कक्षा 6 से 12 तक की छात्राओं को स्कूलों में मुफ्त में दिया जाए सैनेटरी पैड, सुप्रीम कोर्ट ने दिया निर्देश
- Reported by: गौरव श्रीवास्तवEdited by: शिव शुक्ला
- Updated Jan 30, 2026, 03:35 PM IST
सुप्रीम कोर्ट ने क्लास 6 से 12 तक स्कूल जाने वाली लड़कियों को मुफ्त सैनेटरी पैड देने की पॉलिसी की मांग वाली याचिका पर गाइडलाइन जारी की है। इसके अलावा, अदालत ने स्कूलों के लिए कुछ और निर्देश भी दिए हैं, जिनमें अलग-अलग जेंडर के लिए अलग-अलग टॉयलेट की भी सुविधा मुहैया कराने को कहा गया है।
सुप्रीम कोर्ट
कक्षा 6 से 12 तक स्कूल जाने वाली लड़कियों को मुफ्त सैनेटरी पैड उपलब्ध कराए जाने की नीति बनाने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुना दिया है। इस मामले में सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को आदेश दिया है कि देशभर के सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूलों मे क्लास 6 से क्लास 12 तक कि लडकियों को मुफ्त सैनेटरी पैड मुहैया कराया जाए। इसके लिए जरूरी नीति बनाने को भी कहा गया है। वरिष्ठ न्यायाधीश जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने ये निर्देश दिए।
मध्य प्रदेश की सामाजिक कार्यकर्ता जया ठाकुर की याचिका पर आए निर्देश
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश की सामाजिक कार्यकर्ता जया ठाकुर ने इसे लेकर याचिका दायर की थी। इसमें उन्होंने मांग की थी कि कक्षा 6 से 12 तक के स्कूलों में मुफ्त सेनेटरी पैड दिए जाने चाहिए। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने राज्य सरकारों को यह निर्देश दिए। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से भी कहा कि वो स्कूल में कक्षा 6 से 12 की लड़कियों को मुफ्त सैनिटरी पैड/मेन्स्ट्रूअल प्रोडक्ट उपलब्ध कराने को लेकर राष्ट्रीय नीति बनाये। साथ ही कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा है कि वो मेन्स्ट्रूअल हाइजीन को लेकर अपने फंड से चलाई जा रही पॉलिसी से केंद्र को अवगत कराएं।
टॉयलेट को लेकर भी दिया निर्देश
इसके अलावा, अदालत ने स्कूलों के लिए कुछ और निर्देश भी दिए हैं, जिनमें अलग-अलग जेंडर के लिए अलग-अलग टॉयलेट की भी सुविधा मुहैया कराने को कहा गया है। शीर्ष न्यायालय ने कहा है कि सभी स्कूलों (सरकारी और प्राइवेट )में काम करने वाले अलग-अलग जेंडर के लिए अलग-अलग टॉयलेट की सुविधा होनी चाहिए। सभी स्कूलों को प्राइवेसी सुनिश्चित करनी चाहिए, जिसमें विकलांग व्यक्तियों के अधिकारों का भी ध्यान रखा जाए।
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि सभी स्कूलों को टॉयलेट के अंदर मुफ्त बायोडिग्रेडेबल नैपकिन उपलब्ध कराने होंगे। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि सैनेटरी नैपकिन लड़कियों को मशीनों के जरिए या परिसर के अंदर तय अधिकारियों द्वारा उपलब्ध कराए जाएं। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि सभी स्कूलों में मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन कॉर्नर होने चाहिए और उनमें मासिक धर्म की जरूरतों के लिएजरूरी सभी चीजें होनी चाहिए।
राज्यों को तीन महीने में देनी होगी रिपोर्ट
इन निर्देशों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने तीन महीने में सभी राज्यों से कार्रवाई रिपोर्ट भी मांगी है। इस रिपोर्ट में राज्यों को बताना होगा कि अदालत के फैसले को किस तरह से और कितने समय में लागू किया गया है। इतना ही नहीं अदालत ने यह भी कहा है कि अगर राज्य सरकारें इन निर्देशों के पाल में फेल साबित होती हैं तो उन्हें जवाबदेह ठहराया जाएगा और सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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