प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में पेश किए गए केंद्रीय बजट को रिफॉर्म एक्सप्रेस का अगला चरण करार दिया। उन्होंने कहा कि ये बजट अल्पकालिक लोकलुभावन घोषणाओं से दूर रहकर दीर्घकालिक उत्पादक निवेश पर केंद्रित है। उन्होंने साफ किया कि यह बजट देश में रोजगार सृजन,टिकाऊ विकास और विकसित भारत के लक्ष्य को गति देने के लिए रिकॉर्ड पूंजीगत व्यय पर आधारित है। समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए विशेष साक्षात्कार में पीएम मोदी ने कहा कि 1 अप्रैल से शुरू होने वाले वित्त वर्ष का यह बजट उनकी शासन शैली और प्राथमिकताओं का सटीक प्रतिबिंब है। यह बजट हमारी ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’को अगले स्तर पर ले जाने वाला है। यह युवाओं को तेजी से बदलती दुनिया के अवसरों के लिए तैयार करने का दस्तावेज है।'मोदी ने कहा कि उनकी सरकार का कोई भी बजट सामान्य 'बही खाता' दस्तावेज तैयार करने की मानसिकता से नहीं बनाया गया,क्योंकि "यह हमारा दृष्टिकोण नहीं है।"
इस विशेष साक्षात्कार में पीएम ने रक्षा बजट और सैन्य आधुनिकीकरण को लेकर भी सरकार की मंशा साफ की। उन्होंने कहा कि भारत को हर समय मजबूत और तैयार रहना है,और हम वही कर रहे हैं। बदलते वैश्विक परिदृश्य,सीमाई चुनौतियों और नई तकनीकी युद्ध क्षमताओं के दौर में देश की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
₹12.2 लाख करोड़ का कैपेक्स: 2013 के मुकाबले पांच गुना वृद्धि
सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पूंजीगत व्यय को बढ़ाकर ₹12.2 लाख करोड़ कर दिया है, जो 2013 के स्तर की तुलना में लगभग पांच गुना अधिक है। इसे लेकर पीएम मोदी ने कहा कि यह एक रणनीतिक निर्णय है,ऐसी परिसंपत्तियों में निवेश करना जो उत्पादकता,रोजगार और भविष्य की आर्थिक क्षमता को मजबूत करें। उन्होंने कहा कि उत्पादक खर्च उनकी सरकार की पहचान रहा है। बुनियादी ढांचा,लॉजिस्टिक्स,रेलवे,सड़क,डिजिटल और ऊर्जा क्षेत्र में निवेश दीर्घकालिक विकास के इंजन हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर में ऐतिहासिक विस्तार
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले दशक में भारत ने अपने इतिहास का सबसे व्यापक बुनियादी ढांचा विस्तार देखा है। देश में हवाई अड्डों की संख्या दोगुनी हुई है। मेट्रो सेवा वाले शहरों की संख्या चार गुना से अधिक बढ़ी है। ग्रामीण सड़कों और इंटरनेट कनेक्टिविटी का तेजी से विस्तार हुआ है। समर्पित माल ढुलाई गलियारों (Dedicated Freight Corridors),बंदरगाहों और तटीय संपर्क में बड़े निवेश किए गए हैं।
बजट में रेलवे को दिए गए हिस्से का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा कि रेलवे के लिए लगभग ₹3 लाख करोड़ का प्रावधान किया गया है,जिसमें हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर,माल ढुलाई क्षमता और यात्री सुरक्षा पर विशेष जोर है। सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर प्रस्तावित हैं,जिनमें दक्षिण हाई-स्पीड डायमंड कॉरिडोर शामिल है। इसी तरह राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए आवंटन एक दशक पहले की तुलना में लगभग 500% बढ़ाया गया है।
सनराइज सेक्टर में निवेश से भविष्य की तैयारी
प्रधानमंत्री ने कहा कि बायोफार्मा,सेमीकंडक्टर,इलेक्ट्रॉनिक्स,रेयर अर्थ कॉरिडोर और केमिकल पार्क जैसे उभरते क्षेत्रों में निवेश किया जा रहा है। ये निवेश न केवल रोजगार और निवेश को बढ़ावा देंगे बल्कि भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को भी मजबूत करेंगे।
विश्वास-आधारित शासन और सुधार
पीएम मोदी ने कहा कि बजट की एक प्रमुख विशेषता विश्वास-आधारित शासन है। सरकार कागजी कार्रवाई कम कर रही है,कई अपराधों को गैर-अपराधीकृत कर रही है और अनुपालन आवश्यकताओं को घटा रही है। उनका कहना था कि राज्य को सक्षमकर्ता (Enabler) की भूमिका निभानी चाहिए न कि नियंत्रक की। उन्होंने कहा कि सरकार ने तकनीक-संचालित और मानव-केंद्रित कल्याण व्यवस्था विकसित की है, जो अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाती है।
‘यही समय है’:2047 के विकसित भारत की नींव
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह बजट केवल 2026 का दस्तावेज नहीं है,बल्कि 21वीं सदी की दूसरी तिमाही का पहला बजट है। उन्होंने इसे 2047 तक विकसित भारत की नींव रखने वाला बजट बताया। पीएम ने कहा कि जैसे 1920 के दशक में लिए गए निर्णयों ने 1947 की आजादी की नींव रखी,वैसे ही आज के फैसले 2047 के विकसित भारत का आधार बनेंगे।
यूपीए सरकार पर भी निशाना
पीएम मोदी ने कहा कि पिछले वर्षों में स्थापित राजनीतिक स्थिरता और पूर्वानुमेय नीति ढांचे ने वैश्विक निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है। यही कारण है कि भारत अब 38 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए)अपनी शर्तों पर कर पा रहा है। उन्होंने कहा कि मजबूत विनिर्माण, सेवाएं और एमएसएमई सेक्टर भारत को वैश्विक व्यापार वार्ताओं में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने में सक्षम बना रहे हैं। उन्होंने यूपीए शासनकाल पर निशाना साधते हुए कहा कि उस समय लंबी वार्ताओं के बावजूद ठोस परिणाम नहीं निकलते थे,जबकि वर्तमान सरकार सुधारों को ‘अक्षर और भावना’ दोनों रूपों में लागू कर रही है। पीएम ने निजी क्षेत्र से आह्वान किया कि वह लाभ मार्जिन की सुरक्षा तक सीमित न रहे, बल्कि अनुसंधान एवं विकास, आपूर्ति श्रृंखला और गुणवत्ता में आक्रामक निवेश करे।
वैश्विक परिदृश्य में भारत की नई भूमिका
इस दौरान यह पूछे जाने पर कि क्या उन्होंने तय कर लिया है कि भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य की दिशा में विकास के अगले चरण में प्रवेश करने के लिए तैयार है और क्या यह "अभी नहीं तो कभी नहीं"वाली स्थिति है? इस पर मोदी ने कहा कि कोविड महामारी के बाद की विश्व व्यवस्था भारत के लिए नये द्वार खोल रही है,जिसमें देश व्यापार और नवाचार में नयी दिल्ली के साथ साझेदारी करने के लिए उत्सुक हैं। उन्होंने कहा कि हमारे पास एक युवा और कुशल आबादी है;और हम कम मुद्रास्फीति और व्यापक आर्थिक स्थिरता के साथ मजबूत विकास पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। हमारे युवा अंतरिक्ष, खेल और स्टार्टअप जैसे विविध क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का परिचय दे रहे हैं। हमने राजनीतिक स्थिरता और सुधार-केंद्रित नीतियां सुनिश्चित की हैं।
प्रधानमंत्री ने दोहराया कि सरकार की प्राथमिकता अल्पकालिक राजनीतिक लाभ नहीं, बल्कि दीर्घकालिक राष्ट्रीय निर्माण है ताकि भारत मजबूत,आत्मनिर्भर और वैश्विक मंच पर निर्णायक भूमिका निभाने वाला राष्ट्र बन सके।
