पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने बुधवार को भारत के चुनाव आयोग (ECI) के सचिव अश्विनी कुमार मोहल को एक पत्र भेजा है। इस पत्र के जरिए उन्होंने अपनी पार्टी पर चल रहे दावे-प्रतिदावे के विवाद को तुरंत खत्म करने और जांच को अंतिम रूप देने की मांग की है।
ममता बनर्जी का आरोप है कि ऋतव्रत बनर्जी की अगुवाई वाला दूसरा गुट चुनाव आयोग द्वारा दो-दो बार मोहलत दिए जाने के बाद भी अपना जवाब दाखिल करने में नाकाम रहा है। ममता बनर्जी ने तर्क दिया कि आयोग ने जवाब के लिए 6 जुलाई की समयसीमा तय की थी, जिसका उनके गुट ने समय पर पालन किया। इसके उलट, विरोधी गुट को पहले 10 जुलाई और फिर 25 जुलाई तक की मोहलत दी गई, लेकिन उन्होंने फिर भी कोई जवाब नहीं दिया।
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ममता ने अपने पत्र में लिखा कि जब विरोधी पक्ष की ओर से कोई जवाब नहीं आया है, तो इसका साफ मतलब यह है कि उन्होंने हमारी सभी बातों को स्वीकार कर लिया है और उनके पास कोई तर्क नहीं बचा है। उन्होंने यह आशंका भी जताई कि इस अतिरिक्त समय का इस्तेमाल विरोधी गुट झूठे सबूत गढ़ने के लिए कर रहा है।
22 जून के विशेष सत्र में पार्टी के हो चुके सांगठनिक बदलाव
यह विवाद 2 जुलाई को चुनाव आयोग पहुंचा था, जब ऋतव्रत बनर्जी धड़े ने खुद को असली 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' बताते हुए चुनाव आयोग से संपर्क किया था। उनका दावा था कि 22 जून के विशेष सत्र में पार्टी के सांगठनिक बदलाव किए जा चुके हैं।
साल 2022 में पार्टी में हुए थे सांगठनिक चुनाव
वहीं ममता बनर्जी गुट का कहना है कि पार्टी के संविधान के अनुसार मौजूदा सांगठनिक कमेटियां 2027 तक पूरी तरह से वैध हैं। साल 2022 में पार्टी के सांगठनिक चुनाव हुए थे, इसलिए विरोधी गुट का यह दावा कि कमेटियां 2025 में ही खत्म हो चुकी थीं, पूरी तरह से गलत और निराधार है। ममता ने आयोग से अपील की है कि निष्पक्षता बनाए रखने के लिए अब आगे कोई नई तारीख न दी जाए और जल्द फैसला सुनाया जाए।
