देश

ममता की जगह अरूप राय को बनाया टीएमसी अध्यक्ष, बागी गुट की बैठक में क्या-क्या हुआ? क्या अभिषेक बनर्जी को किया सस्पेंड?

रितब्रता बनर्जी ने कहा, हमने नेशनल वर्किंग कमिटी का गठन किया है। आज सब की सहमति से अरूप रॉय चेयरपर्सन चुने गए। 20 सदस्योंं को नेशनल वर्किंग कमेटी में रखा गया हैं।

Image

रितब्रता बनर्जी

Photo : PTI

TMC Meeting: तृणमूल कांग्रेस पर नियंत्रण की कोशिश में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट ने सोमवार को विधायक अरूप रॉय को अध्यक्ष चुना। यह पार्टी संस्थापक ममता बनर्जी के प्राधिकार को अब तक की सबसे बड़ी चुनौती है। इस कदम से संकेत मिलता है कि विधानसभा से शुरू हुई और बाद में संसद तक फैली बगावत अब पार्टी के संगठनात्मक गढ़ तक पहुंच गई है। यहां बागी विधायकों, पार्षदों और अन्य नेताओं की मौजूदगी में एक विशेष सत्र को संबोधित करते हुए बनर्जी ने कहा कि रॉय को सर्वसम्मति से पार्टी का अध्यक्ष चुना गया। पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास और विधायक फिरहाद हकीम, रथिन घोष और सबीना यास्मीन को उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया, जबकि ऋतब्रत बनर्जी, जावेद खान और संदीपन साहा को महासचिव बनाया गया।

अरूप रॉय को पार्टी का अध्यक्ष चुना गया

रघुनाथगंज के विधायक अखरुज्जमां अंसारी को कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया। बैठक के बाद बनर्जी ने पत्रकारों से कहा, तृणमूल कांग्रेस नेताओं और सदस्यों के विशेष सत्र में सर्वसम्मति से अरूप रॉय को पार्टी का अध्यक्ष चुना गया। बागी गुट के नेता ने इस प्रक्रिया की वैधता को मजबूत करने की कोशिश करते हुए कहा कि पूरी कार्यवाही पार्टी के संविधान के अनुसार की गई है और विशेष सत्र का विवरण निर्वाचन आयोग को भेजा जाएगा। उन्होंने कहा, यह असली या नकली होने का सवाल नहीं है। हम ही तृणमूल कांग्रेस हैं और आज के विशेष सत्र की कार्यवाही की जानकारी निर्वाचन आयोग को देंगे।

बनर्जी ने कहा, हमने पार्टी के नियमों के अनुसार काम किया है और यह विशेष सत्र आहूत किया है। क्या सही है और क्या गलत, इसका फैसला निर्वाचन आयोग करेगा। उन्होंने बताया कि नवगठित नेतृत्व जल्द ही विभिन्न स्तरों पर पार्टी के संगठनात्मक ढांचे का गठन शुरू करेगा। उन्होंने कहा, हम जल्द ही जिला समितियों, प्रदेश इकाई और प्रवक्ताओं के एक पैनल का गठन करेंगे। हालांकि, बनर्जी ने ममता बनर्जी के प्रति नरम रुख अपनाते हुए कहा कि यदि वह चाहें तो बागी गुट की मुख्य सलाहकार बन सकती हैं। उन्होंने कहा, अगर ममता बनर्जी मुख्य सलाहकार बनना चाहें, तो उनका स्वागत है।

यह विशेष सत्र पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद पार्टी में उत्पन्न अभूतपूर्व संकट के बीच आयोजित किया गया। कुछ ही दिन पहले पार्टी के 80 में से 58 विधायकों ने विपक्ष के नेता पद के लिए ऋतब्रत बनर्जी के दावे का समर्थन किया था और पार्टी नेतृत्व की पसंद को खारिज कर दिया था। बागी गुट का दावा है कि इसके बाद उनकी संख्या और बढ़ गई है। हाल ही में पार्टी को संसद में एक और झटका तब लगा जब उसके 28 में से 20 लोकसभा सदस्य कथित तौर पर तृणमूल संसदीय दल से अलग हो गए और उन्होंने नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में विलय कर लिया, साथ ही भाजपा-नेतृत्व वाले राजग को समर्थन देने की घोषणा की।

अभिषेक बनर्जी पर सवाल

अभिषेक बनर्जी को निलंबित किया गया है या नहीं, यह पूछे जाने पर ऋतब्रता बनर्जी ने कहा कि हमने बैठक में अभिषेक बनर्जी के बारे में कोई चर्चा नहीं की।साथ ही कहा कि अगर ममता बनर्जी (बागी तृणमूल गुट की) मुख्य सलाहकार बनना चाहती हैं, तो उनका स्वागत है।

ममता को कानूनी मोर्चे पर एक बड़ा झटका

इससे पहले पश्चिम बंगाल की सियासत में जारी घमासान के बीच सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) को कानूनी मोर्चे पर एक बड़ा झटका लगा। कलकत्ता हाई कोर्ट ने राज्य विधानसभा के स्पीकर रथिंद्रनाथ बोस के उस फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है, जिसमें उन्होंने टीएमसी के बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी (Ritabrata Banerjee) को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष (LoP) के रूप में मान्यता दी थी। यह फैसला टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी की पसंद के उम्मीदवार और वरिष्ठ नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय (Sobhandeb Chattopadhyay) के लिए एक करारा झटका माना जा रहा है, जिन्हें पार्टी आधिकारिक तौर पर इस पद पर देखना चाहती थी।

जस्टिस कृष्ण राव ने सुनाया फैसला

कलकत्ता हाई कोर्ट के जस्टिस कृष्ण राव की सिंगल बेंच ने इस मामले की सुनवाई करते हुए टीएमसी की याचिका पर तुरंत कोई भी अंतरिम रोक लगाने से मना कर दिया। टीएमसी की ओर से वरिष्ठ वकील और लोकसभा सांसद कल्याण बनर्जी ने दलील दी थी कि किसी भी राजनीतिक दल में नेता प्रतिपक्ष चुनने का अधिकार 'पॉलिटिकल पार्टी' (ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली मूल टीएमसी) को होता है, न कि 'लेजिस्लेटिव पार्टी' (विधायकों के गुट) को। उन्होंने आरोप लगाया कि स्पीकर का यह फैसला संविधान के मूल ढांचे पर प्रहार करता है। हालांकि, कोर्ट ने फिलहाल स्पीकर के आदेश को पलटने या उस पर स्टे लगाने से इनकार करते हुए अगली प्रक्रियाओं की तरफ रुख किया है।

58 विधायकों का समर्थन और स्पीकर की मुहर

बता दें कि पार्टी से निकाले जाने के बावजूद, ऋतब्रत बनर्जी ने पासा पलट दिया। उन्होंने टीएमसी के 80 में से 58 बागी विधायकों के समर्थन का पत्र स्पीकर रथिंद्रनाथ बोस को सौंप दिया और खुद को असली विपक्षी गुट का नेता घोषित करने की मांग की। 3 जून को स्पीकर ने इस बहुमत को स्वीकार करते हुए रीताब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष (LoP) और संदीपन साहा को मुख्य सचेतक (Chief Whip) के रूप में मान्यता दे दी। इसी फैसले के खिलाफ शोभनदेव चट्टोपाध्याय और खुद ममता बनर्जी ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

Amit Mandal
अमित कुमार मंडलauthor

अमित मंडल टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में न्यूज डेस्क पर Assistant Editor के रूप में काम कर रहे हैं। प्रिंट, टीवी और डिजिटल—तीनों माध्यमों में कुल मिलाकर 15 सालों से अधिक का अनुभव उन्हें खबरों को देखने की व्यापक दृष्टि देता है। ब्रेकिंग न्यूज, लाइव ब्लॉग, स्पेशल स्टोरीज और एक्सप्लेनेर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। एंगल चुनने की कला, खबरों की गति को समझना और समय पर सही जानकारी पहुंचाना—ये उनकी सबसे बड़ी खूबियां हैं। अमित अपने करियर में करीब 20 हजार से अधिक न्यूज आर्टिकल, एनालिसिस और एक्सप्लेनर पब्लिश कर चुके हैं।

और पढ़ें
End of Article