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झारखंड के पूर्व CM मधु कोड़ा को सुप्रीम कोर्ट से झटका, नहीं लड़ सकेंगे विधानसभा चुनाव

Supreme Court: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा निचली अदालत द्वारा दी गई तीन साल की सजा की दोषसिद्धि पर रोक लगाने की मांग कर रहे थे। उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मधु कोड़ा आगामी विधानसभा चुनाव नहीं लड़ पाएंगे।

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झारखंड के पूर्व सीएम मधु कोड़ा।

Photo : Twitter

Supreme Court: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा झटका दिया है। अदालत ने कोयला घोटाला मामले में मधु कोड़ा की दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इंकार कर दिया है। वह निचली अदालत द्वारा दी गई तीन साल की सजा की दोषसिद्धि पर रोक लगाने की मांग कर रहे थे। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मधु कोड़ा आगामी विधानसभा चुनाव नहीं लड़ पाएंगे।

बता दें, झारखंड के पूर्व सीएम मधु कोड़ा को दिल्ली हाईकोर्ट ने कोयला घोटाला मामले में दोषी ठहराया था। उन्हें तीन साल की सजा सुनाई गई थी। हाईकोर्ट के इसी फैसले को चुनौती देते हुए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। इस मामले में आज हुई सुनवाई पर अदालत ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से इंकार कर दिया है।

विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं मधु कोड़ा

झारखंड में दो चरणों में विधानसभा चुनाव होने हैं। यहां 13 और 20 नवंबर को वोटिंग होगी। पूर्व सीएम मधु कोड़ा आगामी विधानसभा चुनाव में एक बार फिर से किस्मत आजमाना चाहते हैं। इस बाबत उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। दिल्ली हाई कोर्ट ने मधु कोड़ा की याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि याचिकाकर्ता केवल इस आधार पर फैसले पर रोक लगाना चाहता है कि वह चुनाव लड़ सके, जो उचित नही है।

(इनपुट- गौरव श्रीवास्तव)

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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