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बिहार चुनाव से पहले गूंजा आरक्षण का मुद्दा, संसद में राजद ने इस मांग को लेकर खोर्चा मोर्चा

Bihar Politics on Reservation: बिहार में 65 प्रतिशत आरक्षण को नौवीं अनुसूची में डालने की मांग को लेकर राजद ने संसद में विरोध प्रदर्शन किया है। राजद सदस्यों ने हरे रंग की टी-शर्ट पहन रखी थी जिस पर 65 प्रतिशत आरक्षण को नौवीं अनुसूची में डालने की मांग लिखी हुई थी। आपको बताते हैं कि सारा माजरा क्या है।

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संसद में राजद ने किया प्रदर्शन।

Bihar Politics: बिहार में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं, जिसे लेकर सियासी उठापटक का सिलसिला तेज हो चुका है। तमाम पार्टियों के नेता अपने विरोधियों के खिलाफ मोर्चा खोलने की भरपूर कोशिश कर रहे हैं। इसी कड़ी में चुनाव से पहले अब बिहार में आरक्षण का मुद्दा गरमा गया है। बिहार की सड़कों से लेकर देश की संसद तक विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं।

संसद भवन परिसर में राजद सांसदों ने किया प्रदर्शन

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसदों ने बिहार में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़े वर्ग और अति पिछड़े वर्गों के लिए तय 65 प्रतिशत आरक्षण को संविधान की नौवीं अनुसूची में डालने की मांग को लेकर शुक्रवार को संसद भवन परिसर में प्रदर्शन किया। राजद सांसदों के साथ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) लिबरेशन के लोकसभा सदस्य भी इस प्रदर्शन में शामिल हुए।

65 प्रतिशत आरक्षण को नौवीं अनुसूची में डालने की मांग

राजद सदस्यों ने हरे रंग की टी-शर्ट पहन रखी थी जिस पर 65 प्रतिशत आरक्षण को नौवीं अनुसूची में डालने की मांग लिखी हुई थी। पार्टी के राज्यसभा सदस्य संजय यादव ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस आरक्षण को रुकवा रखा है। उन्होंने कहा, 'यदि भाजपा आरक्षण की समर्थक है तो बिहार कैबिनेट द्वारा पारित 65 प्रतिशत आरक्षण को नौवीं अनुसूची में डाले।'

संजय यादव ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के एक वीडियो का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि जदयू नेता ने राष्ट्रगान का अपमान किया है। उन्होंने कहा, 'दो ही चीजें हो सकती हैं, या तो उनकी मानसिक स्थिति ऐसी है कि उन्हें राष्ट्रगान का खयाल नहीं रहा या फिर उन्हें पता ही नहीं है कि राष्ट्रगान के समय क्या करते हैं।'

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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