहा है।

भिंडरावाले जैसा है अमृतपाल का अंदाज और तेवर

उसकी तुलना अब भिंडरावाले से होने लगी है। न सिर्फ अमृतपाल का पहनावा भिंडरावाले जैसा है, उसके तेवर और बोलने का तरीका भी भिंडरावाले की याद दिलाता है। अमृतपाल एक खालिस्तानी और स्वघोषित अलगाववादी है, जिसने ड्रग्स से लड़ने के लिए सिख युवाओं को शिक्षा देने, उन्हें सशस्त्र करने और संगठित करने के नाम पर एक नया रास्ता चुना है। पंजाब के मौजूदा हालात के लिए वह दिल्ली और पंजाब में केंद्र के सहयोगियों को जिम्मेदार ठहराता है। उसका अंदाज बिल्कुल 80 के दशक में कुख्यात जरनैल सिंह भिंडरावाले जैसा है। खालसा के लिए बने पहनावे में वह कुछ-कुछ भिंडरावाले जैसा ही नजर आता है। ये पहनावा है गोल दस्तार (गोल पगड़ी) और बाना (गाउन)। अमृतपाल सिंह 30 साल का इंजीनियरिंग ड्रॉपआउट हैं, जिसने पिछले साल दुबई से लौटने के बाद पंजाब के धार्मिक-राजनीतिक परिदृश्य में नई हलचल पैदा कर दी है।

अमृतपाल सिंह खुद को खालिस्तानी आतंकी जनरैल सिंह भिंडरावाले का अनुयायी होने का दावा करता है। उसने अपनी ताजपोशी पर कहा भी था कि मैं भिंडरावाले को अपनी प्रेरणा मानता हूं और उसके बताए रास्ते पर ही चलूंगा। मैं उनके जैसा बनना चाहता हूं। मैं उनकी नकल नहीं कर रहा हूं , क्योंकि मैं उनके पैरों की धूल बराबर भी नहीं हूं।

कौन था जनरैल सिंह भिंडरावाले?

1977 के आसपास जनरैल सिंह भिंडरावाले को दमदमी टकसाल का प्रमुख चुना गया था। तब उसकी उम्र करीब 30 साल थी। टकसाल की कमान संभालते ही उसने पंजाब में उथल-पुथल मचानी शुरू कर दी थी। 80 के दशक में जब पंजाब में हिंसक घटनाएं बढ़ने लगी थीं, तब जनरैल सिंह भिंडरावाले के नाम की चर्चा और तेजी से होने लगी थी। इसी दौरान पंजाब केसरी के संस्थापक और संपादक जगत नारायण की हत्या कर दी गई थी। इसके लिए भिंडरावाले की भड़काऊ भाषणों को जिम्मेदार ठहराया गया था, लेकिन सबूतों के अभाव में उसे गिरफ्तार नहीं किया गया। 1982 में भिंडरावाले ने स्वर्ण मंदिर में अपना ठिकाना बना लिया और अकाल तख्त से अपने विचार रखने शुरू कर दिए थे। भिंडरावाले लगातार खालिस्तान की बात करने लगा था। उसकी ताकत बढ़नी शुरू हो गई थी और उसे रोकना सरकार के लिए बहुत जरूरी हो गया था। तब इंदिरा सरकार ने ऑपरेशन ब्लू स्टार शुरू किया और 6 जून को इसी अभियान में भिंडरावाले को ढेर कर दिया गया। इसके बाद पंजाब ने आतंकवाद का नया दौर देखा और इससे निपटने में पूरा दशक लग गया। पंजाब में अब दोबारा खालिस्तान की मांग जोर-शोर से सुनाई पड़ने लगी है।

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अमित कुमार मंडल
अमित कुमार मंडल author

अमित मंडल टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में न्यूज डेस्क पर Assistant Editor के रूप में काम कर रहे हैं। प्रिंट, टीवी और डिजिटल—तीनों माध्यमों में कुल मिलाकर... और देखें

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