India China Face off: भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने गुरुवार को कहा कि अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन सीमा पर कई स्थानों पर चीनी सैनिकों के साथ आमना-सामना जारी है। उन्होंने बताया कि बल ने एक नई लड़ाकू टीम 'शौर्य कमांडो' तैयार की है, जिसने अरुणाचल के कई स्थानों पर पीएलए (चीनी सेना) के साथ चल रहे गतिरोध के दौरान अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया। यह हमारे लिए एक अवसर भी है। 31 अक्टूबर को सेवानिवृत्त होने जा रहे कपूर बल के 65वें स्थापना दिवस (24 अक्टूबर) से पहले आयोजित अलंकरण समारोह में जवानों को संबोधित कर रहे थे।
गलवान जैसी स्थितियों के लिए तैयारी
अपने संबोधन में महानिदेशक ने बताया कि ITBP ने अपनी सभी सीमावर्ती इकाइयों में ड्रोन प्लाटून गठित कर दी हैं। गलवान जैसे टकराव से निपटने के लिए एक नया 'स्ट्राइक' पाठ्यक्रम भी तैयार किया गया है। इसके अलावा, नए दौर के युद्ध की जरूरतों को देखते हुए मोर्चे पर भूमिगत बुनियादी ढांचा 'बड़े पैमाने पर' विकसित किया जा रहा है। उनके अनुसार, पूरे बल को 2027 के अंत तक इस प्रशिक्षण से गुजारा जाएगा।
'सबसे कठिन सीमा, सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी'
कपूर ने चीन से लगी सीमा को भारत की 'सबसे कठिन' सीमा बताया। उन्होंने चीन को एक 'शक्तिशाली' पड़ोसी और भारत का 'सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी' करार देते हुए कहा कि उसका मुकाबला करने के लिए क्षमताओं को और बढ़ाना आवश्यक है। उन्होंने जवानों को बताया कि 'स्ट्राइक' पाठ्यक्रम से बल की क्षमताएं और मजबूत होंगी।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सरकार पर उठाए सवाल
आईटीबीपी चीफ के बयान वाले वीडियो को X पर साझा कर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सरकार से सवाल पूछे हैं। अपने पोस्ट में रमेश ने कहा कि 'जहां एक ओर स्वयंभू ‘विश्वगुरु’ चीन के सामने सोच-समझकर रियायतें देने में लगे हैं, वहीं दूसरी ओर आईटीबीपी के महानिदेशक ने अरुणाचल प्रदेश में पीएलए के साथ हालिया आमने-सामने की झड़पों के दौरान आईटीबीपी के प्रदर्शन की सराहना की है, और ऐसा करना उचित भी है। लेकिन इस पूरे मामले पर प्रधानमंत्री और उनके प्रतिष्ठान की ओर से पूरी तरह चुप्पी साधी गई है।'
ITBP की भूमिका
1962 में गठित भारत-तिब्बत सीमा पुलिस चीन से लगी 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) की निगरानी करती है। ऊंचाई वाले दुर्गम इलाकों में तैनात यह बल सीमा की पहली पंक्ति में रहता है और किसी भी घटनाक्रम पर सबसे पहले प्रतिक्रिया देता है।
क्यों अहम है यह बयान
महानिदेशक का यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है कि इसमें अरुणाचल सीमा पर तनाव को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया गया है और साथ ही चीन को सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी बताया गया है। ड्रोन प्लाटून, भूमिगत ढांचे और विशेष प्रशिक्षण पर जोर यह संकेत देता है कि भारत सीमा पर लंबे समय तक चलने वाली चुनौती के लिए तैयारी कर रहा है। हालांकि, चीन की ओर से इस बयान पर फिलहाल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
