देश

Bihar: बिहार जातिगत जनगणना पर SC में सुनवाई टली, अब 14 अगस्त को होगी जिरह

  • Written by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Aug 7, 2023, 02:49 PM IST

Bihar Caste Census : याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी दी गई है कि जातिगत जनगणना कराने का अधिकार राज्य के पास नहीं है। इससे संविधान का उल्लंघन हुआ है। इससे पहले गत एक अगस्त को पटना हाई कोर्ट ने जातिगत जनगणना पर रोक लगाने की मांग वाली सभी अर्जियों को खारिज कर दिया।

Image

बिहार की जातिगत जनगणना को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।

Photo : PTI

Bihar Caste Census : बिहार में जातिगत जनगणना कराए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर अर्जी पर सुनवाई टल गई है। अब इस अर्जी पर 14 अगस्त को सुनवाई होगी। शीर्ष अदालत में अर्जी दायर कर जातिगत जनगणना पर तुरंत रोक लगाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी दी गई है कि जातिगत जनगणना कराने का अधिकार राज्य के पास नहीं है। इससे संविधान का उल्लंघन हुआ है। इससे पहले गत एक अगस्त को पटना हाई कोर्ट ने जातिगत जनगणना पर रोक लगाने की मांग वाली सभी अर्जियों को खारिज कर दिया। बिहार में इस समय जातिगत जनगणना का काम तेजी से हो रहा है।

केंद्र सरकार को जनगणना का अधिकार

एनजीओ की याचिका के अलावा उच्च न्यायालय के इस फैसले के खिलाफ एक अन्य याचिका शीर्ष अदालत में दायर की गई है। नालंदा निवासी अखिलेश कुमार द्वारा दायर याचिका में दलील दी गई है कि इस कवायद के लिए राज्य सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संवैधानिक प्रावधानों के खिलाफ है। याचिका में कहा गया है कि संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, केवल केंद्र सरकार को जनगणना का अधिकार है।

'कोई दुर्भावना नजर आती है'

इसमें कहा गया है, ‘मौजूदा मामले में, बिहार सरकार ने आधिकारिक राजपत्र में एक अधिसूचना प्रकाशित करके केंद्र सरकार के अधिकारों का हनन किया है।’ वकील बरुण कुमार सिन्हा के जरिये दायर याचिका में कहा गया है कि छह जून, 2022 की अधिसूचना राज्य एवं संघ विधायिका के बीच शक्तियों के बंटवारे के संवैधानिक प्रावधानों के खिलाफ है। याचिका में कहा गया है कि बिहार सरकार द्वारा ‘जनगणना’करने की पूरी प्रक्रिया ‘किसी अधिकार और विधायी क्षमता के बिना’की गई है और इसमें कोई दुर्भावना नजर आती है।

हाई कोर्ट ने फैसले को सही ठहराया

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अक्सर इस बात पर जोर देते रहे हैं कि राज्य जाति आधारित जनगणना नहीं कर रहा है, बल्कि केवल लोगों की आर्थिक स्थिति और उनकी जाति से संबंधित जानकारी एकत्र कर रहा है ताकि सरकार उन्हें बेहतर सेवा देने के लिए विशिष्ट कदम उठा सके। पटना उच्च न्यायालय ने अपने 101 पृष्ठों के फैसले में कहा था, ‘हम राज्य सरकार के इस कदम को पूरी तरह से वैध पाते हैं और वह इसे (सर्वेक्षण) कराने में सक्षम है। इसका मकसद (लोगों को) न्याय के साथ विकास प्रदान करना है।'

टाइम्स नाउ नवभारत
टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटलauthor

अक्टूबर 2017 में डिजिटल न्यूज़ की दुनिया में कदम रखने वाला टाइम्स नाउ नवभारत अपनी एक अलग पहचान बना चुका है। अपने न्यूज चैनल टाइम्स नाउ नवभारत की सोच एवं नजरिए के साथ आगे बढ़ते हुए यह न्यूज़ प्लेटफॉर्म आम लोगों से जुड़े मुद्दों का गहराई से विश्लेषण एवं उसे आसान भाषा में पेश करता आया है। राजनीति से लेकर खेल, मनोरंजन, कारोबार और आम लोगों के जीवन पर असर डालने वालीं खबरों का मायने समझाते हुए यह डिजिटल प्लेटफॉर्म लोगों के भरोसे पर खरा उतरा है। \n\nसाथ ही यह अपने न्यूज़ चैनल पर दिखाए जाने वाली खबरों, शोज, स्पशेल कार्यक्रमों एवं रिपोर्टों को पेश करता है। चैनल के ये कार्यक्रम एवं शोज देश-दुनिया के घटनाक्रमों पर एक नया एवं विश्वसनीय नजरिया देते हैं। अपनी खबरों एवं विश्लेषण के चलते पसंदीदा न्यूज़ प्लेटफॉर्म बन चुका टाइम्स नाउ नवभारत, डिजिटल लोगों के भरोसे को लगातार मजबूत कर रहा है।

और पढ़ें
End of Article