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Rubaiya Sayeed Kidnapping Case: किडनैपिंग केस में 36 साल बाद गिरफ्त में आया आरोपी, सर पर था 10 लाख का इनाम

Rubaiya Sayeed Kidnapping Case: सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने 36 साल पुराने रुबैया सईद किडनैपिंग केस के सिलसिले में एक शख्स को गिरफ्तार किया है. बता दें कि ये मामला जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और उस समय के केंद्रीय गृह मंत्री रहे मुफ़्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबैया सईद से जुड़ा है।

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सीबीआई ने 1989 में तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबैया सईद के अपहरण मामले पर बड़ी कार्रवाई की।(फोटो सोर्स: PTI)

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Rubaiya Sayeed Kidnapping Case: सीबीआई ने 1989 में तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबैया सईद के सनसनीखेज अपहरण के सिलसिले में 10 लाख रुपये के इनामी एक “भगोड़े” को सोमवार को गिरफ्तार किया। उसे प्रतिबंधित जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) आतंकवादी समूह के सदस्यों द्वारा रची गई साजिश का कथित तौर पर हिस्सा होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।

यासीन मलिक का करीबी था शांगलू

शफात अहमद शांगलू नामक व्यक्ति कथित तौर पर जेकेएलएफ प्रमुख यासीन मलिक का करीबी विश्वासपात्र है।

भगोड़े पर 10 है लाख रुपये का इनाम

सीबीआई के प्रवक्ता ने कहा, “उक्त आरोपित शांगलू ने 1989 में रणबीर दंड संहिता और टाडा अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध को अंजाम देने में यासीन मलिक और अन्य के साथ मिलकर साज़िश रची थी।” उन्होंने कहा, “भगोड़े पर 10 लाख रुपये का इनाम है। उसे कानून के अनुसार निर्धारित समय के भीतर टाडा अदालत जम्मू में पेश किया जाएगा।”

अधिकारियों के अनुसार, शांगलू कथित तौर पर प्रतिबंधित आतंकवादी समूह का पदाधिकारी था और संगठन के वित्त का प्रबंधन करता था।

अधिकारियों ने बताया कि सीबीआई ने जम्मू-कश्मीर पुलिस के साथ मिलकर कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए श्रीनगर के निशात इलाके में स्थित शांगलू के आवास से उसे गिरफ्तार किया।

अदालत में यासीन मलिक क्यों नहीं हो सकता पेश?

वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से अदालती सुनवाई में भाग ले रहे मलिक की पहचान रुबैया सईद सहित प्रत्यक्षदर्शियों ने की है। आतंकवाद के वित्तपोषण के मामले में दिल्ली की तिहाड़ जेल में सजा काट रहे जेकेएलएफ प्रमुख को गृह मंत्रालय के आदेश के कारण अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश नहीं किया जा रहा है, क्योंकि उसके आवागमन पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। अदालती सुनवाई के दौरान सईद ने मलिक के अलावा चार अन्य आरोपियों की पहचान की थी जो इस जघन्य अपराध में शामिल थे।

आठ दिसंबर 1989 को श्रीनगर के एल. डी. अस्पताल के पास से रुबैया सईद का अपहरण कर लिया गया था। केंद्र की तत्कालीन भाजपा समर्थित वी.पी. सिंह सरकार द्वारा पांच आतंकवादियों को रिहा किये जाने पर अपहरण के पांच दिन बाद रुबैया को रिहा कर दिया गया था।

सईद अब तमिलनाडु में रहती हैं। वह सीबीआई की अभियोजन पक्ष की गवाह हैं। केंद्रीय जांच एजेंसी ने 1990 के दशक की शुरुआत में इस मामले को अपने हाथ में लिया था।

अपहरण मामले में मुख्य आरोपी यासीन मलिक (56) मई 2023 में एक विशेष एनआईए अदालत द्वारा आतंकी-वित्तपोषण मामले में सजा सुनाए जाने के बाद तिहाड़ जेल में बंद है।

Piyush Kumar
पीयूष कुमारauthor

पीयूष कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर Senior Copy Editor के रूप में कार्यरत हैं। देश-दुनिया की हलचल पर उनकी पैनी नजर रहती है और इन घटनाओं को सटीक, सरल और असरदार अंदाज में खबरों की भाषा देना उनकी सबसे बड़ी ताकत है। ब्रेकिंग न्यूज की रफ्तार हो या किसी जटिल मुद्दे को आसान बनाकर समझाने वाले एक्सप्लेनर—पीयूष दोनों में बराबर दक्षता रखते हैं। न्यूज जजमेंट, फैक्ट-बेस्ड राइटिंग और एंड-टू-एंड कॉपी प्रोडक्शन पर इनकी पकड़ मजबूत है और अबतक 4,000 से अधिक स्टोरी लिख चुके हैं।

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