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राष्ट्रपति मुर्मू ने सुखोई-30 में भरी उड़ान, ऐसा करने वालीं दूसरी महिला राष्ट्रपति

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Apr 8, 2023, 02:18 PM IST

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से पहले डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम, प्रतिभा पाटिल, रामनाथ कोविंद भी सुखोई-30 की सवारी कर चुके हैं। राष्ट्रपति मुर्मू तेजपुर वायुसेना स्टेशन से सुखोई-30 में उड़ान भरेंगी।

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राष्ट्रपति मुर्मू ने सुखोई में भरी उड़ान (स्क्रीनग्रैब- @PresidentOfIndia)

President Draupadi Murmu in Sukhoi-30: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज सुखोई-30(Sukhoi-30) से उड़ान भरी। शनिवार सुबह वह तेजपुर वायुसेना स्टेशन पहुंची, जहां उन्हें गॉर्ड ऑफ ऑनर दिया गया। सेना के तीनों अंग वायु सेना, जल सेना और थल सेना की सुप्रीम कमांडर होने के नाते राष्ट्रपति को सैन्य नीतियों से भी अवगत कराया गया। इसके थोड़ी देर बाद वह सुखोई-30 में सवार हुईं और उड़ान भरी। बता दें, राष्ट्रपति मुर्मू इन दिनों अपने असम दौरे पर हैं।

30 मिनट तक भरी उड़ान

राष्ट्रपति भवन की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक, सुखोई-30 से उड़ान भरने के बाद वायु सेना स्टेशन लौटने से पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने हिमालय के दृश्य के साथ ब्रह्मपुत्र और तेजपुर घाटी को कवर किया। उन्होंने करीब 30 मिनट सुखाई विमान में बिताए। विमान को 106 स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर ग्रुप कैप्टन नवीन कुमार ने उड़ाया था। राष्ट्रपति मुर्मू इस तरह की उड़ान भरने वाली तीसरी राष्ट्रपति और दूसरी महिला राष्ट्रपति हैं। राष्ट्रपति को विमान और भारतीय वायु सेना (IAF) की परिचालन क्षमताओं के बारे में भी जानकारी दी गई। उन्होंने भारतीय वायुसेना की परिचालन तैयारियों पर संतोष व्यक्त किया।

दुश्मन को कड़ा संदेशराष्ट्रपति मुर्मू की इस उड़ान को चीन के खिलाफ भारत का कड़ा संदेश माना जा रहा है। दरअसल, हाल ही में चीन ने अरुणाचल प्रदेश के कुछ जगहों के नाम बदलने की कोशिश की थी। उसी के तुरंत बाद भारत की ओर से यह कदम उठाया जा रहा है। जिस तेजपुर एयरफोर्स स्टेशन से राष्ट्रपति सुखोई में उड़ान भरी , वह स्टेशन चीन, म्यांमार, बांग्लादेश और भूटान से सीमाओं की सुरक्षा करता है। ऐसे में इस स्टेशन से सेना के सुप्रीम कमांडर की उड़ान दुश्मन देशों के खिलाफ एक कड़ा संदेश माना जा रहा है।

दुश्मन के लिए बेहद घातक है सुखोई

सुखोई 30 फाइटर जेट दुश्मन के लिए बेहद घातक माना जाता है। यह 2120 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से उड़ता है और इसकी कॉम्बेट रेंज 3000 किलोमीटर तक है। इस विमान में ग्रिजेव-शुपुनोव ऑटोकैनन लगी है, जो एक मिनट में 150 राउंड फायर कर कसती है। इसके अलावा यह विमान चार तरह की मिसाइल और 10 तरह के बम बरसाने में भी सक्षम है। ब्रह्मोस मिसाइल लगने से यह फाइटर जेट दुश्मनों के लिए और भी घातक हो गया है। यह विमान 8130 किलोग्राम तक का वजह उठा सकता है।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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