November 2026 Ekadashi Date: नवंबर का महीना भगवान विष्णु की पूजा और व्रत के लिहाज से बेहद खास रहने वाला है। इस महीने दो प्रमुख एकादशी व्रत पड़ेंगे। पहली रमा एकादशी और दूसरी देवउठनी एकादशी। खास बात यह है कि देवउठनी एकादशी के साथ भगवान विष्णु के चार महीने के योगनिद्रा काल के समाप्त होने की धार्मिक मान्यता जुड़ी है। ऐसे में बहुत से लोग जानना चाहते हैं कि नवंबर 2026 में एकादशी कब-कब है, देवउठनी एकादशी 20 या 21 नवंबर को है और व्रत का पारण किस समय किया जाएगा। आइए जानते हैं नवंबर की दोनों एकादशी की तारीख, तिथि और धार्मिक महत्व।
नवंबर 2026 में एकादशी कब-कब है (November 2026 Ekadashi Calendar)
हिंदू पंचांग के अनुसार, हर महीने कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष में एक-एक एकादशी आती है। नवंबर 2026 में दोनों एकादशी कार्तिक महीने में पड़ रही हैं। पहली एकादशी दिवाली से पहले और दूसरी दिवाली के बाद आएगी।
- रमा एकादशी: 5 नवंबर 2026, गुरुवार
- देवउठनी एकादशी: 20 नवंबर 2026, शुक्रवार
- गौण/वैष्णव देवउठनी एकादशी: 21 नवंबर 2026, शनिवार
ये तारीखें दिल्ली के पंचांग के अनुसार हैं।
रमा एकादशी नवंबर 2026 में कब है (Rama Ekadashi 2026 Date)
नवंबर महीने की पहली एकादशी रमा एकादशी होगी। यह व्रत 5 नवंबर 2026, गुरुवार को रखा जाएगा। रमा एकादशी कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष में आती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की पूजा करने का विशेष महत्व है।
रमा माता लक्ष्मी का ही एक नाम माना जाता है। इसलिए इस एकादशी को सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना से जोड़ा जाता है। भक्त इस दिन व्रत रखते हैं, विष्णु सहस्रनाम का पाठ करते हैं और शाम को भगवान के सामने दीपक जलाते हैं।
रमा एकादशी 2026 तिथि और पारण समय
- रमा एकादशी तिथि प्रारंभ: 4 नवंबर, सुबह 11:03 बजे
- रमा एकादशी तिथि समाप्त: 5 नवंबर, सुबह 10:35 बजे
- रमा एकादशी व्रत की तारीख: 5 नवंबर, गुरुवार
- रमा एकादशी व्रत पारण: 6 नवंबर, सुबह 6:37 से 8:48 बजे तक
देवउठनी एकादशी 2026 कब है, 20 या 21 नवंबर (Dev Uthani Ekadashi 2026 Date)
नवंबर की दूसरी और बेहद महत्वपूर्ण एकादशी देवउठनी एकादशी होगी। इसे प्रबोधिनी एकादशी और देवोत्थान एकादशी भी कहा जाता है। स्मार्त परंपरा के अनुसार देवउठनी एकादशी 20 नवंबर 2026, शुक्रवार को है। वहीं गौण या वैष्णव एकादशी का व्रत 21 नवंबर, शनिवार को रखा जाएगा।
इस बार दोनों तारीखें सामने आने की वजह एकादशी तिथि का समय और व्रत निर्धारण की अलग-अलग परंपराएं हैं। इसलिए व्रत रखने वाले लोग अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार तारीख चुन सकते हैं।
देवउठनी एकादशी 2026 तिथि और पारण समय
- देवउठनी एकादशी तिथि प्रारंभ: 20 नवंबर, सुबह 7:15 बजे
- देवउठनी एकादशी तिथि समाप्त: 21 नवंबर, सुबह 6:31 बजे
- देवउठनी एकादशी स्मार्त व्रत: 20 नवंबर, शुक्रवार
- देवउठनी एकादशी स्मार्त व्रत पारण: 21 नवंबर, दोपहर 1:11 से 3:18 बजे तक
- देवउठनी एकादशी गौण/वैष्णव व्रत: 21 नवंबर, शनिवार
- देवउठनी एकादशी गौण व्रत पारण: 22 नवंबर, सुबह 6:49 से 8:56 बजे तक
देवउठनी एकादशी का इतना महत्व क्यों है (Dev Uthani Ekadashi Significance)
हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, आषाढ़ मास की देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु चार महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। इस अवधि को चातुर्मास कहा जाता है। कार्तिक शुक्ल एकादशी पर भगवान विष्णु के जागने की मान्यता है। इसी वजह से इस दिन को देवउठनी एकादशी कहा जाता है।
परंपरागत रूप से चातुर्मास में विवाह जैसे मांगलिक कार्यों पर विराम रहता है। देवउठनी एकादशी के बाद विवाह और अन्य शुभ कार्यों की शुरुआत का रास्ता खुलता है। हालांकि विवाह के वास्तविक मुहूर्त तय करते समय तिथि, नक्षत्र और स्थानीय पंचांग का भी ध्यान रखा जाता है।
इस दिन कई घरों में भगवान विष्णु का विशेष पूजन किया जाता है। कुछ परिवारों में गन्ने का मंडप सजाकर भगवान को जगाने की परंपरा भी है। अलग-अलग क्षेत्रों में पूजा के तरीके थोड़े अलग हो सकते हैं, लेकिन इसके पीछे भावना एक ही होती है।
एकादशी व्रत में क्या करें और क्या नहीं (Ekadashi Vrat Rules)
एकादशी के दिन सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। भक्त अपनी श्रद्धा और क्षमता के अनुसार व्रत का संकल्प लेते हैं। पूजा में पीले फूल, फल, तुलसी दल और सात्विक भोग चढ़ाने की परंपरा है। परंपरागत एकादशी व्रत में चावल और दूसरे अनाजों से परहेज किया जाता है। फलाहार करने वाले लोग फल, दूध, मखाना, साबूदाना और अन्य व्रत में स्वीकार्य चीजें ले सकते हैं।
