टीएमसी के बागी विधायकों द्वारा विधानसभा स्पीकर को चिठ्ठी देने से पहले पार्टी के जनरल सेक्रेटरी अभिषेक बनर्जी ने विधान सभा स्पीकर को चिठ्ठी लिखी है। इसमें तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने विधानसभा में विपक्ष के नेता (Leader of Opposition) समेत कई महत्वपूर्ण पदों के लिए नामों की आधिकारिक सिफारिश कर दी है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने इस संबंध में विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर नियुक्तियों को मान्यता देने का अनुरोध किया है।
शोभनदेब चट्टोपाध्याय को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष नियुक्त करने की सिफारिश
टीएमसी की ओर से भेजे गए पत्र के अनुसार, वरिष्ठ नेता शोभनदेब चट्टोपाध्याय को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष नियुक्त करने की सिफारिश की गई है। वहीं अशीमा पात्रा और नयना बंदोपाध्याय को उप नेता प्रतिपक्ष (Deputy Leaders of Opposition) बनाए जाने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अलावा फिरहाद हकीम को मुख्य सचेतक (Chief Whip) नियुक्त करने की सिफारिश की गई है।
बीते सालों का दिया उदाहरण
पत्र में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा में पहले भी इसी परंपरा और प्रक्रिया का पालन किया जाता रहा है। टीएमसी ने उदाहरण देते हुए बताया कि वर्ष 2001 में पार्टी ने पंकज बनर्जी के नाम की सिफारिश विपक्ष के नेता के रूप में की थी, जिसे तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष ने स्वीकार किया था। इसी प्रकार 2006, 2011, 2016 और 2021 में भी संबंधित दलों द्वारा सुझाए गए नामों को मान्यता दी गई थी।
टीएमसी ने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि 15 मई 2026 को विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव के बाद मुख्यमंत्री और शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने परंपरा के अनुसार अध्यक्ष को उनकी कुर्सी तक पहुंचाया था। साथ ही राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान अध्यक्ष ने शोभनदेब चट्टोपाध्याय को टीएमसी के नेता प्रतिपक्ष के रूप में स्वागत भाषण देने के लिए आमंत्रित किया था, जिससे यह संकेत मिलता है कि उन्हें सदन में विपक्ष के नेता के रूप में स्वीकार किया जा चुका है।
मांगी औपचारिक मान्यता
पार्टी ने विधानसभा अध्यक्ष से अनुरोध किया है कि पूर्व की परंपराओं और स्थापित प्रक्रियाओं को ध्यान में रखते हुए इन नियुक्तियों को जल्द से जल्द औपचारिक मान्यता प्रदान की जाए। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब हाल ही में पश्चिम बंगाल विधानसभा में राजनीतिक समीकरणों को लेकर नई चर्चाएं तेज हुई हैं और विपक्ष की भूमिका को लेकर भी बहस जारी है।
विधायक संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी हुए बागी
रिपोर्टों के अनुसार, टीएमसी के बागी नेताओं ने एक बैठक की थी, जिसमें उन्होंने ममता बनर्जी और उनके भतीजे व राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की पार्टी लाइन का विरोध किया। सोमवार को टीएमसी ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए दो विधायकों संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी को निलंबित कर दिया। वरिष्ठ नेता और विधायक कुणाल घोष ने हाथ जोड़कर उन विधायकों से अपील की, जिन्हें पार्टी नेतृत्व के खिलाफ विद्रोह करने के लिए गुमराह किया जा रहा था। खुद ममता बनर्जी सोमवार को फेसबुक लाइव पर आईं और स्वीकार किया कि टीएमसी के भीतर फूट डालने की साजिश रची जा रही है।
