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पीएम मोदी ने हमें 'गालियां देने' के अलावा कुछ नहीं कहा; कांग्रेस ने प्रधानमंत्री के संबोधन पर किया पलटवार

Congress React on PM's speech: राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए पीएम मोदी ने कांग्रेस और नेहरू-गांधी परिवार को जमकर खरी खोटी सुनाई। जिसके बाद कांग्रेस ने पलटवार करते हुए ये कहा है कि प्रधानमंत्री का भाषणा हताशा से भरा था, हमें ‘‘गालियां देने'' के अलावा कुछ नहीं कहा।

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राज्यसभा में पीएम मोदी के संबोधन पर कांग्रेस ने किया पलटवार।

Congress Slams PM Modi: कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए सिर्फ हताशा और कुंठा से भरी बातें कीं तथा मुख्य विपक्षी दल को 'गालियां देने' के अलावा कोई नहीं बात नहीं की। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि ‘सबका साथ, सबका विकास’ उनकी सरकार का मूलमंत्र रहा है जबकि कांग्रेस का मूलमंत्र ‘परिवार प्रथम’ रहा है। उन्होंने इमरजेंसी का जिक्र किया, साथ ही जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी पर भी जमकर प्रहार किया।

'हताशा और कुंठा से भरा हुआ था पीएम मोदी का भाषण'

राज्यसभा में कांग्रेस के उप नेता प्रमोद तिवारी ने संसद परिसर में संवाददाताओं से कहा, 'हताशा और कुंठा से भरा हुआ भाषण था। लगता है कि प्रधानमंत्री के पास देश को देने के लिए कोई संदेश भी नहीं बचा है। वह अपनी सरकार के कामकाज से पूरी तरह निराश हैं, इसलिए सिर्फ कांग्रेस को गाली देते रहे। वह देश के लिए क्या करेंगे, यह नहीं बता पाए।'

'सुबह से शाम तक कांग्रेस को गालियां देते हैं पीएम मोदी'

कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के उस संबोधन में कांग्रेस के अलावा क्या था, सिर्फ कांग्रेस, कांग्रेस, कांग्रेस था। उन्होंने कहा, 'वह सुबह से शाम तक कांग्रेस को गालियां देते हैं। उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी या किसी दूसरे प्रधानमंत्री के बारे में चर्चा नहीं की। ऐसा लगता है कि 2014 से पहले कुछ था ही नहीं।'

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के सांसद पी संतोष कुमार ने कटाक्ष करते हुए कहा कि अच्छी बात है कि प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में सिर्फ तीन बार नेहरू का नाम लिया। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर राज्यसभा में हुई चर्चा का जवाब देते हुए मोदी ने कांग्रेस पर निशाना साधा और कहा कि उसने राजनीति का एक ऐसा मॉडल तैयार किया था, जिसमें ‘झूठ, फरेब, भ्रष्टाचार परिवारवाद, तुष्टीकरण आदि का घालमेल था’।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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