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पश्चिम बंगाल राशन घोटाले में ED के हाथ लगी मैरून डायरी: कोडवर्ड में लिखे मिले सफेदपोशों के नाम, ऐसे हुआ फर्जी काम!

  • Edited by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Oct 28, 2023, 01:28 PM IST

West Bengal Ration Scam: ईडी सूत्रों की मानें तो बकीबुर रहमान की तीन शेल कंपनियों (Hanuman Realcon Pvt. Ltd., Gracious Innovative Pvt. Ltd. और Gracious Creation Pvt. Ltd) के बारे में भी पता चला है। इनमें डमी डायरेक्टर थे।

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तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फाइल)

Photo : iStock

अनुज मिश्रा। पश्चिम बंगाल में हुए राशन घोटाले से जुड़े मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। शनिवार (28 अक्टूबर, 2023) को पता चला कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के हाथ इस स्कैम से जुड़ी एक डायरी लगी है। ऐसे में माना जा रहा है कि यह मैरून रंग की डायरी घोटाले के बड़े सारे राज खोल सकती है। बताया गया कि इसमें बंगाल के घोटालेबाजों के नाम कोडवर्ड में लिखे हुए हैं। ईडी ने छापेमारी के दौरान इस डायरी को जब्त किया था, जिसमें स्कैम से जुड़े कई सफेदपोशों के नाम हैं।

ईडी सूत्रों की मानें तो बकीबुर रहमान की तीन शेल कंपनियों (Hanuman Realcon Pvt. Ltd., Gracious Innovative Pvt. Ltd. और Gracious Creation Pvt. Ltd) के बारे में भी पता चला है। इनमें डमी डायरेक्टर थे, जिनके जरिए राशन की खरीद-फरोख्त हो रही थी। इन कंपनियों में अवैध तरीके से 20 करोड़ से ज्यादा रुपए आए। खास बात है कि यह पैसा ज्यादातर कैश में आया था।

रहमान ने बताया कि इन कंपनियों का पैसा लोन के रूप में फूड एंड सप्लाई मंत्री ज्योतिप्रिया मालिक को जा रहा है। वह इसके लाभार्थी हैं, क्योंकि लोन वापस नहीं लिया गया। आगे की जांच से पता चला कि तीन कंपनियों के पहले निदेशक और शेयरधारक ज्योति प्रिया मलिक की पत्नी मनिदीपा मलिक और उनकी बेटी प्रियदर्शिनी मलिक थीं। इन कंपनियों में बोगस शेयर प्रीमियम और अनाज के व्यापार से मिले फायदे के नाम पर पैसा जमा किया गया। कंपनियों से 20 करोड़ से ज्यादा रुपया बकीबुर रहमान के साले के बैंक एकाउंट में गया।

26 अक्टूबर को छापेमारी के दौरान ऐसे 16 करोड़ रुपए सीज किए गए थे। छापेमारी के दौरान ईडी ने ज्योतिप्रिया मालिक के घर से इन कम्पनियों के स्टांप बरामद किए। घर में काम करने वालों के बयान दर्ज हुए। उन्होंने भी बताया कि इन कंपनियों में डायरेक्टर मलिक के परिवार के लोग हैं। रेड के दौरान एक शख्स में एक नंबर एमआईसी नाम से लिखा मिला, जिसको 68 लाख का पेमेंट दिया हुआ दिखाया गया था।

ऐसा बताया गया कि वह मिनिस्टर ऑफ इंचार्ज था, जो असल में फूड एंड सप्लाई मिनिस्टर थे। उसने बताया कि ये पैसे बकीबुर रहमान के कहने पर मंत्री को दिए गए। रहमान ने मलिक और उसके परिवार के लिए फ्लाइट के टिकट भी बुक कराए इसके भी सबूत मिले। पड़ताल में यह भी पता चला कि नवंबर 2016 से मार्च 2017 के दौरान मनिदीपा मलिक के आईडीबीआई बैंक खाते में 6.03 करोड़ रुपए जमा किए गए थे। नवंबर 2016 के दौरान प्रियदर्शनी मलिक के आईडीबीआई बैंक खाते में 3.79 करोड़ रुपये जमा किए गए थे।

4 अप्रैल 2016 को ज्योतिप्रिया मालिक ने पश्चिम बंगाल विधान सभा चुनाव में जो हलफनामा फाइल किया था, उसमें अपनी पत्नी के खाते में केवल 45 हजार रुपए दिखाए थे जबकि अगले ही साल उनके खाते में 6 करोड़ से ज्यादा आ गए। ज्योतिप्रिया के ठिकानों पर छापेमारी के दौरान "मैरून डायरी" रखी हुई पाई गई, जिसमें भारी मात्रा में सिलसिलेवार तरीके से कैश और रसीदों की पूरी जानकारी थी। डायरी में एमआईसी ज्योति प्रिया मलिक को 'बालूदा' के नाम से दर्शाया गया और तीन कंपनियों के नाम बताए गए हैं। एनपीजी का भी नाम था और लेनदेन के बारे में जानकारी थी।

जब्त डायरी में दिखाया गया कि 'बालुदा' यानी एमआईसी को कैश कैसे मिला। यह ज्योतिप्रिया मलिक और उसकी तीन कंपनियों में जमा किया गया था, जिन्हें पहले शारदा आर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड (ग्रेसियस क्रिएशन प्राइवेट लिमिटेड), शारदा फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड (ग्रेसियस इनोवेटिव प्राइवेट लिमिटेड) और हनुमान रियलकॉन प्राइवेट लिमिटेड के नाम से जाना जाता था।

यूं हुई घोटाले की शुरुआत

- पश्चिम बंगाल पुलिस ने इस घोटाले को लेकर 22 फरवरी 2020 से लेकर 2022 तक कई केस दर्ज किए।

- पीडीएस राशन अवैध तरीके से बेचते और इनके कई वितरक गिरफ्तार किए गए।

- यह राशन पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन स्कीम (पीडीएस) के तहत वेस्ट बंगाल पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम के जरिए सप्लाई होना था।

- राशन सप्लाई की जिम्मेदारी सरकार ने एनपीजी राइस मिल्स प्राइवेट लिमिटेड को दी थी, जिसका डायरेक्टर बकीबुर रहमान था।

- छापेमारी के दौरान एक शख्स के यहां से डायरी मिली, जिसमें खरीद फरोख्त के डिटेल्स थे।

- उस शख्स ने बताया कि वह अवैध तौर पर पिछले 8-10 सालों से पीडीएस राशन की खरीद फरोख्त कर रहा है।

- एक और शख्स ने बताया कि उसके पास पीडीएस राशन बेचने का लाइसेंस है, पर वह इस राशन को ओपन मार्केट में बेचता है।

- यह पूरा राशन एनपीजी राइस मिल्स प्राइवेट लिमिटेड से आ रहा था, जो मालिक की मिलीभगत से खुले बाजार में अवैध तरीके से बेचा जा रहा था।

- फ्लोर मैनेजर ने बताया कि वह सरकारी वितरकों को 20-40 प्रतिशत कम राशन सप्लाई करता है और यह राशन प्राइवेट दुकानदारों को जाता है। सबूत के तौर पर कई रजिस्टर जब्त किए गए, जिसमें पेमेंट और ऐसे वितरकों की पूरी जानकारी थी।

- ईडी ने यहां से पश्चिम बंगाल सरकार के अलग अलग विभागों के 100 से ज्यादा स्टांप बरामद किए।

-आरोपी रहमान ने भी माना कि वह कई साल से इस गोरखधंधे में लगा है।

- रहमान को 14 अक्टूबर 2023 को गिरफ्तार कर लिया, जो ज्योतिप्रिया मलिक का बेहद करीबी है।

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