देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष ने महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी कर ली है। PTI ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि संसद के दोनों सदनों में विपक्ष की ओर से महाभियोग प्रस्ताव से संबंधित नोटिस सौंप दिए गए हैं। विपक्ष का आरोप है कि ज्ञानेश कुमार सत्ताधारी दल बीजेपी की मदद कर रहे हैं और विपक्ष के खिलाफ काम कर रहे हैं।
विपक्ष ने महाभियोग पर क्या कहा?
TMC सांसद सौगत रॉय ने इसे लेकर कहा, "संविधान के अनुसार, CEC को हटाने की प्रक्रिया वैसी ही है जैसी सुप्रीम कोर्ट के किसी जज को हटाने की होती है। कम से कम 100 लोकसभा सांसदों और 50 राज्यसभा सांसदों को इस पर हस्ताक्षर करने होंगे... जजों की जांच अधिनियम, 1968 के तहत नियमों के अनुसार, यदि सब कुछ सही पाया जाता है, तो तीन सदस्यों वाली एक समिति बनाई जाएगी, और वह समिति यह तय करेगी कि इस पर चर्चा की जाएगी या नहीं... हमारा नोटिस कानून के अनुसार है, और एक समिति बनाई जानी चाहिए। मुख्य आरोप यह है कि उन्होंने लोगों के वोट देने के अधिकार को छीन लिया है; मतदाता सूची से कई नाम हटा दिए गए हैं। यह पूरी तरह से गलत है..."
मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया क्या है?
मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) को पद से हटाने की प्रक्रिया वही है जो सुप्रीम कोर्ट के किसी न्यायाधीश को हटाने के लिए अपनाई जाती है। संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत सीईसी को केवल उसी तरीके और उन्हीं आधारों पर पद से हटाया जा सकता है, जो सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के लिए निर्धारित हैं। इसके लिए लोकसभा के कम से कम 100 सदस्यों या राज्यसभा के 50 सदस्यों के हस्ताक्षर के साथ प्रस्ताव लाना आवश्यक होता है। सीईसी या किसी अन्य चुनाव आयुक्त को हटाने की व्यवस्था संविधान के अनुच्छेद 324 में दी गई है। इसमें स्पष्ट कहा गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त को उसके पद से केवल उसी प्रकार और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जैसे सर्वोच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश को हटाया जाता है।
