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Uttarkashi Tunnel Collapse: 12वें दिन बाधाएं हुईं पार, रात तक ऑपरेशन पूरा होने के आसार, सरकार ने लिया यह सबक

  • Compiled by: अभिषेक गुप्ता
  • Updated Nov 23, 2023, 01:22 PM IST

Uttarkashi Tunnel Collapse: बाहर निकालने के बाद तुरंत ही सभी मजदूरों को सीधे चिन्यालीसौड़ ले जाया जाएगा, जिसकी तैयारी की जा रही है। एनडीआरएफ ने भी बचाव की ब्रीफिंग शुरू कर दी है। टनल में फंसे 41 मजदूरों को एनडीआरएफ के जवान ही टनल से बाहर निकालेंगे। टनल के बाहर प्राथमिक उपचार की भी तैयारी तेज कर दी गई है।

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उत्तराखंड के उत्तरकाशी में हुए सिलक्यारा सुरंग हादसे से जुड़े रेस्क्यू ऑपरेशन का गुरुवार (23 नवंबर, 2023) को 12वां दिन रहा।

Photo : AP

Uttarkashi Tunnel Collapse: उत्तराखंड के उत्तरकाशी में सिलक्यारा सुरंग (निर्माणाधीन) में फंसे 41 मजदूरों को बचाने के लिए गुरुवार (23 नवंबर, 2023) को भी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रहा। भारत सरकार के पूर्व सलाहकार भास्कर खुल्बे की ओर से बताया गया था कि जो बाधाएं थीं, वे पूरी कर ली गई हैं। अगले 12 से 14 घंटों में ड्रिलिंग का काम पूरा कर लिया जाएगा। इस बीच, अफसरों की ओर से यह भी जानकारी दी गई कि सुबह मजदूरों से सीएम पुष्कर सिंह धामी के सामने उनकी बात हुई है। गुरुवार रात तक ऑपरेशन पूरा होने की उम्मीद है।

वैसे, इससे पहले बताया गया था कि ऑपरेशन अपने अंतिम चरण में है। टनल से सरिया और स्टील काट कर निकाला जा चुका है। श्रमिकों को बाहर निकाले जाने का कोई तय समय तो नहीं बताया गया, मगर रेस्क्यू टीम उनके बेहद पहुंच चुकी है। सुरंग में 10 से 12 मीटर की ड्रिलिंग शेष है। टनल में 800 एमएम का पाइप डाला गया। एनडीआरएफ के जवान पाइप (मेक शिफ्ट टनल) इसी के जरिए रेंगते हुए अंदर जाएंगे और फिर वे अंदर श्रमिकों को ब्रीफ करेंगे कि बाहर कैसे आना है।

जोजी-ला टनल के प्रोजेक्ट हेड हरपाल सिंह ने ऑपरेशन को लेकर समाचार एजेंसी पीटीआई को जानकारी दी थी- मजदूरों के सुबह आठ बजे तक बाहर आने की संभावना है। हॉरिजन्टल ड्रिंलिंग के जरिए हमने 44 पाइप डाले हैं।

रेस्क्यू टीम से जुड़े गिरीश सिंह रावत ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया- यह ऑपरेशन अपने अंतिम चरण में है। मुझे उम्मीद है कि हमें एक से दो घंटों के भीतर नतीजे दिख सकते हैं। वर्कर्स को बाहर निकालने के लिए पाइपलाइन अंदर डाली जा चुकी है। मलबे में जो स्टील के हिस्से फंस रहे थे, उन्हें काटकर निकाला जा चुका है।

सुबह आठ बजे चिनूक हेलीकॉप्टर चिन्यालीसौड हवाई अड्डे पर लैंड करेगा और मजदूरों को एयरलिफ्ट करने के लिए रेडी रहेगा। सुरंग के बाहर एंबूलेंस भी हैं और हर तरह की सेवा-सहायता का इंतजाम किया गया है।

...तो यूं निकाले जाएंगे मजदूर

ड्रिलिंग के बाद एनडीआरएफ की 15 सदस्यों वाली टीम हेलमेट, ऑक्सीजन सिलेंडर, गैस कटर के साथ पाइपलाइन से अंदर जाएगी। चूंकि, टनल के अंदर और बाहर के तापमान में काफी अंतर होगा, इसलिए मजदूरों को तुरंत बाहर नहीं लाया जाएगा। श्रमिकों को कमजोरी महसूस होने पर यह रेस्क्यू टीम उन्हें पाइपलाइन में स्केट्स लगी टेंप्रेरी ट्रॉली के जरिए बाहर खींचकर निकालेगी। फिर उन्हें एंबुलेंस से अस्पताल भेजा जाएगा, जिसके लिए ग्रीन कॉरिडोर भी बना है। जरूरत पड़ी तो मजदूरों को एयरलिफ्ट कर ऋषिकेश एम्स ले जाया जाएगा।

सिलक्यारा हादसे से मिला यह सबक

सिलक्यारा सुरंग हादसे के बाद सरकार से लेकर समूचे सिस्टम को बड़ा सबक मिला है। मौजूदा समय में हिंदुस्तान में 29 निर्माणाधीन सुरंगें हैं. एनएचएएआई ने फैसला किया है कि वह इन सारे टनल्स का ऑडिट कराएगा। ऑडिट की प्रैक्टिस जल्द करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए जा चुके हैं।
अभिषेक गुप्ता
अभिषेक गुप्ताauthor

छोटे शहर से, पर सपने बड़े-बड़े. किस्सागो ऐसे जो कहने-बताने और सुनाने को बेताब. कंटेंट क्रिएशन के साथ नजर से खबर पकड़ने में पारंगत और "मीडिया की मंडी" में लगभग आठ साल का अनुभव. न्यूज, सिनेमा, बाइक्स और घूमने में दिलचस्पी.

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