Supreme Court Stray Dog Hearing: 'क्या अस्पताल, कोर्ट में कुत्तों की मौजूदगी सही?' डॉग लवर्स से SC ने पूछे सख्त सवाल
- Edited by: Piyush Kumar
- Updated Jan 9, 2026, 12:46 PM IST
Supreme Court Stray Dog Hearing: सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों से जुड़े मामले पर शुक्रवार को सुनवाई की। इस मामले पर सुनवाई करते हुए ऑल क्रीचर्स बिग एंड स्मॉल (एसीजीएस) नामक संगठन की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क दिया कि यह मामला अब केवल कुत्तों और मनुष्यों के बीच की बहस तक सीमित नहीं है।
आवारा कुत्तों से जुड़े मामले पर सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को चली सुनवाई।(फोटो सोर्स: istock)
Supreme Court Stray Dog Hearing: सुप्रीम कोर्ट ने आवार कुत्तों से जुड़े मामलों पर शुक्रवार सुनवाई की। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजारिया की पीठ इस मामले पर सुनवाई कर रही है।
मामले सीधे तौर पर संवैधानिक सिद्धांतों से जुड़ा: अभिषेक मनु सिंघवी
इस मामले पर सुनवाई करते हुए ऑल क्रीचर्स बिग एंड स्मॉल (एसीजीएस) नामक संगठन की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क दिया कि यह मामला अब केवल कुत्तों और मनुष्यों के बीच की बहस तक सीमित नहीं है। सिंघवी ने कहा कि यह मामला अब सीधे तौर पर संवैधानिक सिद्धांतों से जुड़ा है।
याचिकाकर्ता ने क्या की अपील?
इस मामले में याचिकाकर्ता शर्मिला टैगोर की ओर से पेश हुए वकील ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि भारतीय समाज सभी कुत्तों को सड़कों से हटाकर "एक ही तरीका सबके लिए" लागू नहीं कर सकता। उन्होंने तर्क दिया कि इसका समाधान विज्ञान और मनोविज्ञान से होना चाहिए।
याचिकाकर्ता के सुझाव पर SC ने जताई आपत्ति
सुनवाई के दौरान, कार्यकर्ता के वकील ने सुझाव दिया कि आवारा कुत्तों की पहचान के लिए रंगीन कॉलर का इस्तेमाल किया जा सकता है, जिनमें काटने का इतिहास रखने वाले कुत्ते भी शामिल हैं। उन्होंने जॉर्जिया और आर्मेनिया जैसे देशों में अपनाई जा रही ऐसी ही प्रथाओं का हवाला दिया।
हालांकि, कोर्ट ने इस प्रस्ताव की व्यावहारिकता पर सवाल उठाते हुए उन देशों की जनसंख्या के बारे में पूछा और वकील को समाधान सुझाते समय यथार्थवादी होने की चेतावनी दी।
अस्पतालों में आवारा कुत्तों पर कोर्ट सख्त
आवारा कुत्तों को लेकर सुनवाई के दौरान अदालत ने आक्रामक और गैर-आक्रामक कुत्तों के बीच साफ अंतर बताया। सुनवाई के दौरान “गोल्डी” नाम के एक कुत्ते का उदाहरण दिया गया, जो कथित तौर पर कई वर्षों से एम्स (AIIMS) परिसर में रह रहा है। इस पर कोर्ट ने सवाल उठाया कि क्या ऐसे कुत्तों को अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर तक ले जाया जाएगा? अदालत ने चेतावनी दी कि सड़कों पर रहने वाले किसी भी कुत्ते में टिक्स और संक्रमण होने की आशंका रहती है, जो अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर गंभीर स्वास्थ्य खतरा पैदा कर सकती है।
बेंच ने टिप्पणी करते हुए कहा कि कुत्ता प्रेमियों का पक्ष हकीकत से पूरी तरह कटा हुआ नजर आता है। कोर्ट ने अस्पतालों के भीतर आवारा कुत्तों की मौजूदगी को महिमामंडित करने पर भी कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि इससे जनस्वास्थ्य को गंभीर जोखिम हो सकता है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि मरीजों की सुरक्षा सर्वोपरि है और अस्पताल परिसरों में किसी भी तरह का जोखिम स्वीकार नहीं किया जा सकता।
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