Rajnath Singh: समय के साथ युद्ध के बदलते तौर-तरीके के मद्देनजर रक्षा क्षेत्र में मजबूती लाने के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बड़ी बात कही है। राजनाथ सिंह ने बुधवार को कहा कि इसके लिए शोध एवं विकास को बढ़ावा देने के लिए देश में नवाचार युक्त एक इको-सिस्टम तैयार करने की जरूरत है। रक्षा मंत्री ने यह बात डिफेंस अकाउंट्स डिपार्टमेंट के 278वें फाउंडेशन डे के अवसर पर कही।
यह हमारे लिए भी एक बड़ी चुनौती-राजनाथ
कार्यक्रम में राजनाथ ने कहा कि 'आज युद्ध का तौर-तरीका तकनीक आधारित हो गया है। यह इतना ज्यादा हो गया है कि विश्वास करना मुश्किल है। दुश्मन को चौंकाने के लिए युद्ध में बड़े स्तर पर नई तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह हमारे लिए भी एक बड़ी चुनौती के रूप में पेश आ रही है। आधुनिक युद्ध में इस्तेमाल नई तकनीक एवं प्रौद्योगिकी वर्षों के शोध एवं विकास का नतीजा है, इसलिए हम इसे नजरंदाज नहीं कर सकते।'
आकाशतीर वायु रक्षा प्रणाली की सराहना की
इससे पहले रक्षा मंत्री ने मंगलवार को कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान प्रदर्शित एकीकृत, तत्क्षण अभियानगत समन्वय के साथ तीनों सेनाओं का तालमेल निर्णायक परिणाम देने का एक 'जीवंत उदाहरण' है, और इसे भविष्य की सभी सैन्य कार्रवाइयों के लिए मानक बनना चाहिए। एक कार्यक्रम में अपने संबोधन में सिंह ने इस बात पर प्रकाश डाला कि किस प्रकार भारतीय वायु सेना की एकीकृत वायु कमान और नियंत्रण प्रणाली ने सेना की आकाशतीर वायु रक्षा प्रणाली और भारतीय नौसेना की त्रिगुण के साथ मिलकर काम किया और यह भारत और पाकिस्तान के बीच सात से 10 मई तक चले संघर्ष के दौरान संयुक्त अभियान की रीढ़ बना।
नई प्रणालियां बनानी चाहिए-राजनाथ सिंह
तीनों सेनाओं के बीच तालमेल के महत्व को रेखांकित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि एकजुटता का मार्ग संवाद, समझ और परंपराओं के प्रति सम्मान में निहित है। उन्होंने कहा कि सेनाओं को एक-दूसरे की चुनौतियों का सम्मान करते हुए एक साथ मिलकर नई प्रणालियां बनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार का मकसद तीनों सेनाओं के एकीकरण को और बढ़ावा देना है और यह न केवल नीतिगत मामला है, बल्कि तेजी से बदलते सुरक्षा माहौल में अस्तित्व का मामला भी है।
'ऑपरेशन सिंदूर' में दिखा बेहतर समन्वय
सिंह ने कहा, 'ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, तीनों सेनाओं के तालमेल ने एक एकीकृत, तत्क्षण संचालन की तस्वीर तैयार की। इसने कमांडरों को समय पर निर्णय लेने, स्थितिजन्य जागरूकता बढ़ाने और अपने नुकसान के जोखिम को कम करने में सक्षम बनाया। यह निर्णायक परिणाम देने वाली एकजुटता का जीवंत उदाहरण है और यह सफलता भविष्य के सभी अभियानों के लिए एक मानक बननी चाहिए।’
