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शरद पवार ने NCP अध्यक्ष पद से क्यों दिया था इस्तीफा? बेटी सुप्रिया सुले ने किया बड़ा खुलासा

  • Written by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Oct 12, 2023, 07:44 PM IST

Reason Of Sharad Pawar Resignation: जब शरद पवार एनसीपी अध्यक्ष पद से इस्तीफा नहीं देना चाहते थे तो उन्होंने आखिर ये फैसला क्यों लिया? इस बात का खुलासा उनकी बेटी और सांसद सुप्रिया सुले ने किया है। उन्होंने बताया है कि पवार के इस्तीफे की वजह भाजपा के साथ जाने की कुछ नेताओं की जिद थी।

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पवार राकांपा अध्यक्ष पद से देना नहीं चाहते थे इस्तीफा, सुप्रिया सुले का दावा।

Maharashtra Politics News: शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने ये दावा किया है कि शरद पवार एनसीपी अध्यक्ष पद से इस्तीफा नहीं देना चाहते थे। ऐसे में अब सवाल उठता है कि आखिर वो ऐसा नहीं करना चाहते थे, तो फिर ये बड़ा फैसला लेने के लिए क्यों मजबूर हो गए। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) की कार्यकारी अध्यक्ष और सांसद सुप्रिया सुले ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ जाने की कुछ पार्टी नेताओं की जिद के चलते मई में शरद पवार ने राकांपा अध्यक्ष पद छोड़ देने की चौंकाने वाली घोषणा की थी। उन्होंने कहा कि ‘पवार साहेब’ कभी अपना इस्तीफा नहीं देना चाहते थे। वह राकांपा के अजित पवार गुट से जुड़े नेता एवं महाराष्ट्र के मंत्री छगन भुजबल के इस दावे के बारे में पूछे गये सवाल का जबाव दे रही थीं कि पार्टी में यह तय किया गया था कि शरद पवार इस्तीफा देंगे।

भाजपा के साथ जाने के लिए तैयार नहीं थे शरद पवार

छगन भुजबल ने एक मराठी चैनल को दिये इंटरव्यू में कहा, 'शरद पवार भाजपा के साथ जाने के लिए तैयार नहीं थे। यह फैसला किया गया कि वह इस्तीफा देंगे और सुले को पार्टी अध्यक्ष बनाया जाए ताकि राकांपा भाजपा के साथ हाथ मिला सके और सरकार का हिस्सा बन सके।' यह इंटरव्यू बुधवार को प्रसारित किया गया। सभी को चौंकाते हुए शरद पवार ने दो मई को कहा था कि वह राकांपा के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे रहे हैं। उन्होंने स्तब्ध पार्टी कार्यकर्ताओं के विरोध एवं सामूहिक इस्तीफे के बाद यह निर्णय वापस लिया था। उन्होंने ही 1999 में राकांपा बनायी थी और तब से पार्टी की बागडोर उन्हीं के हाथों में है।

पवार राकांपा अध्यक्ष पद से देना नहीं चाहते थे इस्तीफा

सुले ने कहा कि उनके पिता कभी राकांपा अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना नहीं चाहते थे। उन्होंने कहा, 'लेकिन जब पार्टी में सभी ने भाजपा के साथ हाथ मिलाने पर जोर डाला तब पवार साहेब आहत हुए। उन्होंने अपना इस्तीफा दे दिया। आपने (मीडिया ने) सोचा कि यह ड्रामा है लेकिन यह हमारे लिए हकीकत थी। बाद में राज्य से पार्टी कार्यकर्ताओं ने पवार साहेब से अध्यक्ष पद पर बने रहने की अपील की।' बारामती की सांसद सुले ने कहा कि शरद पवार ने एक समिति गठित करने का सुझाव दिया जो यह तय करती कि अगला राकांपा अध्यक्ष कौन होगा लेकिन यह भुजबल ही थे जिन्होंने इस विचार को खारिज कर दिया और पार्टी संस्थापक से पद पर बने रहने की अपील की।

अजित पवार गुट के नेताओं को सुप्रिया सुले का जवाब

उन्होंने कहा, 'यदि उन्होंने खुद ही अगले (राकांपा) अध्यक्ष पर विचार करने के लिए एक समिति गठित करने का निर्देश दिया तो क्या आप उन्हें ‘तानाशाह’ कहेंगे? (यदि वह तानाशाह होते तो) उन्होंने आदेश दिया होता कि अमुक व्यक्ति को पार्टी अध्यक्ष बनाया जाए।' सुले छह अक्टूबर को निर्वाचन आयोग के समक्ष अजित पवार धड़े द्वारा दिये गये इस बयान का जिक्र कर रही थीं कि शरद पवार ने अलोकतांत्रिक तरीके से राकांपा को चलाया और उसे अपने जागीर समझा।

सुले ने कहा कि भुजबल ने अपने इंटरव्यू के दौरान चार बार शरद पवार के इस बयान को दोहराया कि 'जो लोग भाजपा के साथ जाना चाहते हैं, वे जा सकते हैं, लेकिन वह नहीं जायेंगे।'

'पिता की राय के खिलाफ समझौता कर पाना असंभव'

उन्होंने कहा कि शरद पवार को दो जुलाई को अजित पवार एवं आठ अन्य राकांपा नेताओं के शपथ ग्रहण के बारे में पहले से पता नहीं था। उन्होंने दावा किया, '(एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली भाजपा शिवसेना गठबंधन सरकार में शामिल होने का) फैसला उन्हें (शरद पवार को) अंधेरे में रखकर किया गया।' जब सुले से पूछा गया कि क्या उन्हें पार्टी अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव था, तो उनका जवाब ‘हां’ में था। उन्होंने कहा, 'लेकिन इस प्रस्ताव ने मुझे परेशान कर दिया क्योंकि यदि मैं अध्यक्ष बन जाती तो पार्टी को पहला निर्णय भाजपा के साथ जाने का लेना था। लेकिन उसे अमल में लाना मेरे लिए असंभव होता।' उन्होंने कहा कि अपनी विचारधारा और पिता की राय के विरुद्ध समझौता कर पाना उनके लिए संभव नहीं है।

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