Gujarat operation delta hunt: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के अवैध घुसपैठियों के खिलाफ सख्त रुख और गुजरात सरकार के निर्देशों के बाद शुरू किए गए 'ऑपरेशन डेल्टा हंट' में अहमदाबाद समेत पूरे गुजरात में बड़े पैमाने पर कार्रवाई की गई है। गुजरात पुलिस ने अब तक राज्यभर से 501 बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया है, जबकि अकेले अहमदाबाद में यह संख्या 191 तक पहुंच गई है। कई अन्य संदिग्धों की जांच अभी भी जारी है।
संयुक्त पुलिस आयुक्त (क्राइम) शरद सिंघल ने बताया कि साइबर एक्सीलेंस और तकनीकी सर्विलांस के जरिए ऐसे हजारों मोबाइल नंबरों की पहचान की गई थी जिनका नियमित संपर्क बांग्लादेश में मौजूद लोगों से था। इसी डेटा और ह्यूमन इंटेलिजेंस के आधार पर अहमदाबाद में विशेष ऑपरेशन की योजना बनाई गई।
रात 8 बजे शुरू हुआ ऑपरेशन, सुबह तक शहरभर में चली कॉम्बिंग
अहमदाबाद पुलिस कमिश्नर की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद क्राइम ब्रांच, एसओजी, साइबर सेल, ईओडब्ल्यू और स्थानीय पुलिस की 30 से अधिक टीमों का गठन किया गया। 2 जून की रात 8 बजे से शुरू हुए अभियान में नरोडा, ओढव, नारोल, दाणीलीमडा, शाहआलम, पीराणा, वटवा, वटवा जीआईडीसी, जुहापुरा और सरखेज सहित कई इलाकों में एक साथ कॉम्बिंग ऑपरेशन चलाया गया।
रातभर चली कार्रवाई के दौरान 300 से अधिक संदिग्ध पुरुषों, महिलाओं और बच्चों को पूछताछ के लिए क्राइम ब्रांच लाया गया। दस्तावेजों की जांच, मोबाइल डेटा विश्लेषण और तकनीकी सत्यापन के बाद 191 लोगों के बांग्लादेशी नागरिक होने की पुष्टि हुई। पुलिस का मानना है कि जांच पूरी होने के बाद यह संख्या और बढ़ सकती है।
191 में 100 से ज्यादा महिलाएं, 30 बच्चे
शरद सिंघल के मुताबिक पकड़े गए लोगों में 100 से अधिक महिलाएं और करीब 30 बच्चे शामिल हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बड़ी संख्या में महिलाएं स्पा सेंटरों और देह व्यापार से जुड़े नेटवर्क में काम कर रही थीं। वहीं पुरुष ऑटो रिक्शा चलाने, कचरा संग्रहण, पंचर मरम्मत और दिहाड़ी मजदूरी जैसे कार्यों में लगे हुए थे।
पुलिस का कहना है कि कई महिलाएं बेहतर रोजगार के नाम पर भारत लाई गई थीं। उन्हें घरेलू काम या अन्य नौकरी का झांसा दिया गया था, लेकिन बाद में उन्हें स्पा और देह व्यापार से जुड़े नेटवर्क में धकेल दिया गया।
बांग्लादेश से गुजरात तक एजेंटों का पूरा नेटवर्क सक्रिय
जांच में सामने आया है कि अधिकांश लोग एजेंटों के जरिए अवैध रूप से पश्चिम बंगाल सीमा से भारत में दाखिल हुए थे। भारत पहुंचने के बाद पश्चिम बंगाल के पते पर आधार कार्ड और अन्य पहचान पत्र तैयार करवाए गए। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर मोबाइल सिम हासिल किए गए और बाद में गुजरात आकर रहने लगे।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, एक व्यक्ति को सीमा पार कराने से लेकर दस्तावेज तैयार करवाने तक के लिए एजेंटों को 50 हजार रुपये या उससे अधिक रकम दी जाती थी। रकम व्यक्ति की आर्थिक स्थिति और परिस्थिति के अनुसार तय होती थी।
90 प्रतिशत के पास पश्चिम बंगाल के पते
जांच के दौरान बरामद दस्तावेजों में करीब 90 प्रतिशत मामलों में पश्चिम बंगाल के पते पाए गए हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन दस्तावेजों को तैयार कराने में कौन-कौन लोग शामिल थे और फर्जी पहचान बनाने का नेटवर्क कितना बड़ा है।
कमाई का पैसा बांग्लादेश कैसे पहुंचता था?
मोबाइल विश्लेषण के दौरान पुलिस को यह भी पता चला कि गुजरात में मजदूरी या अन्य कामों से कमाए गए पैसे नियमित रूप से बांग्लादेश भेजे जा रहे थे। इसके लिए आंगड़िया नेटवर्क, डिजिटल पेमेंट ऐप्स और अन्य अनौपचारिक माध्यमों का इस्तेमाल किया जाता था।
क्राइम ब्रांच पिछले वर्ष चंडोला तालाब मामले में सामने आए एजेंट नेटवर्क की भी दोबारा जांच कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, कुछ पुराने नाम फिर से जांच के दायरे में आए हैं।
सबसे ज्यादा गिरफ्तारी नारोल इलाके से
पूरे ऑपरेशन के दौरान सबसे अधिक बांग्लादेशी नागरिक अहमदाबाद के नारोल क्षेत्र से पकड़े गए हैं। हालांकि पुलिस का कहना है कि कार्रवाई किसी एक इलाके तक सीमित नहीं थी और शहर के कई हिस्सों में एक साथ सर्च ऑपरेशन चलाया गया।
पहचान बदलकर रह रहे थे लोग
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक कई लोग पहचान और हुलिया बदलकर रह रहे थे। कुछ मामलों में यह भी आशंका है कि पहले पकड़े जा चुके लोग नई पहचान बनाकर दोबारा गुजरात में रह रहे हों। अब सभी हिरासत में लिए गए लोगों के फिंगरप्रिंट, बायोमेट्रिक डेटा और रिकॉर्ड का मिलान किया जाएगा।
अब एजेंट, मकान मालिक और नौकरी देने वाले भी जांच के घेरे में
गुजरात पुलिस अब केवल अवैध रूप से रह रहे लोगों तक जांच सीमित नहीं रख रही है। एजेंट, फर्जी दस्तावेज तैयार कराने वाले लोग, मकान उपलब्ध कराने वाले, रोजगार देने वाले और पूरे नेटवर्क को खंगाला जा रहा है।
पुलिस का कहना है कि जिन लोगों ने बिना वैध दस्तावेज जांचे आश्रय या रोजगार उपलब्ध कराया है, उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। राज्यभर में ऑपरेशन डेल्टा हंट आने वाले दिनों में भी जारी रहेगा और अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान कर उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
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