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चीते से डबल रफ्तार,हादसे से सुरक्षा,एयरप्लेन जैसा फील, ये ट्रेन बदलेगी भारतीय रेल की इमेज

  • Agency by: Agency
  • Updated Sep 30, 2022, 01:20 PM IST

Indian Railway:पूरी तरह से मेड इन इंडिया वंदे भारत एक्सप्रेस की सबसे बड़ी खासियत, उसका पिक अप है। जो कि बुलेट ट्रेन को भी मात देता है। रेल मंत्रालय के अनुसार वंदे भारत एक्सप्रेस की दूसरी पीढ़ी ट्रेन को 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ने में मात्रा 52 सेकंड लगते हैं। जबकि बुलेट ट्रेन को इसके लिए 55 सेकंड लगते हैं।

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वंदे भारत ट्रेन है बेहद खास

Photo : Twitter
KEY HIGHLIGHTS
  • पहली वंदे भारत ट्रेन फरवरी 2019 में दिल्ली से वाराणसी के बीच चलाई गई थी।
  • अगस्त 2023 तक कुल 75 वंदे भारत ट्रेन चलाने की तैयारी है।
  • रेलवे चौथी पीढ़ी की वंदे भारत ट्रेन में स्लीपर कोच लगाने की तैयारी कर रहा है।

Vande Bharat Train: बीते 5 सितंबर को जब रेल मंत्रालय ने वंदे भारत ट्रेन के ट्रॉयल का वीडियो जारी किया था। तो वीडियो में ट्रेन की रफ्तार की तो चर्चा थी, लेकिन एक और चीज थी जिसने सबका ध्यान बरबस ही खींच लिया। वीडियो में ट्रेन की रफ्तार 180 किलोमीटर प्रति घंटे दिख रही थी और उसके बगल में पानी से भरा गिलास रखा हुआ था। इतनी तेज रफ्तार में ट्रेन चलने के बावजूद, गिलास का पानी छलक नहीं रहा था। भारतीय रेलवे का ऐसा नजारा देखना बेहद चौंकाने वाला था। इस कारनामे को भारत की पहली हाई स्पीड ट्रेन, वंदे भारत एक्सप्रेस (Vande Bharat Express) ने करके दिखाया है। दूसरी पीढ़ी (Second Generation) वाली वंदे भारत एक्स्प्रेस ट्रेन को शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने हरी झंडी भी दिखा दी है। यह अहमदाबाद से मुंबई के बीच चलेगी और भारत की तीसरी वंदे भारत ट्रेन होगी।

पिक अप के मामले में बुलेट ट्रेन से भी आगे

पूरी तरह से मेड इन इंडिया (Made In India) वंदे भारत एक्सप्रेस की सबसे बड़ी खासियत, उसका पिक अप है। जो कि बुलेट ट्रेन को भी मात देती है। रेल मंत्रालय के अनुसार वंदे भारत एक्सप्रेस की दूसरी पीढ़ी ट्रेन को 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ने में मात्रा 52 सेकंड लगते हैं। जबकि बुलेट ट्रेन को इसके लिए 55 सेकंड लगते हैं। साफ है कि जब भारत में ट्रैक तेज रफ्तार के लिए तैयार हो जाएंगे, तो वंदे भारत की तीसरी पीढ़ी की ट्रेन 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार भी छू लेगी। फिलहाल भारत में पहली पीढ़ी की वंदे भारत की रफ्तार 160 किलोमीटर प्रति घंटा है।

स्लीपर वंदे भारत ट्रेन चलाने की है तैयारी

भारत में पहली वंदे भारत ट्रेन फरवरी 2019 में दिल्ली से वाराणसी के बीच चलाई गई थी। और उसके बाद दूसरी ट्रेन दिल्ली से कटरा के लिए चलाई गई। और तीसरी ट्रेन अहमदाबाद से मुंबई के लिए चलाई गई है। इन तीनों ट्रेन की खासियत है कि इसमें केवल बैठने की व्यवस्था है। रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार अगस्त 2023 तक कुल 75 वंदे भारत ट्रेन चलाई जाएंगी। इन सभी ट्रेनों में केवल बैठने की व्यवस्था रहेगी।

VANDE BHARAT TRAIN FEATURES

वंदे भारत ट्रेन की ये है खासियत

रेलवे इसके अलावा चौथी पीढ़ी की वंदे भारत ट्रेन चलाने की भी तैयार कर रही है। इसके तहत उसने 200 स्लीपर ट्रेन के लिए टेंडर जारी कर दिया है। यानी अगरे 5-6 साल में यात्रियों को स्लीपर वंदे भारत ट्रेन में सफर करने का मौका मिल सकता है। इसके पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2022-23 के बजट में यह ऐलान किया था कि रेल मंत्रालय अगले 3 साल में 400 वंदे भारत ट्रेन चलाएगा।

इस समय वंदे भारत ट्रेन का उत्पादन इंटीग्रल कोच फैक्ट्री चेन्नई में किया जा रहा है।

कवच रोकेगा रेल दुर्घटना

भारत में बड़े रेल हादसे भी बड़ी चुनौती रहे हैं। ऐसे ट्रेनों के आमने-सामने से टकराने के लिए रेलवे नए कवच तकनीकी विकसित की है। इसके तहत एक ही ट्रैक पर आ रही ट्रेन को लड़ने से रोका जा सकेगा। इसका सफल ट्रॉयल किया जा चुका है। और साल 2022-23 में , कवच तकनीकी से 2000 किलोमीटर के रूप जोड़े जाएंगे और उसके बाद हर साल 5000-6000 किलोमीटर रेलवे ट्रैक को जोड़ा जाएगा। साल 2020 तक भारत में कुल 1.26 लाख किलोमीटर का रेलवे नेटवर्क था।

इसके अलावा LHB कोच के जरिए ट्रेन के पटरी से डीरेल होने के जोखिम को काफी कम किया जा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार रेलवे 2025-30 के बीच मे 50 हजार पुराने रेलवे कोच की जगह LHB कोच लेंगे। इसी दिशा में साल 2021-22 में LHB का उत्पादन 45 फीसदी बढ़ा है।

सालरेल हादसे (बड़े)
2015131
2016106
2017103
201872
201959
202054
202121
स्रोत: Statista
प्रशांत श्रीवास्तव
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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