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पुलवामा पर फिर शुरू हुई सियासत, मोदी-शाह ने शहीदों को दी श्रद्धांजलि; तो कांग्रेस ने पूछे 5 तीखे सवाल

Congress on Pulwama: कांग्रेस ने पुलवामा हमले को लेकर एक बार फिर पीएम मोदी से सवाल पूछा है कि पुलवामा आतंकी हमले में इस्तेमाल हुआ 300 किलो RDX कहां से आया? मोदी सरकार ने CRPF को एयरक्राफ्ट देने से क्यों मना किया? वहीं प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की है।

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पुलवामा पर सियासत गरमाई।

Politics on Pulwama Attack: एक तरफ साल 2019 के पुलवामा हमले के शहीदों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत कई केंद्रीय मंत्रियों ने श्रद्धांजलि अर्पित की है। तो वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने मोदी सरकार से तीखे सवाल पूछे हैं। कांग्रेस ने पीएम मोदी को सवालों के कटघरे में खड़ा करके ये दावा किया है कि ऐसे भी कुछ सवाल हैं, जिनके जवाब आज तक नहीं मिले हैं।

कांग्रेस ने पीएम मोदी से पुलवामा पर पूछे 5 सवाल

पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने 14 फरवरी 2019 को हुए आतंवादी हमले को लेकर कांग्रेस ने एक बार फिर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस का कहना है कि कुछ सवाल जिनके जवाब आज तक नहीं मिले।

  1. पुलवामा आतंकी हमले में इस्तेमाल हुआ 300 किलो RDX कहां से आया?
  2. मोदी सरकार ने CRPF को एयरक्राफ्ट देने से क्यों मना किया?
  3. बटालियन के जाने से पहले सड़क मार्ग सैनिटाइज क्यों नहीं किया गया?
  4. ये हमला किसकी नाकामी से हुआ?
  5. पुलवामा आतंकी हमले के बाद गवर्नर को नरेंद्र मोदी ने 'चुप रहने' की धमकी क्यों दी?

कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी पर तंज कसते हुए ये भी कहा कि इन सवालों के जवाब PM मोदी को देने चाहिए।

प्रधानमंत्री मोदी ने पुलवामा हमले के शहीदों को दी श्रद्धांजलि

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2019 के पुलवामा हमले के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि आने वाली पीढ़ियां उनके बलिदान और राष्ट्र के प्रति उनके अटूट समर्पण को कभी नहीं भूलेंगी। वर्ष 2019 में आज के ही दिन आतंकियों ने पुलवामा में बड़े हमले को अंजाम दिया था, जिसमें देश के 40 जवान शहीद हो गए थे। पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों के पर आत्मघाती हमला किया था।

इस हमले के महज 12 दिनों के बाद भारत ने पाकिस्तान से बदला लिया और 26 फरवरी को बालाकोट में सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया। इस सर्जिकल स्ट्राइक में भारतीय सेना ने जैश के कई आतंकियों को मार गिराया था। प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, '2019 में पुलवामा में हमने जिन साहसी नायकों को खोया, उन्हें श्रद्धांजलि। आने वाली पीढ़ियां उनके बलिदान और राष्ट्र के प्रति उनके अटूट समर्पण को कभी नहीं भूलेंगी।'

अमित शाह ने पुलवामा हमले के शहीदों को दी श्रद्धांजलि

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 2019 में जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकवादी हमले में शहीद सीआरपीएफ के 40 जवानों को शुक्रवार को श्रद्धांजलि अर्पित की। शाह ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार आतंकवादियों के समूल नाश के लिए कृतसंकल्पित है तथा सरकार ने आतंकवाद को ‘कतई बर्दाश्त नहीं करने’ की नीति अपनाई है। उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, 'मैं 2019 में आज के दिन पुलवामा में हुए कायराना आतंकी हमले में शहीद हुए जवानों को कृतज्ञ राष्ट्र की ओर से भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।' गृह मंत्री ने कहा कि आतंकवाद मानवता का सबसे बड़ा दुश्मन है और पूरा विश्व इसके खिलाफ एकजुट है।

शाह ने कहा, 'चाहे सर्जिकल स्ट्राइक हो या एयर स्ट्राइक मोदी सरकार आतंकवादियों के खिलाफ ‘कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति के साथ उनके समूल नाश के लिए प्रतिबद्ध है।' पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने 14 फरवरी 2019 को पुलवामा में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों को ले जा रही एक बस को निशाना बनाते हुए हमला किया था जिसमें 40 जवान शहीद हो गए थे। इसके कुछ दिनों बाद भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने पाकिस्तान के अंदर में आतंकी प्रशिक्षण शिविरों पर बमबारी की थी।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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