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जन्मदिन पर दृष्टिबाधित छात्रों का गाना सुनकर भावुक हो गईं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, आंखे से छलक पड़े आंसू; देखिए वीडियो

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अपने जन्मदिन के अवसर पर राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान गईं थीं, जहां उन्होंने दृष्टिबाधित बच्चों के साथ कुछ समय बिताया। इसी दौरान एक कार्यक्रम में जब बच्चों ने उनके लिए गाना गाया तो वो भावुक हो गईं।

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जन्मदिन पर दृष्टिबाधित छात्रों का गाना सुनकर भावुक हुईं राष्ट्रपति मुर्मू

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के दौरे पर पहुंची राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उस वक्त भावुक हो गईं, जब उनके जन्मदिन के अवसर पर दृष्टिबाधित बच्चे गाना, गाने लगे। दृष्टिबाधित बच्चों के गाने को सुनकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मंच पर ही भावुक हो गईं, उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। जिसके बाद उनका यह वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

दृष्टिबाधित बच्चों के गाने को सुनकर भावुक हुईं राष्ट्रपति

राष्ट्रपति मुर्मू तीन दिवसीय दौरे पर उत्तराखंड की राजधानी देहरादून पहुंची हैं। खास बात यह है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शुक्रवार को अपने जन्मदिन के मौके पर देवभूमि में हैं, जहां उन्होंने राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान के छात्रों के साथ कुछ समय बिताया। संस्थान की ओर से उनके लिए एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान बच्चों ने एक गीत के जरिए जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान दिव्यांग बच्चों ने जन्मदिन पर बॉलीवुड का मशहूर गीत 'बार-बार ये दिन आए' गाया तो उनका गाना सुनकर राष्ट्रपति भावुक हो गईं और मंच पर ही उनकी आंखों में आंसू छलक गए।

भावुक होने पर क्या बोलीं राष्ट्रपति

इसके बाद मंच पर मौजूद सुरक्षाकर्मी ने राष्ट्रपति को टिश्यू पेपर दिया, जिसकी मदद से उन्होंने अपने आंसुओं को पोंछा। सोशल मीडिया पर यह वीडियो वायरल हो रहा है। राष्ट्रपति ने भावुक होने पर कहा- ''मेरी आंखों से तो पानी रोके नहीं रुका। मुझे लगता है कि वे गले से नहीं गा रहे थे, वे अपने ह्रदय से गा रहे थे। जैसे सरस्वती उनके गले में बैठकर गा रही थीं।''

राष्ट्रपति ने की बच्चों की तारीफ

राष्ट्रपति ने कहा कि बच्चों के समूह की गायन प्रतिभा ने उनके इस विचार को पुष्ट किया कि दिव्यांगता के साथ पैदा होने वाले बच्चों में कुछ विशेष क्षमताएं होती हैं। राष्ट्रपति ने बच्चों को आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते हुए कहा कि उनकी सफलता निश्चित है। मुर्मू ने कहा कि सरकार की नीतियां दिव्यांगजनों को सशक्त बनाने और उन्हें आगे बढ़ने के समान अवसर प्रदान करने के लिए बनाई गई हैं। उन्होंने दिव्यांग बच्चों को सशक्त बनाने के लिए समर्पण के साथ काम करने हेतु संस्थान से जुड़े सभी लोगों की भी सराहना की। राष्ट्रपति ने कहा कि भारत का इतिहास दयालुता और समावेशिता के उदाहरणों से भरा पड़ा है। उन्होंने बच्चों से शिक्षा के माध्यम से सशक्त होकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने को कहा।

20 जून 1958 को हुआ था द्रौपदी मुर्मू का जन्म

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का जन्म 20 जून 1958 को ओडिशा के मयूरभंज जिले के एक छोटे से गांव उपरबेड़ा में हुआ था। वह संथाल जनजाति से संबंध रखती हैं। उनके पिता बिरंची नारायण टुडू गांव के मुखिया थे और पंचायती राज व्यवस्था से जुड़े हुए थे।

Shishupal Kumar
शिशुपाल कुमारauthor

शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय और क्राइम रिपोर्टिंग में गहरी रुचि और मजबूत पकड़ के साथ वे समाचारों की बारीकियों को समझने और उन्हें प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। शिशुपाल ने अपने करियर की शुरुआत एक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के रूप में की, जहां उन्होंने प्रोडक्शन से लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग तक पत्रकारिता के कई महत्वपूर्ण पहलुओं में काम किया। फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क दोनों स्तरों पर उनकी दक्षता है। अब तक शिशुपाल कुमार 15,000 से अधिक खबरें प्रकाशित कर चुके हैं। वह ब्रेकिंग न्यूज, रियल-टाइम कवरेज, डेटा-आधारित विश्लेषण और एक्सप्लेनर लिखने में खास महारत रखते हैं। उनकी स्टोरीज तथ्यों की सटीकता और सहज भाषा की वजह से पाठकों पर मजबूत प्रभाव छोड़ती हैं।

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