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देश को सबसे लंबे पुल की सौगात, पीएम मोदी ने किया अटल सेतु का उद्घाटन, जानिए इससे क्या-क्या बदलेगा?

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jan 12, 2024, 05:02 PM IST

Atal Setu: अटल बिहारी सेवारी-न्हावा शेवा अटल सेतु को पीएम मोदी ने देश को समर्पित किया। यह पुल मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे और नवी मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे को तेज़ कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। साथ ही मुंबई से पुणे, गोवा और दक्षिण भारत की यात्रा के समय को भी कम करेगा।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

Photo : ANI

Atal Setu: प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार को महाराष्ट्र में देश के सबसे लंबे पुल की सौगात दी। पीएम मोदी ने अटल बिहारी सेवारी-न्हावा शेवा अटल सेतु का उद्धाटन किया। हजारों करोड़ की लागत से बनाया गया यह पुल मुंबई को नवी मुंबई से जोड़ेगा। यह देश का सबसे लंबा पुल होने के साथ ही सबसे लंबा समुद्री पुल भी है। यह मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे और नवी मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे को तेज़ कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। साथ ही मुंबई से पुणे, गोवा और दक्षिण भारत की यात्रा के समय को भी कम करेगा। बता दें, पीएम मोदी ने दिसंबर, 2016 में इस पुल का शिलान्यास किया था।

जानकारी के मुताबिक, अटल सेतु का निर्माण 17840 करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत से किया गया है। यह पुल 21.9 किमी लंबा और 6 लेन वाला है। पुल की विशेषता यह है कि 16.5 किमी पुल का निर्माण समुद्र के ऊपर किया गया है और 5.5 किमी पुल जमीन पर बनाया गया है। इस अटल सेतु को आज से आम लोगों के लिए भी खोल दिया गया है।

पुल से क्या-क्या बदलेगा?

  • अटल सेतु मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्उे को तेज कनेक्टिविटी प्रदान करेगा।
  • मुंबई से पुणे, गोवा और दक्षिण भारत की यात्रा में समय कम होगा।
  • मुंबई से नवी मुंबई के बीच दो घंटे का सफर 15 से 20 मिनट में होगा।
  • पुल पर यात्रा से कम से कम 500 रुपये तक के ईंधन की बचत होगी।
  • पुल पर रोजाना 70 हजार लोग सफर करेंगे।
  • पूरे पुल पर 400 सीसीटीवी कैमरे और ट्रैफिक के दबाव के जानकारी के लिए AI सेंसर लगे हैं।

पुल के बारे में बड़ी बातें

  • लंबाई - 21.8 किमी
  • समुद्र के ऊपर निर्मित - 16.5 किमी
  • जमीन पर निर्मित- 5.5 किमी
  • लागत - 17840 करोड़ रुपये
  • अधिकतम यात्रा स्पीड- 100 किमी/घंटा
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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