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NCP में बड़ी राजनीतिक हलचल: शरद पवार गुट अजीत पवार से सुलह की राह पर, महाविकास आघाड़ी पर मंडराए संकट के बादल

महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर करवट लेने को तैयार है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में अंदरखाने बड़ी हलचलें चल रही हैं और अब शरद पवार गुट के भीतर ही अजीत पवार से सुलह के सुर सुनाई देने लगे हैं।

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शरद पवार गुट अजीत पवार से सुलह की राह पर

नई दिल्ली: महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर करवट लेने को तैयार है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में अंदरखाने बड़ी हलचलें चल रही हैं और अब शरद पवार गुट के भीतर ही अजीत पवार से सुलह के सुर सुनाई देने लगे हैं। इस नई राजनीतिक उथल-पुथल के संकेतों ने महाविकास आघाड़ी गठबंधन जिसमें शिवसेना (उद्धव गुट), कांग्रेस और एनसीपी (शरद पवार गुट) शामिल हैं, की स्थिरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

एनसीपी में विभाजन के बाद से महाराष्ट्र की राजनीति दो खेमों में बंटी हुई है। एक ओर हैं एनसीपी प्रमुख शरद पवार, तो दूसरी ओर उनके भतीजे और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार। भले ही दोनों ने सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे पर सीधी बयानबाज़ी से परहेज़ किया हो, लेकिन राजनीतिक दूरी साफ़ नज़र आती रही है। हालांकि अब संकेत मिल रहे हैं कि यह दूरी कम हो सकती है। सूत्रों के अनुसार, हाल ही में शरद पवार गुट की एक अहम आंतरिक बैठक में पार्टी के कई नेताओं ने स्पष्ट रूप से यह सुझाव दिया कि अब समय आ गया है कि दोनों गुटों को फिर से एकजुट होना चाहिए।

राजनीतिक गलियारों में संकेतात्मक सहमति

सूत्रों के मुताबिक, बैठक में शरद पवार ने जो कहा, उसे राजनीतिक गलियारों में “संकेतात्मक सहमति” के तौर पर देखा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार पवार ने कहा मेरी उम्र अब ऐसे फैसले लेने की नहीं है। दोनों गुटों की राजनीतिक विचारधारा और सांगठनिक संस्कृति में कोई बड़ा फर्क नहीं है। अगर पार्टी के लोग चाहें कि दोनों गुट फिर एक हो जाएं, तो मुझे इसमें कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन यह निर्णय युवा नेतृत्व को लेना चाहिए। अजीत और सुप्रिया को मिलकर इस पर चर्चा करनी चाहिए और आगे की रणनीति बनानी चाहिए।

शरद पवार की दूरदर्शिता

यह बयान न केवल शरद पवार की दूरदर्शिता को दर्शाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि वह अब धीरे-धीरे नेतृत्व की बागडोर अगली पीढ़ी के हाथों में सौंपना चाहते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम केवल पारिवारिक सुलह भर नहीं है, बल्कि एक रणनीतिक पुनर्गठन का हिस्सा भी हो सकता है। महाराष्ट्र में भाजपा-शिंदे गुट की मज़बूत पकड़ और महाविकास आघाड़ी में लगातार चल रही खींचतान ने एनसीपी के नेताओं को यह सोचने पर मजबूर किया है कि यदि पार्टी को प्रासंगिक और ताकतवर बनाए रखना है, तो विभाजित होकर नहीं, बल्कि एकजुट होकर ही आगे बढ़ना होगा।

सबसे बड़ा झटका महाविकास आघाड़ी को लगेगा

अगर एनसीपी के दोनों गुट फिर से एक होते हैं, तो सबसे बड़ा झटका महाविकास आघाड़ी को लगेगा। विशेषकर शिवसेना (उद्धव गुट) और कांग्रेस को। अब सबकी निगाहें सुप्रिया सुले और अजीत पवार पर हैं। दोनों युवा नेता न केवल शरद पवार की राजनीतिक विरासत के वाहक हैं, बल्कि पार्टी के भविष्य की दिशा भी तय करेंगे। यदि दोनों के बीच आपसी सहमति बन जाती है, तो एनसीपी में एक नई शुरुआत की संभावना प्रबल हो जाएगी।

महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव हो सकता है

शरद पवार का यह रुख़, अजीत पवार से संभावित सुलह, और पार्टी में भीतरखाने चल रही चर्चाएं यह साफ़ संकेत देती हैं कि आने वाले हफ्तों में महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव हो सकता है। जहां एक ओर यह पुनर्गठन एनसीपी को मज़बूती देगा, वहीं दूसरी ओर यह महाविकास आघाड़ी के भविष्य पर सवालिया निशान खड़ा कर सकता है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि चाचा-भतीजे की यह संभावित सुलह महाराष्ट्र की सियासत को किस दिशा में मोड़ती है।

Rakesh Kamal Trivedi
राकेश त्रिवेदीauthor

20 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ टीवी पत्रकारिता में सक्रिय, वर्तमान में TIMES NOW नवभारत में न्यूज़ एडिटर। क्राइम और इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज़्म में मजबूत पकड़ के साथ महाराष्ट्र की राजनीति और हाई-इम्पैक्ट राष्ट्रीय खबरों पर गहरी नज़र। डेटा-ड्रिवन रिसर्च, निर्भीक सवाल, ऑन-ग्राउंड एक्सपीरियंस और बेबाक विश्लेषण का संतुलित मिश्रण उनकी शैली की खासियत है।

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