बंगाल में SIR को लेकर 'सुप्रीम' सुनवाई; ममता ने मांगा 5 मिनट तो CJI कही ये बात; बोले- हम निकालेंगे समाधान
- Reported by: गौरव श्रीवास्तवEdited by: अनुराग गुप्ता
- Updated Feb 4, 2026, 02:11 PM IST
Bengal SIR: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण को चुनौती देने वाली मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी
Bengal SIR: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को चुनौती देने वाली मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में बुधवार को सुनवाई हुई। इस दौरान, कोर्ट ने चुनाव आयोग (Election Commission) को नोटिस जारी किया। सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी ने शीर्ष अदालत से अपना पक्ष रखने की अनुमति मांगी और कहा कि पश्चिम बंगाल के लोगों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने शीर्ष अदालत से लोगों के हितों की रक्षा करने की अपील की।
'मतदाता सूची से काटे गए नाम'
ममता बनर्जी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने सुप्रीम कोर्ट में दलीलें पेश कीं। इस दौरान उन्होंने बताया कि कैसे तार्किक विसंगति (Logical Discrepancy) के नाम पर पश्चिम बंगाल में लोगों के नाम मतदाता सूची से काट दिए गए। साथ ही उन्होंने कोर्ट को यह भी बताया कि कैसे माता-पिता और बच्चों के सरनेम की वर्तनी में अंतर होने की वजह से नोटिस जा रहा है।
ममता ने कोर्ट से अपनी बात रखने की मांगी इजाजत
सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी ने शीर्ष अदालत से अपनी बात रखने की अनुमति मांगी और कहा कि मैं बंगाल से हूं और समस्याओं को बेहतर बता सकती हूं। उन्होंने कहा कि हमें न्याय नहीं मिल रहा है, कभी भी... मैंने 6 बार चुनाव आयोग (Election Commission) को पत्र लिखा है। ममता बनर्जी ने कहा, ''मैं साधारण परिवार से हूं। मैं बहुत महत्वपूर्ण नहीं हूं, लेकिन मैं सभी के लिए लड़ रही हूं।''
इस दौरान, मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने हस्तक्षेप किया और कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार की तरफ से बेहतरीन वकील आपका पक्ष रख रहे हैं। फिर ममता बनर्जी ने 5 मिनट अपनी बात रखने की इजाजत मांगी। जिस पर सीजेआई ने उन्हें 15 मिनट बोलने की अनुमति दी। सीजेआई ने कहा कि हम आपको 15 मिनट देंगे।
'कोई नहीं छीन सकता वोटिंग राइट'
सीजेआई ने कहा कि हम समाधान निकालेंगे। शीर्ष अदालत ने कहा, ''जो असली मतदाता हैं, उनका चुनावी अधिकार कोई नहीं छीन सकता है। हम जिम्मेदारी से नहीं भागेंगे। इसका समाधान निकालेंगे।''

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी ने रखी अपनी बात
'SIR से पैदा हो रहा भेदभाव'
ममता बनर्जी ने कहा कि एसआईआर से भेदभाव पैदा हो रहा है। अगर लड़की शादी के बाद पति का सरनेम लगा रही है तो उनके नाम काटे जा रहे हैं... सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत का आभार जताते हुए कहा कि हम आपको धन्यवाद देते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड को मान्य दस्तावेज के तौर पर इजाजत दी... लेकिन बंगाल में उसके साथ कई कागज मांगे जा रहे हैं। इस दौरान बंगाल में बीएलओ की मौत का जिक्र किया गया।
ममता बनर्जी ने अपनी दलीलों में कहा कि 100 से ज्यादा बीएलओ की मौत हो गई और कई अस्पताल में भर्ती हैं... बंगालियों को निशाने पर लिया जा रहा है। असम में एसआईआर नहीं हो रहा, लेकिन पश्चिम बंगाल में क्यों?
इस दौरान, सीजेआई ने कहा कि एसआईआर की वैलेडिटी पर अलग से सुनवाई हो रही है। आप जिस मुद्दे को रख रही है। वो एसआईआर की वैधता से अलग है। हम चुनाव आयोग के अधिकारियों को कहेंगे कि इस समस्या देखें, जो नाम को लेकर हो रही है।
दोनों पक्षों के बीच जोरदार बहस
वहीं, ममता बनर्जी ने कहा कि जो आब्जर्वर भाजपा राज्यों से आए हैं वो ERO और जिला निर्वाचन अधिकारी की सुन नहीं रहे हैं। लोगों के नाम काटे जा रहे हैं। इस दौरान, दोनों पक्षों के बीच जोरदार बहस हुई।
चुनाव आयोग का पक्ष रख रहे वकील राकेश द्विवेदी ने दलील दी कि माइक्रो आब्जर्वर सिर्फ ERO की मदद कर रहे हैं। उन्हें कानून के मुताबिक ही पश्चिम बंगाल में लगाया गया है। उन्होंने कहा, ''हमने राज्य सरकार को कई बार लिखा कि क्लास टू अधिकारियों को ERO के तौर पर नियुक्त किया जाए। सिर्फ 80 अधिकारी दिए गए... गलती उनकी है, इसीलिए हमने माइक्रो ऑब्ज़र्वर नियुक्त किए हैं।
ममता बनर्जी ने कहा कि जो बाकी राज्यों में किया गया वही पश्चिम बंगाल में किया जाए। उन्होंने आगे पश्चिम बंगाल को निशाना न बनाए जाने की अपील की। शीर्ष अदालत ने कहा कि हर राज्य के अपने मुद्दे होंगे। इसलिए हो सकता है नियम में राज्यवार बदलाव हो रहे हैं।
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