ट्रूडो की कनाडा में इस समय लोकप्रियता निचले स्तर पर है और भारत, कनाडा में खालिस्तानी गतिविधियों को लेकर खरी-खरी सुना चुका है। भारत से स्वदेश पहुंचने के कुछ दिनों बाद कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो ने आरोप लगाया है कि खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत का हाथ भी हो सकता है।
कनाडा में एक भारतीय राजनयिक को निष्कासित भी कर दिया। ऐसे में सवाल ये उठ रहा है कि आखिर हरदीप सिंह निज्जर कौन है, जिसके चक्कर में कनाडा, भारत के साथ अपने मधुर संबंध को खराब कर रहा है।
वहीं अमेरिका के एक विशेषज्ञ ने सिख अलगाववादी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत सरकार के एजेंट का हाथ होने के कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के आरोपों को शर्मनाक और निंदनीय करार देते हुए अमेरिका से इसका हिस्सा न बनने का आग्रह किया है। हडसन इंस्टीट्यूट थिंक-टैंक में आयोजित एक पैनल चर्चा में अमेरिकन इंटरप्राइज इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ फेलो माइकल रुबिन ने दावा किया कि ट्रूडो उन लोगों के हाथों की कठपुतली बन रहे हैं, जो खालिस्तानी आंदोलन को अहं और लाभ के आंदोलन के रूप में देखते हैं।
रुबिन ने कहा कि ऐसा लगता है कि कुछ बाहरी तत्व खालिस्तान आंदोलन को पुनर्जीवित करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता कि यह कोशिश रंग लाएगी।
खालिस्तान आंदोलन को पुनर्जीवित करने की कोशिश
रुबिन ने कहा कि ऐसा लगता है कि कुछ बाहरी तत्व खालिस्तान आंदोलन को पुनर्जीवित करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता कि यह कोशिश रंग लाएगी। मैं नहीं चाहता कि अमेरिका बाहरी तत्वों की इस तरह की निंदक चालों को स्वीकृति दे। अचानक किसी अलगाववादी आंदोलन को फिर से उभरते देखना और तर्क देना कि यह वैध है, एक बहुत बड़ी गलती होगी।
