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'कम से कम 3 बच्चे होने चाहिए', RSS प्रमुख मोहन भागवत के इस बयान को नितिन गडकरी ने सही ठहराया

India Economic Conclave 2024: इंडिया इकोनॉमिक कॉन्क्लेव में बात करते हुए केंद्रीय मंत्री नितन गडकरी ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान पर प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने ये कहा था कि कम से कम 3 बच्चे होने चाहिए। गडकरी ने टाइम्स नाउ नवभारत के सवाल पर कहा वो भागवत के इस बयान से सहमत हैं।

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नितिन गडकरी, केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री

Nitin Gadkari on Mohan Bhagwat's Statement: केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इंडिया इकोनॉमिक कॉन्क्लेव में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत के उस बयान पर सहमति जताई, जिसमें RSS प्रमुख ने ये कहा था कि कम से कम 3 बच्चे होने चाहिए। गड़करी ने इस खास बातचीत में राजनीतिक मुद्दे से जुड़े सवालों का जवाब दिया, साथ ही देश में जारी सड़क नेटवर्क के विस्तार को लेकर भी कई जानकारियां साझा की।

मोहन भागवत के तीन बच्चों वाले बयान से गडकरी सहमत हैं या नहीं?

नितिन गडकरी ने शुक्रवार को इंडिया इकोनॉमिक कॉन्क्लेव के 10वें संस्करण में टाइम्स नेटवर्क की ग्रुप एडिटर और टाइम्स नाउ नवभारत की एडिटर इन चीफ नाविका कुमार के साथ बातचीत की। इस दौरान नाविका ने ये सवाल पूछा कि सरसंघचालक मोहन भागवत के तीन बच्चों वाले बयान से आप सहमत हैं या नहीं? इसके जवाब में गडकरी ने सीधे कहा कि 'हां, मैं इससे सहमत हूं।'

नितिन गडकरी के इस जवाब पर टाइम्स नाउ नवभारत ने पूछा कि 'तो फिर जनसंख्या कैसे कम होगी?' जनसंख्या वृद्धि पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री ने कहा कि '3 बच्चों तक ठीक है, मगर हर साल जो लाइन लग रही है वो ठीक नहीं।'

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने क्या दिया था बयान

देशभर में जनगणना, जाति गणना को लेकर विपक्ष हंगामा करता रहा है। हाल ही में जनसंख्या को लेकर संघ प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा बयान आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि कम से कम 3 बच्चे होने चाहिए । नागपुर में मोहन भागवत ने कहा था कि 'जनसंख्या में गिरावट चिंता का विषय है। आधुनिक जनसंख्या शास्त्र कहता है कि जब किसी समाज की जनसंख्या 2.1 से नीचे चली जाती है तो वह समाज पृथ्वी से खत्म हो जाता है, उसे कोई नहीं मारेगा। कोई संकट न होने पर भी वह समाज नष्ट हो जाता है। उस प्रकार अनेक भाषाएं और समाज नष्ट हो गये। जनसंख्या 2.1 से नीचे नहीं जानी चाहिए, हमारे देश की जनसंख्या नीति 1998 या 2002 में तय की गई थी। लेकिन इसमें यह भी कहा गया है कि किसी समाज की जनसंख्या 2.1 से कम नहीं होनी चाहिए। अब पाइंट वन तो इन्सान जन्म नही ले सकता, इसलिये हमे दो से ज्यादा तीन की जरूरत है यही जनसंख्या विज्ञान कहता है।'

कॉन्क्लेव गडकरी ने कहा कि देश में जारी सड़क नेटवर्क के विस्तार को लेकर कहा कि आज के समय में 36 ग्रीन एक्सप्रेसवे का निर्माण चल रहा है। यह कई शहरों के बीच की दूरियों को काफी कम कर देगा। इन सबके निर्माण हो जाने के बाद दिल्ली से कटरा की यात्रा 6 घंटे में कवर हो जाएगी।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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