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Punjab: 111 किसान आज से शुरू करेंगे आमरण अनशन, केंद्र के खिलाफ आंदोलन और तेज

Farmers Protest: पंजाब के किसानों का केंद्र सरकार के खिलाफ आंदोलन और तेज होता जा रहा है। इसी बीच 111 किसानों का समूह आज से आमरण अनशन शुरू करेगा। वहीं किसानों की मांगों को लेकर आमरण अनशन कर रहे डल्लेवाल की हालत और खराब हुई। आपको इस आंदोलन से जुड़ी कुछ अहम बातें बताते हैं।

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फाइल फोटो।

Photo : PTI

Kisan Andolan: पंजाब के प्रदर्शनकारी किसानों ने अपनी विभिन्न मांगों के समर्थन में केंद्र के खिलाफ आंदोलन को और तेज करते हुए कहा है कि काले कपड़े पहने 111 किसानों का एक जत्था आज से आमरण अनशन शुरू करेगा। इस बीच, किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल के आमरण अनशन को मंगलवार को 50 दिन पूरे हो गए और किसान नेताओं ने कहा कि उन्हें पानी पीने में भी कठिनाई हो रही है। किसानों ने पहले कहा था कि डल्लेवाल कुछ भी नहीं खा रहे हैं और सिर्फ पानी पी रहे हैं। डल्लेवाल का इलाज कर रहे चिकित्सकों ने कहा कि उनकी सेहत हर दिन ‘‘बिगड़ती’’ जा रही है।

आज से आमरण अनशन पर बैठेगा 111 किसानों का एक समूह

किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ ने बताया था कि 111 किसानों का एक समूह बुधवार दोपहर दो बजे से आमरण अनशन पर बैठेगा, वे काले कपड़े पहनकर पुलिस बैरिकेडिंग के पास शांतिपूर्वक बैठेंगे। उन्होंने कहा कि किसान बहुत भावुक हैं और उनका मानना है कि वे डल्लेवाल के बलिदान से पहले अपना बलिदान दे देंगे। किसान फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी की मांग को लेकर शंभू बॉर्डर और खनौरी बॉर्डर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। किसानों के समर्थन में डल्लेवाल 26 नवंबर 2024 से भूख हड़ताल पर हैं।

आमरण अनशन कर रहे डल्लेवाल की हालत और खराब हुई

किसानों की मांगों को लेकर पंजाब और हरियाणा के बीच खनौरी बॉर्डर पर 50 दिन से आमरण अनशन कर रहे किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल की हालत और खराब हो गई है। डल्लेवाल की सेहत पर नजर रख रहे चिकित्सक अवतार सिंह ने मंगलवार को बताया कि सोमवार शाम किसान नेता की हालत और खराब हो गई थी और उनका रक्तचाप काफी कम हो गया था। सिंह ने कहा कि सोमवार को बिस्तर पर लेटे हुए डल्लेवाल को उल्टी भी हुई थी। हालांकि, तबीयत लगातार बिगड़ने के बावजूद डल्लेवाल ने चिकित्सा सहायता लेने से इनकार कर दिया है।

किसान फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी की मांग को लेकर शंभू बॉर्डर और खनौरी बॉर्डर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। किसानों के समर्थन में डल्लेवाल 26 नवंबर 2024 से भूख हड़ताल कर रहे हैं। इस बीच, किसान नेता अभिमन्यु कुहाड़ ने बताया कैथल से किसानों का जत्था डल्लेवाल के समर्थन में दातासिंह वाला-खनौरी किसान मोर्चे पर पहुंचा है। कुहाड़ ने कहा कि डल्लेवाल से पानी भी नहीं पिया जा रहा है और पानी पीने पर उन्हें उल्टियां हो रही हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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