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सत्येंद्र जैन ने जेल में रहते हुए 9 महीने तक ली मंत्री की सैलरी, आरटीआई में खुले कई राज

Disclosure In RTI On Satyendar Jain: दिल्ली के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। सत्येंद्र जैन जेल में रहते हुए भी 9 महीने तक हर महीने मंत्री की तनख्वाह ली। ये खुलासा एक आरटीआई के जरिए हुआ है। आपको बताते हैं कि इस आरटीआई के जरिए कौन-कौन से राज खुले हैं।

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सत्येंद्र जैन ने जेल में रहते हुए हर महीने सैलरी और भत्ता लिया।

Satyendra Jain News: केजरीवाल सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे सत्येंद्र जैन को लेकर आरटीआई में बड़ा खुलासा हुआ है। एक आरटीआई के जरिए ये पता चला है कि सत्येंद्र जैन जेल में रहते हुए भी 9 महीने तक हर महीने मंत्री की तनख्वाह ली। चंडीगढ़ के एक आरटीआई एक्टिविस्ट एडवोकेट एच सी अरोड़ा (H C Arora) ने आरटीआई के माध्यम से जानकारी हासिल की है।

सत्येंद्र जैन ने हर महीने लिया भत्ता

केजरीवाल के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन ने मेहमान नवाजी के लिए भी हर महीने भत्ता लिया। यहां तक कि उन्होंने दौरे के लिए भी हर महीने भत्ता लिया। दरअसल, अधिवक्ता एच.सी. अरोड़ा ने उपराज्यपाल, नई दिल्ली के कार्यालय में राज्य लोक सूचना अधिकारी से निम्नलिखित आशय की जानकारी मांगी थी। जिनमें दो मुख्य सवाल शामिल थे।

(1) मंत्री सत्येंद्र जैन को 31.05.2022 को गिरफ्तार किया गया था। वह अभी भी विचाराधीन कैदी के रूप में जेल में हैं। उन्होंने 08.03.2023 को इस्तीफा दिया था। वह अभी भी जेल में हैं। कृपया बताएं कि उन्होंने 31.05.2022 से 08.03.2023 तक वेतन के रूप में कितनी राशि ली है। क्या वह अभी भी सरकारी/आधिकारिक आवास का लाभ ले रहे हैं?

(2) मंत्री मनीष सिसोदिया को 26.02.2023 को गिरफ्तार किया गया। वह अभी भी विचाराधीन कैदी के रूप में जेल में हैं। उन्होंने 08.03.2023 को इस्तीफा दिया। वे तो अब भी जेल में हैं। कृपया बताएं कि उन्होंने 26.02.2023 से 08.03.2023 तक वेतन के रूप में कितनी राशि प्राप्त की है। क्या वह अभी भी सरकारी/आधिकारिक आवास पर रह रहा है?

आरटीआई के जवाब में खुले सत्येंद्र जैन के राज

इसी सवाल के जवाब में ये जानकारी सामने आई कि सत्येंद्र जैन जेल में रहने की अवधि के दौरान वेतन और भत्ते प्राप्त कर रहे हैं। यहां तक कि सत्कार भत्ता (आगंतुकों के मनोरंजन में किए गए खर्चों को पूरा करने के लिए) भी उन्होंने लिया है। कुछ महीनों के लिए, उन्होंने सचिवीय सहायता की राशि भी निकाली है। उन्होंने निर्वाचन क्षेत्र भत्ता भी लिया है, जो निर्वाचन क्षेत्र में दौरे के लिए होता है।
Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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