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गणतंत्र दिवस: कर्तव्य पथ दुनिया ने देखी भारत की ताकत, परेड में दिखी नारी शक्ति की शानदार झलक

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jan 26, 2024, 02:28 PM IST

Republic Day Parade 2024: कैप्टन संध्या के नेतृत्व में तीनों सेवाओं की महिला टुकड़ी ने मार्च किया। इनमें कैप्टन शरण्या राव, सब लेफ्टिनेंट अंशू यादव और फ्लाइट लेफ्टिनेंट श्रृष्टि राव के साथ पूर महिला दल ने खूब तालियां बटोरीं।

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गणतंत्र दिवस परेड

Photo : ANI

Republic Day Parade 2024: भारत ने शुक्रवार को अपने 75वें गणतंत्र दिवस की शुरुआत अपनी महिला शक्ति और सैन्य शक्ति के भव्य प्रदर्शन के साथ की, जिसमें विशिष्ट मार्चिंग टुकड़ियां, मिसाइलें, युद्धक विमान, निगरानी उपकरण और घातक हथियार प्रणालियां शामिल थीं। समारोह के मुख्य अतिथि और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों समेत पूरी दुनिया भारत की शक्ति का साक्षी बनी। पहली बार, सेना की तीनों सेवाओं की संपूर्ण महिला टुकड़ी ने कर्तव्य पथ पर मार्च किया, जो देश की बढ़ती नारी शक्ति को दर्शाता है।

परेड की शुरुआत पारंपरिक सैन्य बैंड के बजाय 100 से अधिक महिला कलाकारों द्वारा शंख, नादस्वरम और नगाड़ा जैसे भारतीय संगीत वाद्ययंत्र बजाते हुए की गई। यह भी अपने आप में पहली बार था। परेड की शुरुआत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा सलामी लेने के साथ हुई। वह और मैक्रों, भारतीय राष्ट्रपति के अंगरक्षकों के साथ, पारंपरिक बग्गी में कर्तव्य पथ पर पहुंचे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, कई अन्य केंद्रीय मंत्री, देश के शीर्ष सैन्य अधिकारी, विदेशी राजनयिक और वरिष्ठ अधिकारी राष्ट्रीय राजधानी के मध्य में स्थित कर्तव्य पथ पर आयोजित सबसे बड़े कार्यक्रम में दर्शकों में शामिल थे।

कैप्टन संध्या के नेतृत्व में महिला टुकड़ी ने किया मार्च

सेना टुकड़ी 61 कैवलरी नेतृत्व कर रही थी जिसे 1953 में स्थापित किया गया था। इसके बाद 11 मशीनीकृत टुकड़ियां, 12 मार्चिंग टुकड़ियां और आर्मी एविएशन कोर के उन्नत हल्के हेलीकॉप्टरों द्वारा फ्लाई-पास्ट किया गया। टैंक टी-90 भीष्म, एनएजी मिसाइल सिस्टम, पैदल सेना के लड़ाकू वाहन, हथियार का पता लगाने वाली रडार प्रणाली 'स्वाति', ड्रोन जैमर प्रणाली और मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें परेड का हिस्सा बनीं। कैप्टन संध्या के नेतृत्व में तीनों सेवाओं की महिला टुकड़ी ने मार्च किया। इनमें कैप्टन शरण्या राव, सब लेफ्टिनेंट अंशू यादव और फ्लाइट लेफ्टिनेंट श्रृष्टि राव के साथ पूर महिला दल ने खूब तालियां बटोरीं। मेजर सृष्टि खुल्लर के नेतृत्व में सेना के डेंटल कोर की कैप्टन अंबा सामंत, भारतीय नौसेना की सर्जन लेफ्टिनेंट कंचना और भारतीय वायु सेना की फ्लाइट लेफ्टिनेंट दिव्या प्रिया के साथ एक अन्य महिला सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा दल ने भी मार्च किया। सेना की मार्चिंग टुकड़ियों में मद्रास रेजिमेंट, ग्रेनेडियर्स, राजपूताना राइफल्स, सिख रेजिमेंट और कुमाऊं रेजिमेंट शामिल थीं।

परेड में शामिल हुए अग्निवीर

भारतीय नौसेना की टुकड़ी में 144 पुरुष और महिला अग्निवीर शामिल थे, जिनका नेतृत्व कंटिजेंट कमांडर के रूप में लेफ्टिनेंट प्रज्ज्वल एम और प्लाटून कमांडर के रूप में लेफ्टिनेंट मुदिता गोयल, लेफ्टिनेंट शरवानी सुप्रिया और लेफ्टिनेंट देविका एच ने किया। इसके बाद नौसेना की एक झांकी प्रदर्शित की गई, जिसमें नारी शक्ति और 'स्वदेशीकरण के माध्यम से महासागरों में समुद्री शक्ति' विषयों को दर्शाया गया। झांकी के पहले भाग में भारतीय नौसेना में सभी भूमिकाओं और रैंकों में महिलाओं की शक्ति को प्रदर्शित किया गया, जबकि दूसरे भाग में पहले स्वदेशी कैरियर बैटल ग्रुप को दर्शाया गया, जिसमें विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत, अत्यधिक क्षमता वाले एस्कॉर्ट जहाज दिल्ली, कोलकाता और शिवालिक और शामिल थे। कलवरी श्रेणी की पनडुब्बी और रुक्मणि उपग्रह को भी प्रदर्शित किया गया। भारतीय वायु सेना की टुकड़ी में 144 वायुसैनिक और चार अधिकारी शामिल थे और इसका नेतृत्व स्क्वाड्रन लीडर रश्मि ठाकुर ने किया। स्क्वाड्रन लीडर सुमिता यादव और प्रतीति अहलूवालिया और फ्लाइट लेफ्टिनेंट कीर्ति रोहिल अतिरिक्त अधिकारी उनके साथ थे।

दुनिया ने देखी भारत की मिसाइल ताकत

परेड में पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल, एंटी-सैटेलाइट मिसाइल, अग्नि -5, सतह से सतह पर मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल, बहुत कम दूरी की वायु रक्षा प्रणाली, नौसेना एंटी-शिप मिसाइल, और एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल 'हेलिना' का भी प्रदर्शन किया गया। सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (क्यूआरएसएएम), हल्के लड़ाकू विमान 'तेजस', उत्तम सक्रिय इलेक्ट्रॉनिक स्कैन किए गए ऐरे रडार (एईएसएआर), उन्नत इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और शक्ति साइबर सुरक्षा प्रणाली भी परेड में प्रदर्शित की गईं।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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