'पितृहन्ता' का अर्थ है 'पिता का हत्यारा', पितृहन्ता वंश (Haryanka Dynasty) वह राजवंश कहा जाता है, जिसके शासकों ने सत्ता हासिल करने के लिए अपने पिताओं की हत्या की। इस वंश में पिता-पुत्र के बीच सत्ता का यह क्रूर चक्र चलता रहता है।
भारतीय इतिहास में अन्य वंशों में भी पितृहन्ता शासक हुए, कई राजाओं ने पिता की हत्या करके गद्दी पाई, लेकिन 'पितृहन्ता वंश' विशेष रूप से हर्यक वंश के लिए प्रयोग होता है। हर्यक वंश के कई राजाओं ने अपने पिता की हत्या करके ही राजगद्दी पाई थी। यही कारण है कि कि हर्यक वंश को पितृहन्ता वंश कहा जाता है।
हर्यक वंश को 'पितृहन्ता वंश' इसलिए कहा जाता है, क्योंकि इस वंश के शासकों, विशेषकर अजातशत्रु और उसके बाद के राजाओं ने सत्ता हासिल करने के लिए अपने पिताओं की हत्या की थी, जिसमें बिम्बिसार (अजातशत्रु के पिता) और बाद में उदायिन (अजातशत्रु के पिता) शामिल थे, और यह प्रवृत्ति वंश की पहचान बन गई थी, जिससे यह पितृ-हत्या की परंपरा के लिए जाना जाने लगा।
हर्यक वंश की स्थापना 544 ईसा पूर्व में बिम्बिसार द्वारा की गई थी। यह वंश नागवंश की एक उपशाखा माना जाता है और एक क्षत्रिय वंश था। हर्यक वंश के शासनकाल में ही मगध का राजनीतिक शक्ति के रूप में प्रथम बार संगठित उदय हुआ। इसी कारण बिम्बिसार को मगध साम्राज्य का वास्तविक संस्थापक माना जाता है। उन्होंने गिरिव्रज (राजगृह) को मगध की राजधानी बनाया।
हर्यक वंश को पितृहन्ता वंश के रूप में जाना जाता है। यह एक अत्यंत शक्तिशाली साम्राज्य था, जिसने लगभग 684 ईसा पूर्व से 320 ईसा पूर्व तक भारतवर्ष के बड़े हिस्से पर शासन किया। महाकाव्य परंपरा के अनुसार बृहद्रथ ने मगध की नींव रखी थी, लेकिन हर्यक वंश के शासक बिम्बिसार ने मगध का वास्तविक विस्तार और सुदृढ़ीकरण किया। प्राचीन काल का वही मगध आज के बिहार के रूप में जाना जाता है, जिसका विस्तार वर्तमान पटना, गया, नालंदा, औरंगाबाद तथा आसपास के क्षेत्रों तक फैला हुआ था।
हर्यक वंश (लगभग 544 से 413 ईसा पूर्व) में कुल सात शासक हुए। इस वंश के प्रमुख राजाओं में संस्थापक बिम्बिसार, अजातशत्रु और उदयन शामिल थे। हर्यक वंश का अंतिम शासक नागदशक था, जिसे अपदस्थ कर शिशुनाग वंश की स्थापना की गई।
हर्यक वंश से पहले मगध पर प्रद्योत राजवंश और उससे भी पहले बृहद्रथ वंश का शासन था, हालांकि बृहद्रथ वंश के बारे में ऐतिहासिक प्रमाण कम मिलते हैं और हर्यक वंश को मगध का पहला वास्तविक और प्रमुख शासक वंश माना जाता है, जिसकी स्थापना बिम्बिसार ने की थी।