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Republic Day 2025: वीरता पदक से सर्वाधिक संख्या में सीआरपीएफ को किया गया सम्मानित, जानें खास बातें

Gallantry Medals for CRPF: गणतंत्र दिवस 2025 के मौके पर सीआरपीएफ को सर्वाधिक संख्या में वीरता पदक से सम्मानित किया गया। सीआरपीएफ के बाद सबसे ज्यादा पदक पाने वालों में उत्तर प्रदेश (17), जम्मू-कश्मीर (15), छत्तीसगढ़ (11) और सीमा सुरक्षा बल (5) शामिल हैं। आपको इस रिपोर्ट में खास बातें बताते हैं।

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केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ)

CRPF awarded Highest Number of Gallantry Medals: गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर शनिवार को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) को सभी केंद्रीय एवं राज्य पुलिस बलों में सबसे अधिक 19 वीरता पदक से सम्मानित किया गया। गृह मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, राज्य एवं केंद्रीय पुलिस बलों, अग्निशमन सेवा, होमगार्ड एवं नागरिक सुरक्षा तथा सुधारात्मक सेवाओं के कर्मियों को कुल 95 वीरता पदक प्रदान किए गए हैं।

सीआरपीएफ को सबसे अधिक वीरता पदक

सीआरपीएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वीरता के लिए दिए जाने वाले 19 पदकों में से 11 जम्मू-कश्मीर में किए गए अभियानों के लिए, माओवाद विरोधी अभियानों में बहादुरी के कार्यों के लिए सात पदक और पूर्वोत्तर में अभियान के दौरान दिखाए गए साहस के लिए एक पदक शामिल है। पदक से सम्मानित किये जाने वालों में सेकंड-इन-कमांड रैंक के अधिकारी नरेंद्र यादव, और सहायक कमांडेंट अमित कुमार और विनय कुमार शामिल हैं।

सुनील कुमार पांडे को मरणोपरांत पदक

दिवंगत कांस्टेबल सुनील कुमार पांडे को मरणोपरांत पदक के लिए नामित किया गया है। असम से अरुणाचल प्रदेश में तस्करी कर रहे मोटरसाइकिल सवार तस्करों को रोकते हुए 186वीं बटालियन के जवान पांडे ने सितंबर 2023 में असम में अपनी जान गंवा दी थी। हमलावरों ने उन पर चाकू से हमला किया था।

देश के सबसे बड़े अर्धसैनिक बल सीआरपीएफ के बाद सबसे ज्यादा पदक पाने वालों में उत्तर प्रदेश (17), जम्मू-कश्मीर (15), छत्तीसगढ़ (11) और सीमा सुरक्षा बल (5) शामिल हैं। कांगो में संयुक्त राष्ट्र के तहत तैनात सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के तीन कर्मियों को भी वीरता पदक से सम्मानित किया गया है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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