Rahul gandhi disqualification case: कांग्रेस के कद्दावर नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को संसदीय सदस्यता से अयोग्य ठहराए जाने के बाद कहा कि हर कीमत चुकाने के लिए तैयार हैं। शनिवार को वो इस विषय पर मीडिया से मुखातिब भी होने वाले हैं। लेकिन क्या वो सजा और अयोग्य होने से बच सकत थे। दरअसल इस सवाल के पीछे जो जवाब है वो तथ्यों पर आधारित है। वो बच सकते थे अगर पहले की तरफ सॉरी बोल दिया होता। लेकिन इस दफा वो कीमत चुकाने के लिए तैयार क्यों हैं इसे समझने की जरूरत है। सामान्य तौर देखा गया है कि अगर राजनेता किसी तरह की टिप्पणी करते हैं तो आमतौर पर माफी मांगने के साथ ही मामले का निपटान हो जाता है। अगर बात राहुल गांधी की करें तो ऐसा नहीं है कि मानहानि के किसी मामले में उन्होंने माफी ना मांगी हो।
चौकीदार चोर मामले में मांगी माफी
2019 में ही आम चुनाव से पहले वो चौकीदार चोर का नारा लगाते थे। मामला जब सुप्रीम कोर्ट पहुंता तो तीन बार माफीनामा दाखिल किया। अंतिम माफीनामे में लिखा था कि वो बिना शर्त अपने बयान के लिए क्षमा चाहते हैं। लेकिन मोदी सरनेम मामले में वो माफी मांगने से बचते रहे। सूरत सेशंस कोर्ट में भी वो तीन बार पेश हुए। लेकिन चौकीदार चोर से उलट एक बार भी माफी जैसे शब्द का इस्तेमाल नहीं किया।अब यहां सवाल यह है कि राहुल गांधी को जो सजा सुनाई गई क्या उसके लिए बीजेपी की पैरवी जिम्मेदार है, या राहुल गांधी की वकीलों की टीम ने गलती कर दी। जानकार बताते हैं कि चौकीदार चोर मामले में अभिषेक मनु सिंघवी पैरवी कर रहे थे। मामले और समय की गंभीरता को समझते हुए उन्होंने माफीनामे का सुझाव दिया जिसे राहुल गांधी ने माना और मामला सुलझ गए। लेकिन यहां वकीलों ने ठीक ढंग से उनके पक्ष को नहीं रखा।
दूसरे नेताओं ने भी मांगी है माफी
अगर बात दूसरे राजनीतिक दलों के नेताओं की करें तो मानहानि के एक मामले में दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल फंसे हुए थे। उन्होंने तीन मामलों में माफी मांगी। अरविंद केजरीवाल ने नितिन गडकरी, कपिल सिब्बल से माफी मांगी थी। इसी तरह अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ भी ड्रग्स मामले में आरोप लगाया था। लेकिन बाद में माफी मांग ली।
