देश

आपके बेटे ने कितने रन बनाए हैं? इस मंत्री ने अमित शाह से जय शाह के बारे में किया ये तीखा सवाल

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jul 30, 2023, 12:27 PM IST

Undhayanidhi Stalin: डीएमके युवा विंग के नए पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए उदयनिधि ने कहा, मैं चुनाव लड़ने के बाद विधायक बना और इसके बाद मुझे मंत्री बनाया गया। कृपया अमित शाह अपने बेटे जय शाह के बारे में बताएं, जो बीसीसीआई के सचिव हैं, उन्होंने कितने मैच खेले हैं और कितने रन बनाए हैं?

Image

अमित शाह- उदयनिधि स्टालिन

Photo : BCCL

Undhayanidhi Stalin: तमिलनाडु की एमके स्टालिन सरकार पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की वंशवाद वाली टिप्पणी पर डीएमके व भाजपा में ठन गई है। राज्य के खेल मंत्री और एमके स्टालिन के बेटे उदयनिधि स्टालिन ने अमित शाह पर उनके बेटे जय शाह को लेकर तीखा हमला बोला है। उदयनिधि स्टालिन ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के सचिव के रूप में बेटे जय शाह की स्थिति के आधार पर सवाल उठाया है।

उन्होंने वंशवाद के आरोपों के बीच अमित शाह पर हमला बोलेत हुए कहा कि मैं अमित शाह से पूछना चाहता हूं कि आपका बेटा बीसीसीआई का सचिव कैस बन गया? उन्होंने कितने क्रिकेट मैच खेले हैं और कितने रन बनाए हैं?

चुनाव लड़ने के बाद बना विधायक और मंत्री

चेन्नई में डीएमके युवा विंग के नए पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए उदयनिधि ने कहा, अमित शाह का कहना है कि मेरी पार्टी का लक्ष्य मुझे राज्य का मुख्यमंत्री बनाना है। उन्होंने कहा, मैं चुनाव लड़ने के बाद विधायक बना और इसके बाद मुझे मंत्री बनाया गया। कृपया अमित शाह अपने बेटे जय शाह के बारे में बताएं, जो बीसीसीआई के सचिव हैं, उन्होंने कितने मैच खेले हैं और कितने रन बनाए हैं?

शाह ने डीएमके को बताया था वंशवादी पार्टी

बता दें, अमित शाह ने शुक्रवार को वंशवाद की राजनीति पर टिप्पणी की करते हुए डीएमके सरकार को आड़े हाथों लिया था। रामेश्वरम में राज्य भाजपा प्रमुख के अन्नामलाई की पदयात्रा को हरी झंडी दिखाते हुए उन्होंने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और डीएमके सहयोगियों पर वंशवाद की राजनीति को बढ़ावा देने का आरोप लगाया था और डीएमके को वंशवादी पार्टी बताया था।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

और पढ़ें
End of Article