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ममता बनर्जी से खफा क्यों है कांग्रेस? 'दीदी' से अनबन की पूरी कहानी समझिए

  • Produced by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटलEdited by: आलोक कुमार राव
  • Updated Mar 22, 2023, 10:23 AM IST

Mamata Banerjee Vs Congress : जिन ममता बनर्जी को आज कांग्रेस मोदी का पार्टनर बता रही है, ये वही ममता बनर्जी है, जिनसे दो तीन साल पहले तक सोनिया गांधी और राहुल गांधी मुलाकात करते थे। कुछ साल पहले तक जब भी ममता बनर्जी राजनैतिक मीटिंग्स और विपक्षी एकता के लिए दिल्ली आती थी तो गांधी परिवार से मिलने जरूर जाती थीं।

Mamata Banerjee Vs Congress : लोकसभा चुनाव 2024 में नरेंद्र मोदी को हराने की प्लानिंग करने वाले विपक्ष में ही भयंकर लड़ाई छिड़ गई है। ममता बनर्जी और राहुल गांधी आपस में क्यों भिड़ गए हैं। और ममता बनर्जी को एक्सपोज करने के चक्कर में राहुल गांधी खुद कैसे एक्सपोज़ हो गए। जब तक राहुल गांधी के खिलाफ ममता बनर्जी नहीं बोल रही थीं तब तक ममता बनर्जी राहुल गांधी और कांग्रेस के लिए बहुत अच्छी थीं। इतनी अच्छी थीं कि खुद सोनिया गांधी और राहुल गांधी ममता बनर्जी को घर बुलाकर मिलते थे। लेकिन जैसे ही ममता बनर्जी राहुल गांधी के खिलाफ बोलने लगीं तो वह कांग्रेस की नजर में मोदी की पार्टनर हो गईं।

राहुल की लीडरशिप पर ममता ने उठाए सवाल

हाल में राहुल गांधी पर ममता बनर्जी ने कुछ बातें कहीं तो वो बातें कांग्रेस को इतनी बुरी लगीं कि कांग्रेस ने ये कह दिया कि ममता बनर्जी और नरेंद्र मोदी के बीच राहुल गांधी की बदनाम करने की डील हुई है। कांग्रेस इस बात से चिढ़ी है कि ममता बनर्जी ने राहुल गांधी की लीडरशिप पर सवाल उठा दिए। ममता बनर्जी ने राहुल गांधी के बारे में दो दिन पहले कहा था कि 'राहुल गांधी के बयान पर बीजेपी संसद नहीं चलने दे रही, बीजेपी ऐसा अपने फायदे के लिए कर रही है, बीजेपी जानबूझकर राहुल गांधी को हीरो बना रही है, बीजेपी ये इसलिए कर रही है क्योंकि राहुल गांधी अगर नेता बने रहे तो नरेंद्र मोदी को कोई खराब नहीं कहेगा।'

'कांग्रेस सिर्फ राहुल गांधी की इमेज चमकाने में लगी है'

ममता बनर्जी ने इससे आगे ये भी कहा कि 'कांग्रेस सिर्फ राहुल गांधी की इमेज चमकाने में लगी है, उसे मुद्दों से कोई लेना देना नहीं है, बीजेपी भी राहुल गांधी को आगे बढ़ा रही है कांग्रेस बीजेपी के सामने झुक गई है लेकिन TMC ऐसा नहीं करेगी।' अब ममता बनर्जी को कांग्रेस ये कह रही है कि वो बीजेपी से मिली हुई हैं, लेकिन ममता बनर्जी को एक्सपोज करने के चक्कर में खुद राहुल गांधी एक्सपोज हो रहे हैं क्योंकि हर जगह पर वो ये बात कहते हैं कि नरेंद्र मोदी से कोई सवाल नहीं कर सकता। लेकिन जब राहुल गांधी पर सवाल होते हैं, तो कांग्रेस के नेता दूसरों को बिका हुआ बता देते हैं।

ममता से मुलाकात करते थे सोनिया और राहुल

जिन ममता बनर्जी को आज कांग्रेस मोदी का पार्टनर बता रही है, ये वही ममता बनर्जी है, जिनसे दो तीन साल पहले तक सोनिया गांधी और राहुल गांधी मुलाकात करते थे। कुछ साल पहले तक जब भी ममता बनर्जी राजनैतिक मीटिंग्स और विपक्षी एकता के लिए दिल्ली आती थी तो गांधी परिवार से मिलने जरूर जाती थीं। तब राहुल गांधी और कांग्रेस को ये नहीं लगा कि ममता बनर्जी तो नरेंद्र मोदी की टीम से खेल रही हैं। लेकिन अब जैसे ही ममता बनर्जी और उनकी पार्टी ने राहुल गांधी पर सवाल उठा दिए तो ममता बनर्जी पर अटैक होने लगे। उन्हें डिसक्रेडिट किया जाने लगा। और ये राहुल गांधी काफी दिनों से कर रहे हैं। हाल में नॉर्थ ईस्ट के विधानसभा चुनाव के दौरान राहुल गांधी ने कहा था कि TMC बीजेपी की बी टीम है, बीजेपी की साइलेंट पार्टनर है, उन्होंने जनता से सवाल पूछा कि क्या TMC गोवा में सिर्फ कांग्रेस के वोट काटने के लिए चुनाव लड़ी? क्या ऐसा ही मेघालय में करने की कोशिश है।

कुणाल घोष ने राहुल को नाकाम नेता बताया है

अब फिर से कांग्रेस ममता बनर्जी और टीएमसी को बुरा भला कह रही है क्योंकि संसद में आजकल राहुल गांधी का मामला चल रहा है और ममता बनर्जी राहुल गांधी के मामले में कांग्रेस का साथ देने के लिए तैयार नहीं है। ममता बनर्जी को लगता है कि राहुल गांधी को मुद्दा बनाने से बीजेपी का फायदा है। इसीलिए वो खुद बार- बार और उनकी पार्टी के नेता भी राहुल गांधी पर नाम लेकर अटैक कर रहे हैं। TMC के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष ने तो राहुल गांधी को नाकाम नेता बता दिया, कुणाल घोष ने कहा कि एक नेता के तौर पर राहुल गांधी बुरी तरह फेल हो गए हैं, वो दो बार बीजेपी को रोकने में नाकाम रहे, इसलिए दूसरी पार्टियां राहुल गांधी को नेता क्यों मानेगी, कुणाल घोष ने ये भी कहा कि कांग्रेस बीजेपी को हराने को लेकर गंभीर नहीं है।

ममता बनर्जी इस बात से डर गईं कि कहीं 2024 का चुनाव भी नरेंद्र मोदी Vs राहुल गांधी ना हो जाए और अगर ऐसा होगा तो फिर वही होगा जो 2014 में हुआ था और जो 2019 में हुआ था।

  • 2014 में NDA की सीटें-336
  • 2019 में NDA की सीटें-353
इसलिए अब विपक्ष में दो सोच हो गई है।
  • कांग्रेस की सोच- 2024 में नरेंद्र मोदी VS राहुल गांधी हो
  • दूसरे दलों की सोच- 2024 में नरेंद्र मोदी Vs क्षेत्रीय दल हो
लेकिन बात सिर्फ टीएमसी की नहीं है, बात सिर्फ ममता बनर्जी की नहीं है, दूसरी पार्टियां भी राहुल गांधी पर सवाल उठा रही है और राहुल गांधी की लीडरशिप को मानने को तैयार नहीं। टीएमसी और कांग्रेस के बीच इस टकराव के बीच ही समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव हाल में ममता बनर्जी से मिलने के लिए कोलकाता गए और वहां ये कह दिया कि रीजनल पार्टियां साथ आने की कोशिश कर रही हैं, कांग्रेस अपना देख लें। सुनिए एक बार अखिलेश को।

वैसे TMC और कांग्रेस के टकराव की एक और वजह भी है। और ये वजह है सागरदिघी विधानसभा सीट, इस सीट पर हाल ही में उपचुनाव हुआ और इस सीट को कांग्रेस ने TMC से छीन लिया, ये जीत इसलिए भी हैरान करने वाली हैं क्योंकि 2021 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली थी, इस चुनाव में लेफ्ट पार्टी ने कांग्रेस उम्मीदवार का समर्थन किया था

  • कांग्रेस उम्मीदवार को वोट - 87,667
  • TMC उम्मीदवार को वोट - 64,681
  • जीत का अंतर - 22986

जबकि 2021 के चुनाव में

  • TMC उम्मीदवार को वोट - 95,189
  • कांग्रेस उम्मीदवार को वोट - 36,344
  • वोट का अंतर - करीब 60,000 वोट
ऐसा माना जाता है कि उपचुनाव की सीट ज्यादातर सत्ता में रहने वाली पार्टी के पास जाती है क्योंकि एक सीट पर बदलाव लाकर वोटर को कोई फायदा नहीं दिखता जब तक कि वो कोई राजनीतिक संदेश ना देना चाहता हो, इसलिए 2021 और 2022 में उपचुनाव जीतने वाली TMC के लिए इस चुनाव के नतीजे अलर्ट करने वाले हैं। लेकिन ममता बनर्जी की टीम और राहुल गांधी की टीम जिस तरह से लड़ रही है, उससे नरेंद्र मोदी और अमित शाह हंस रहे होंगे, क्योंकि

नरेद्र मोदी के टेस्ट में विपक्ष हुआ फेल

बहुत अरसे से इस देश में नरेंद्र मोदी के विरोधी नेता इस कोशिश में जुटे हैं कि कैसे विपक्ष को एक किया जाए और नरेंद्र मोदी को हराया जाए। आपने देखा होगा कि कभी ममता बनर्जी से किसी से मिल रही हैं, तो कभी चंद्रशेखर राव किसी से मिल रहे हैं, तो कभी नीतीश कुमार से कोई मिल रहा है, कभी अखिलेश किसी से मिल रहे हैं। ये सब पिछले कुछ अरसे से बहुत हुआ, लेकिन नरेंद्र मोदी ने एक ही झटके में ऐसा टेस्ट ले लिया कि सारी विपक्षी एकता की पोल पट्टी खुल गई। और नरेंद्र मोदी ने जो टेस्ट लिया है, वो टेस्ट राहुल गांधी के नाम पर हुआ। इससे विपक्ष बताने के लिए मजबूर हो गया कि कौन किसके साथ है। क्योंकि अभी तक विपक्ष ने ये कहकर सब रास्ते खोल रखे थे कि 2024 के लिए सब आपस में बैठकर बात कर लेंगे विपक्ष साथ आ सकता है, लेकिन नरेंद्र मोदी ने ऐसा टेस्ट ले लिया जिससे पता चल गया कि विपक्ष का साथ आना नाममुकिन है।

संसद में साथ नहीं है विपक्ष

ये इस बार के संसद सत्र में बिल्कुल साफ दिख गया कि विपक्ष एक साथ आ नहीं सकता। कांग्रेस चाहती थी कि उसकी लीडरशिप में विपक्ष की पार्टियां सरकार का विरोध करें लेकिन टीएमसी से साफ कर दिया कि उनका मुद्दा, उनका एजेंडा और उनका प्रदर्शन अलग होगा। राहुल गांधी के मामले में कोई कांग्रेस का साथ नहीं दे रहा है। उधर सरकार लगातार दबाव बना रही है कि राहुल गांधी संसद में आकर माफी मांगें। उधर इसकी काट में कांग्रेस ने अडानी मामले की जेपीसी जांच का मुद्दा उठाया हुआ है। इस टकराव के चक्कर में संसद के 7 दिन बीत गए हैं लेकिन कोई कामकाज नहीं हो रहा है, आज भी संसद में हंगामा होता रहा, विपक्षी पार्टियों के सांसदों ने संसद की पहली मंजिल पर बैनर लगाकर विरोध प्रदर्शन किया।

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