Poland PM Donald Tusk India Visit 2026: पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क (Donald Tusk) 21 से 23 अक्टूबर तक भारत के ऐतिहासिक आधिकारिक दौरे पर नई दिल्ली पहुंचे हैं। 2010 के बाद यानी पूरे 16 साल बाद किसी पोलिश प्रधानमंत्री की यह पहली भारत यात्रा है। गुरुवार को नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पोलैंड के पीएम डोनाल्ड टस्क के बीच उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता हुई।
इस बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल, विदेश सचिव विक्रम मिसरी और पोलैंड के वित्त व अर्थव्यवस्था मंत्री अंद्रेज डोमांस्की समेत लगभग 100 पोलिश कंपनियों का प्रतिनिधिमंडल भी शामिल हुआ।
PM नरेंद्र मोदी ने क्या कहा?
संयुक्त प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा:
ऐतिहासिक संबंध: 'भारत और पोलैंड की दोस्ती केवल कूटनीतिक संबंधों पर आधारित नहीं है, बल्कि यह मानवता और सहानुभूति की साझी विरासत पर टिकी है। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जामनगर और कोल्हापुर के राजघरानों ने हजारों पोलिश बच्चों और परिवारों को भारत में शरण दी थी।'
रणनीतिक मजबूती और FTA: पीएम मोदी ने अगस्त 2024 में अपने पोलैंड दौरे का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों देशों ने अपने रिश्तों को 'रणनीतिक साझेदारी' (Strategic Partnership) के स्तर पर बढ़ाया था। उन्होंने कहा, 'हमारी बढ़ती आर्थिक ताकत ने इस साझेदारी के लिए नए अवसर पैदा किए हैं। भारत-यूरोपीय संघ (EU) मुक्त व्यापार समझौता (FTA) इन अवसरों को और अधिक व्यापक बना रहा है।'
पोलैंड के पीएम डोनाल्ड टस्क का बड़ा बयान
पोलिश प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने भारत और PM मोदी की वैश्विक भूमिका की खुलकर तारीफ की:
'PM मोदी मेरे दोस्त हैं': टस्क ने कहा, 'मुझे गर्व है कि मैं पीएम मोदी को अपना दोस्त कह सकता हूं। भारत और पोलैंड के बीच कोई भी 'हितों का टकराव' (Conflict of Interest) नहीं है।'
राजघाट पर श्रद्धांजलि: नई दिल्ली पहुंचने के बाद डोनाल्ड टस्क ने राजघाट जाकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की और पुष्पांजलि अर्पित की।

मोदी 2024 में गए थे पोलैंड
दोनों देशों के बीच क्या-क्या बड़ा हुआ और होगा?
द्विपक्षीय व्यापार 10 बिलियन डॉलर करने का लक्ष्य: भारत में पोलैंड के पूर्व राजदूत एडम बुराकोव्स्की और जानकारों के अनुसार, वर्तमान में लगभग 6 बिलियन डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 10 बिलियन डॉलर (USD 10 Billion) तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।
MoUs पर हस्ताक्षर: बैठक के दौरान दोनों नेताओं की मौजूदगी में रक्षा, तकनीक और व्यापार से जुड़े कई महत्वपूर्ण ज्ञापनों (MoUs) का आदान-प्रदान किया गया।
रक्षा क्षेत्र में 'को-प्रोडक्शन': दोनों देश अपनी सेनाओं का ऐतिहासिक आधुनिकीकरण कर रहे हैं। इसके तहत रक्षा उपकरणों के सह-डिजाइन, सह-विकास और सह-उत्पादन (Co-design, Co-develop, Co-produce) पर सहमति बन रही है।
बेंगलुरु का दौरा (23 अक्टूबर): नई दिल्ली में 'भारत-पोलैंड बिजनेस फोरम' में भाग लेने के बाद, टस्क 23 अक्टूबर को बेंगलुरु जाएंगे। वहां वे भारत के आईटी (IT), स्पेस टेक्नोलॉजी, ग्रीन टेक और स्टार्टअप सेक्टर के शीर्ष लीडर्स से बातचीत करेंगे।
एक्सपर्ट्स की राय: क्यों बेहद अहम है यह दौरा?
यूनिवर्सिटी ऑफ वॉरसॉ (University of Warsaw) के प्रोफेसर पेट्रिक्स कुगिएल (Patryk Kugiel) ने ANI को दिए इंटरव्यू में इस दौरे के दो मुख्य उद्देश्य बताए:
आर्थिक मोर्चा (Economic Front): पोलैंड अगले साल लागू होने वाले भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते (FTA) से पहले भारतीय बाजार में अपनी पहुंच मजबूत करना चाहता है। आईटी, डिजिटल, ग्रीन टेक्नोलॉजी, बैटरी रीसाइक्लिंग, फूड प्रोसेसिंग और माइनिंग में असीमित संभावनाएं हैं।
रणनीतिक मोर्चा (Strategic Front): पोलैंड भारत को उभरती वैश्विक महाशक्ति मानता है। यूक्रेन में शांति प्रक्रिया को बढ़ावा देने, बहुपक्षवाद (Multilateralism) को मजबूत करने और मध्य यूरोप में भारत के सबसे भरोसेमंद साझीदार के रूप में पोलैंड की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।
बता दें कि पोलैंड के प्रधानमंत्री टस्क वर्तमान में भारत के आधिकारिक दौरे पर हैं। लगभग 16 साल के अंतराल के बाद किसी पोलिश प्रधानमंत्री का यह पहला भारत दौरा है, जो दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और आर्थिक रिश्तों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह यात्रा अगस्त 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पोलैंड यात्रा के दौरान द्विपक्षीय संबंधों को 'रणनीतिक साझेदारी' में तब्दील किए जाने के बाद हो रही है।
क्यों एक-दूसरे के करीब आ रहे हैं भारत और पोलैंड?
विशेषज्ञों और कूटनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, नई दिल्ली और वारसा के बीच बढ़ते इस जुड़ाव के कई बड़े भू-राजनीतिक और आर्थिक कारण हैं:
रक्षा और औद्योगिक सहयोग (Defence and Joint Production): यूरोपीय सुरक्षा परिदृश्य में बदलाव और भारत के 'मेक इन इंडिया' अभियान के तहत, दोनों देश रक्षा क्षेत्र में आपसी सहयोग, सह-उत्पादन (Joint Production) और सैन्य तकनीकी आदान-प्रदान को बढ़ावा देने पर काम कर रहे हैं।
व्यापारिक एवं आर्थिक विस्तार: जैसे कि आपको मालूम है कि पोलैंड के प्रधानमंत्री के साथ वहां के वित्त एवं अर्थव्यवस्था मंत्री तथा लगभग एक सौ शीर्ष कंपनियों का एक बड़ा व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है। ऐसे में भारत-पोलैंड बिजनेस फोरम (नई दिल्ली और बेंगलुरु) के जरिए दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को और विस्तार देने की योजना है।
उभरती प्रौद्योगिकियां और अंतरिक्ष क्षेत्र: प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क का नई दिल्ली के बाद बेंगलुरु का दौरा भी प्रस्तावित है, जहां वे अंतरिक्ष अनुसंधान (Space Sector) और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) क्षेत्र के प्रमुख कारोबारियों व स्टार्टअप्स से मुलाकात करेंगे।
यूरोपीय संघ (EU) के साथ सेतु: भारत के लिए पोलैंड मध्य यूरोप में एक अहम और मजबूत आर्थिक साझीदार है। यह दौरा भारत-यूरोपीय संघ (EU) के बीच मुक्त व्यापार समझौतों और रणनीतिक संवाद को गति देने में भी एक बड़ा माध्यम बन रहा है।
