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क्या मणिपुर में लागू होगा राष्ट्रपति शासन? भाजपा ने अब तक नहीं किया CM पर फैसला; कब खत्म होगा इंतजार

Political uncertainty continues in Manipur: मणिपुर का नया मुख्यमंत्री कौन बनेगा? इस सवाल का जवाब नहीं मिल सका तो अब ये सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या अब राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू होगा? मणिपुर में राजनीतिक अनिश्चितता बरकरार है। वहीं भाजपा ने अब तक नया नेता नहीं चुना है। बैठकों और मुलाकातों का सिलसिला बदस्तूर जारी है।

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कौन बनेगा मणिपुर का सीएम?

Manipur Politics: एन बीरेन सिंह को इस्तीफा दिए हुए आज 5वां दिन है। ऐसे में एक सवाल अब भी बरकरार है कि सूबे का नया मुख्यमंत्री कौन बनेगा? मणिपुर दंगे की वीभत्स तस्वीरें दुनिया ने देखी। महिलाओं के साथ खुलेआम चीरहरण किया गया। डंके की चोट पर मानवता का कत्ल किया गया। ऐसे में अब इस राज्य में राजनीतिक उठापटक का दौर जारी है। लंबे वक्त से विपक्षी दलों द्वारा ये मांग की जा रही थी कि सीएम एन बीरेन इस्तीफा दें और मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू किया जाए। अब बीरेन ने इस्तीफा दे दिया है, हालांकि भाजपा लगातार ये दावा कर रही है कि राज्य में किसी तरह का राजनीतिक संकट नहीं है। जल्द ही नए नेता का चलन होगा। मगर विपक्ष ये मांग कर रही है कि इसमें इतनी देरी क्यों हो रही है, राष्ट्रपति शासन लागू किया जाए।

कौन बनेगा मणिपुर का नया मुख्यमंत्री?

मणिपुर के मुख्यमंत्री पद से एन. बीरेन सिंह के इस्तीफा देने के चार दिन बाद भी राज्य में राजनीतिक स्थिति अनिश्चित बनी हुई है और सत्तारूढ़ भाजपा ने अब तक नए नेता के बारे में फैसला नहीं किया है। इस बीच, राज्य के वन मंत्री टी. बिश्वजीत बुधवार शाम को इंफाल से असम की राजधानी गुवाहाटी के लिए रवाना हुए और पड़ोसी राज्य की उनकी यात्रा का कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया गया है।

मणिपुर में लगातार जारी है बैठकों का दौर

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्वोत्तर प्रभारी संबित पात्रा और पार्टी विधायकों के बीच कई दौर की चर्चा के बावजूद गतिरोध बना हुआ है, कुछ विधायकों ने सुझाव दिया है कि अंतिम निर्णय केंद्रीय नेतृत्व ले सकता है। पात्रा पिछले दो दिन में दो बार राज्यपाल अजय कुमार भल्ला से मुलाकात कर चुके हैं। मंगलवार को पात्रा ने पार्टी की राज्य इकाई के अध्यक्ष ए शारदा देवी के साथ भल्ला से बातचीत की और बुधवार को उन्होंने फिर से राज्यपाल से मुलाकात की। आज बृहस्पतिवार हो चुका है, लेकिन अब तक नए मुख्यमंत्री को लेकर कोई अपडेट नहीं आया है।

पात्रा ने स्थिति पर चर्चा करने के लिए राज्य के उपभोक्ता मामलों के मंत्री एल. सुसिंड्रो और विधायक करम श्याम समेत भाजपा विधायकों के साथ भी बैठक की। पत्रकारों से बात करते हुए श्याम ने कहा कि सिंह के पद छोड़ने के फैसले के बाद कोई संवैधानिक संकट नहीं है और केंद्रीय नेतृत्व विधायकों की मदद से मुद्दों को सुलझाएगा।

नए CM के नाम पर भाजपा विधायक की प्रतिक्रिया

राज्य विधानसभा के दो सत्रों के बीच निर्धारित अधिकतम छह महीने की अवधि समाप्त होने पर एक सवाल के जवाब में श्याम ने कहा, 'देखते हैं क्या होता है।' यह पूछे जाने पर कि क्या नए मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा की जाएगी, श्याम ने मुस्कुराते हुए टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। इस बीच, कांग्रेस विधायक थोकचोम लोकेश्वर ने पात्रा के राज्य के दौरे पर सवाल उठाया और पूछा कि क्या उनका इरादा नेतृत्व संकट को हल करना है।

ऐसी स्थिति रही तो राज्य में लग सकता है राष्ट्रपति शासन

कांग्रेस विधायक ने कहा कि पात्रा को भाजपा विधायकों के साथ चर्चा करके नए मुख्यमंत्री की नियुक्ति के लिए पहल करनी चाहिए थी। पूर्व अध्यक्ष ने कहा, 'उनका दौरा यह सुनिश्चित करने के लिए है कि विधानसभा सत्र न हो और राज्य के मुद्दे दरकिनार रहें। अब तक उन्होंने कोई टिप्पणी भी नहीं की है।' इस बीच, विशेषज्ञों ने कहा है कि अब तक सरकार बनाने का दावा पेश नहीं किए जाने से भाजपा शासित मणिपुर संवैधानिक संकट की ओर बढ़ सकता है।

उन्होंने कहा कि अगर स्थिति ऐसी ही रही तो राज्य में राष्ट्रपति शासन लग सकता है। राज्यपाल ने 10 फरवरी से शुरू होने वाले मणिपुर विधानसभा सत्र को पहले ही अमान्य घोषित कर दिया है। राज्य में विधानसभा का अंतिम सत्र 12 अगस्त, 2024 को संपन्न हुआ था।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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