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हिमालय के भीतर से गुजरेगी भारतीय रेल! 125 किमी लंबी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग लाइन, 83% रास्ता सुरंगों से गुजरेगा

Rishikesh-Karanprayag Rail Line: 125 किलोमीटर लंबी रेल लाइन में करीब 104 किलोमीटर टनल, 19 पुल, मुश्किल भूगर्भीय परिस्थितियों के बीच प्रोजेक्ट तैयार हो रहा है।

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125 किमी लंबी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग लाइन, 83% रास्ता सुरंगों से गुजरेगा

ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक रेल लाइन बिछाने का काम हिमालय की बेहद जटिल भूगर्भीय परिस्थितियों में किया जा रहा है। यह 125 किलोमीटर लंबी परियोजना है। परियोजना की कुल लंबाई का करीब 83 फीसदी हिस्सा यानी लगभग 104 किलोमीटर टनल से होकर गुजरेगा।इस परियोजना में टनल और पुलों का बड़ा नेटवर्क है।16 टनल और 19 पुल हैं, कई जगह टनल के बाद पुल और फिर टनल का निर्माण करना पड़ता है।

हिमालय की पहाड़ियां अपेक्षाकृत नई हैं। यहां मजबूत चट्टानों के साथ नरम मिट्टी और कमजोर भूगर्भीय परतें भी मिलती हैं, जिससे टनल बनाने में मुश्किल आती है। टनल बोरिंग मशीन (TBM) का इस्तेमाल करने से पहले भूगर्भीय परिस्थितियों की जांच की गई। नरम जमीन में टनल के अंदर की ओर दबाव बढ़ने और उसके सिकुड़ने की आशंका को ध्यान में रखकर मशीन के डिजाइन में बदलाव किए गए।

ज्यादा टॉर्क और दबाव सहने के लिए भी विशेष डिजाइन तैयार

TBM के कई हिस्सों को बनाया गया मजबूत मशीन के कटर हेड, सुरक्षा कवच और प्लेटों की व्यवस्था में बदलाव किए गए। ज्यादा टॉर्क और दबाव सहने के लिए भी विशेष डिजाइन तैयार किया गया। टनल-1 सबसे जटिल है, करीब 11 किलोमीटर लंबी टनल-1 को परियोजना के सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सों में गिना जा रहा है। यहां भूगर्भीय परिस्थितियां ज्यादा कठिन हैं और आसपास आबादी होने के कारण जमीन को स्थिर रखने के लिए माइक्रोपाइल्स का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

T1 और T5 पर काम जारी

T1 और T5 पर काम जारी दिए गए विवरण के मुताबिक, इन दोनों टनलों पर काम तेजी से चल रहा है, जबकि परियोजना के बाकी हिस्सों में भी प्रगति हो रही है।

अंतिम स्टेशन कर्णप्रयाग भारत-चीन सीमा से करीब 123 किलोमीटर दूर

इस परियोजना में शिवपुरी, व्यासी, देवप्रयाग, जलासू, मलेथा, श्रीनगर समेत अन्य स्टेशन प्रस्तावित हैं, जो क्षेत्र की रेल कनेक्टिविटी बढ़ाएंगे। रेल लाइन बनने से रुद्रप्रयाग, केदारनाथ और बद्रीनाथ की यात्रा करने वाले लोगों को कनेक्टिविटी के लिहाज से फायदा मिल सकता है। परियोजना का अंतिम स्टेशन कर्णप्रयाग भारत-चीन सीमा से करीब 123 किलोमीटर दूर बताया गया है। इस लिहाज से भी इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग लाइन की खासियतों पर डाल लें नजर

भारत-चीन सीमा से करीब 123 किलोमीटर दूर होगा कर्णप्रयाग रेलवे स्टेशन

125 किलोमीटर की परियोजना में करीब 104 किलोमीटर टनल का निर्माण

हिमालय की कठिन भूगर्भीय परिस्थितियों में टनल बनाना बड़ी चुनौती

परियोजना में 16 टनल और 19 पुल शामिल

टनल बनाने के लिए टनल बोरिंग मशीन (TBM) के डिजाइन में किए गए विशेष बदलाव

11 किलोमीटर लंबी टनल-1 सबसे चुनौतीपूर्ण, T1 और T5 पर काम तेजी से जारी

रेल लाइन बनने से बद्रीनाथ और केदारनाथ जाने वाले यात्रियों को कनेक्टिविटी का फायदा मिलेगा

सामरिक लिहाज से भी महत्वपूर्ण है ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजन

bhawana gupta
भावना किशोरauthor

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर मूल की भावना ने देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIMC से 2014 में पत्रकारिता की पढ़ाई की. 12 सालों से मीडिया में काम कर रही हैं. न्यूज़ नेशन, इंडिया न्यूज़, टीवी 9 भारतवर्ष और ज़ी न्यूज़, न्यूज 18 में काम करने का अनुभव. अभी Times Now में Special correspondent हैं.दिल्ली सरकार, स्वास्थ्य ,रेल, कल्चरल, शिक्षा मंत्रालयों के साथ दिल्ली क्राइम ,पॉलिटिक्स और राजधानी की हर छोटी बड़ी खबरों पर खास तौर से नजर रखती हैं. लोगों से जुड़ी खबरों पर काम करने और लोगों तक सही और सटीक खबरें पहुंचाने को अपना मकसद मानती हैं।

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