'जब चीन हमारे सामने आगे बढ़ रहा था,तब 56 इंच के सीने का क्या हुआ?'सदन में हंगामे के बाद केंद्र पर बरसे राहुल गांधी
- Edited by: शिव शुक्ला
- Updated Feb 2, 2026, 05:57 PM IST
संसद भवन परिसर में पत्रकारों से बातचीत में राहुल गांधी ने कहा कि वह केवल दो-तीन पंक्तियां पढ़ना चाहते थे,जो राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े एक अहम प्रसंग को सामने लाती हैं। उनके अनुसार,यह पूर्व सेना प्रमुख के अनुभव और राजनीतिक नेतृत्व के साथ हुई बातचीत पर आधारित है। उन्होंने सवाल किया कि अगर यह सेना प्रमुख का दृष्टिकोण है,तो सरकार इससे डर क्यों रही है।
राहुल गांधी
लोकसभा में हंगामे के बाद विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर प्रधानमंत्री मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पर हमला बोला है। उन्होंने लोकसभा में दिए गए अपने वक्तव्य के बारे में कहा कि मैं खुद यह नहीं कह रहा यह सेना प्रमुख के हवाले से एक लेख में छपा है। वे मुझे बोलने नहीं दे रहे क्योंकि वे डरे हुए हैं। इस दौरान उन्होंने चीन का जिक्र करते हुए केंद्र सरकार से भी सवाल किया। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी और राजनाथ सिंह को सिर्फ एक लाइन का डर है। अगर यह सच्चाई जनता के सामने उजागर हो जाएगी और यह भी पता चलेगा कि जब चीन हमारे सामने खड़ा होकर आगे बढ़ रहा था,तब 56 इंच के सीने का क्या हुआ?
क्या बोले राहुल गांधी
सदन स्थगित होने के बाद संसद के बाहर राहुल गांधी ने कहा कि यह मैं नहीं कह रहा,यह पूर्व सेना प्रमुख ने अपनी किताब में लिखा है। किताब को प्रकाशित नहीं होने दिया जा रहा है। वह ठंडे बस्ते में पड़ी है,और यह सेना प्रमुख का नजरिया है। सेना प्रमुख के नजरिए से वे इतना क्यों डर रहे हैं? सेना प्रमुख जो कह रहे हैं, उससे वे इतना क्यों डर रहे हैं? हम इससे कुछ सीखेंगे। बेशक,हम एक प्रधानमंत्री के बारे में कुछ सीखेंगे। हम राजनाथ सिंह जी के बारे में कुछ सीखेंगे। लेकिन हम सेना के बारे में भी कुछ सीखेंगे और यह भी जानेंगे कि देश के राजनीतिक नेतृत्व ने सेना को किस तरह निराश किया।
सेना प्रमुख नरवणे ने प्रधानमंत्री और राजनाथ सिंह के बारे में साफ लिखा
राहुल गांधी ने आगे कहा कि मैं कह रहा हूं कि सेना प्रमुख नरवणे ने अपनी किताब में प्रधानमंत्री और राजनाथ सिंह जी के बारे में स्पष्ट रूप से लिखा है। यह एक लेख में छपा है। मैं उस लेख का हवाला दे रहा हूं। वे मुझे बोलने नहीं दे रहे हैं...वे डरे हुए हैं क्योंकि अगर यह बात सामने आई, तो नरेंद्र मोदी और राजनाथ सिंह की सच्चाई जनता के सामने उजागर हो जाएगी और यह भी पता चलेगा कि जब चीन हमारे सामने खड़ा होकर आगे बढ़ रहा था,तब 56 इंच के सीने का क्या हुआ?
संसद भवन परिसर में पत्रकारों से बातचीत में राहुल गांधी ने कहा कि वह केवल दो-तीन पंक्तियां पढ़ना चाहते थे,जो राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े एक अहम प्रसंग को सामने लाती हैं। उनके अनुसार,यह पूर्व सेना प्रमुख के अनुभव और राजनीतिक नेतृत्व के साथ हुई बातचीत पर आधारित है। उन्होंने सवाल किया कि अगर यह सेना प्रमुख का दृष्टिकोण है,तो सरकार इससे डर क्यों रही है।
चीन के साथ सीमा विवाद में जमीन खोने से जुड़े दावों पर राहुल गांधी ने कहा कि यह मुख्य मुद्दा नहीं है। उनका कहना था कि असली सवाल यह है कि उस समय देश के नेतृत्व ने क्या दिशा दी और क्या फैसले लिए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने कठिन फैसलों से बचते हुए जिम्मेदारी दूसरों पर डाल दी।
लोकसभा में भारी गतिरोध
यह बयान उस समय आया,जब लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान राहुल गांधी द्वारा जनरल नरवणे के संस्मरण का उल्लेख करने पर भारी हंगामा हुआ। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित सत्तापक्ष के कई सदस्यों ने इस पर आपत्ति जताई और कांग्रेस नेता पर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाया। इसके बाद सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई और आखिर में चार बजे के करीब दिन भर के लिए स्थगित करनी पड़ी।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने राहुल गांधी को इस मुद्दे पर आगे बोलने की अनुमति नहीं दी,लेकिन विपक्षी नेता अपने रुख पर कायम रहे। विपक्ष के अन्य सांसद भी उनके समर्थन में खड़े नजर आए,जिससे सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।
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