रुबैया सईद के अपहरण में शफात अहमद शांगलू रिहा (फोटो- PTI)
Rubaiya Sayeed Kidnapping Case: रुबैया सईद अपहरण केस में जिस शफात अहमद शांगलू को सीबीआई ने एक दिन पहले गिरफ्तार किया था, उसे आज कोर्ट ने रिहा करने का आदेश दिया है। शांगलू को सोमवार को गिरफ्तार किया गया था। वर्ष 1989 में तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबैया सईद का अपहरण करने के मामले में प्रशासन ने शांगलू पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। उस पर प्रतिबंधित जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के सदस्यों द्वारा रची गई साजिश का कथित तौर पर हिस्सा होने का आरोप था। शांगलू को जेकेएलएफ प्रमुख यासीन मलिक का करीबी बताया जाता है।
आठ दिसंबर 1989 को श्रीनगर के एल. डी. अस्पताल के पास से रुबैया सईद का अपहरण कर लिया गया था। केंद्र की तत्कालीन भाजपा समर्थित वी.पी. सिंह सरकार द्वारा पांच आतंकवादियों को रिहा किये जाने पर अपहरण के पांच दिन बाद रुबैया को रिहा कर दिया गया था। रुबैया सईद अब तमिलनाडु में रहती हैं। वह सीबीआई की अभियोजन पक्ष की गवाह हैं।
केंद्रीय जांच एजेंसी ने 1990 के दशक की शुरुआत में इस मामले को अपने हाथ में लिया था। मुकदमे में तेजी से सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए सीबीआई ने तीन दशक से भी अधिक समय पहले श्रीनगर में सईद के अपहरण और भारतीय वायुसेना के चार कर्मियों के अपहरण और हत्या से संबंधित बहुचर्चित मामलों में मलिक के खिलाफ आरोप तय करने के बाद अपनी वरिष्ठ वकील मोनिका कोहली को मुख्य अभियोजक नियुक्त किया था।
यासीन मलिक को पिछले साल मई में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए)के मामलों की एक विशेष अदालत ने सजा सुनाई थी। उसे एनआईए द्वारा दर्ज 2017 के आतंकी वित्तपोषण मामले में 2019 की शुरुआत में गिरफ्तार किया गया था। आतंकवादी और विघटनकारी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (टाडा) मामलों की विशेष अदालत पहले ही रुबैया अपहरण मामले में मलिक और अन्य के खिलाफ आरोप तय कर चुकी है।
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