Bihar voter list revision : बिहार में चुनाव आयोग की मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। ईसी के इस मुहिम को 'असंवैधानिक एवं मनमाना' बताते हुए चुनौती दी गई है। याचिका दायर करने वालों में एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR), एक्टिविस्ट योगेंद्र यादव और तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा एवं अन्य लोग शामिल हैं। ईसी के इस अभियान को विपक्षी दल चुनौती दे रहे हैं।
ईसी की सफाई-पात्र वोटर का नाम नहीं हटेगा
विपक्षी दलों ने ईसी की मंशा, इसे कराने के तरीके पर सवाल उठाए हैं। राजद एवं कांग्रेस का आरोप है कि ईसी एक राजनीतिक दल का हिस्सा बन गया है और वह बिहार में गरीब मतदाताओं को मतदाता सूची से बाहर करना चाहता है। हालांकि, चुनाव आयोग का दावा है कि मतदाता सूची से किसी भी योग्य एवं पात्र मतदाता का नाम नहीं हटेगा।
EC ने नेताओं के आरोपों के तथ्यों की पड़ताल की
बिहार में मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण को लेकर विपक्षी दलों द्वारा निर्वाचन आयोग पर हमला तेज किए जाने के बीच आयोग ने बुधवार को राज्य के कुछ नेताओं के आरोपों के तथ्यों की पड़ताल की और इस कवायद के बारे में उनके दावों को "निराधार" बताकर खारिज कर दिया। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सांसद मनोज कुमार झा ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि निर्वाचन आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण पर मुलाकात के लिए समय नहीं दिया, जिस पर प्रतिक्रिया देते हुए आयोग ने कहा कि वह समय मांगने के लिए अपनी पार्टी के अधिकृत प्रतिनिधि नहीं हैं।
त्रुटिरहित मतदाता सूची अपरिहार्य है-CEC
मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने बुधवार को कहा कि बिहार के मतदाताओं ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में उत्साहपूर्वक भाग लिया है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए त्रुटिरहित मतदाता सूची अपरिहार्य है। यहां बूथ स्तर के अधिकारियों के एक समूह को संबोधित करते हुए कुमार ने कहा कि बिहार के मतदाताओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी के परिणामस्वरूप राज्य में जारी एसआईआर के तहत बुधवार तक 57 प्रतिशत से अधिक आवेदन प्रपत्र सफलतापूर्वक एकत्रित कर लिए गए हैं, जबकि इस प्रक्रिया के 16 दिन अब भी शेष हैं।
न्यायपालिका पर दबाव बनाने की कोशिश-प्रसाद
भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने यहां आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में बंद के पीछे की मंशा पर सवाल उठाया और विपक्षी दलों से पूछा कि क्या वे इस तरह की रणनीति के जरिए न्यायपालिका पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘इन सभी नेताओं ने उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है, जो उनका अधिकार है। लेकिन जब कल सुनवाई होने वाली है, तो वे दबाव बनाने के लिए आज सड़क पर राजनीति क्यों कर रहे हैं?’
