Gir National Park Lion Deaths News: गुजरात के विश्व प्रसिद्ध गिर नेशनल पार्क (Gir National Park) और उसके आस-पास के इलाकों में एशियाई शेरों (Asiatic Lions) पर अचानक एक बड़ा संकट मंडराने लगा है। पिछले कुछ दिनों में लगातार हुई शेरों की मौत का आंकड़ा अब बढ़कर 9 तक पहुंच गया है। इसके अलावा 3 अन्य शेरों की हालत बेहद गंभीर बताई जा रही है। इस आपातकालीन स्थिति को देखते हुए राज्य के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की उच्चस्तरीय बैठक के बाद पूरा वन विभाग अलर्ट मोड पर आ गया है और गांधीनगर से विशेषज्ञों की टीम जमीनी स्तर पर मोर्चा संभालने गीर पहुंच चुकी है।
तीन शेर गंभीर, 'जसाधार एनिमल केयर सेंटर' में कैंपिंग
बीमार पाए गए तीन शेरों को तत्काल गहन इलाज के लिए जसाधार एनिमल केयर सेंटर में शिफ्ट किया गया है। हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वन विभाग के शीर्ष अधिकारी, PCCF भवानी पति, CCF राम रतन नाला और जूनागढ़ वेटरनरी कॉलेज के वरिष्ठ डॉक्टरों की टीम इस वक्त जसाधार सेंटर में ही डेरा डाले हुए है। गांधीनगर के PCCF जयपालसिंह राठौड़ के अनुसार, गिर के भूगोल से अच्छी तरह वाकिफ अनुभवी अधिकारियों को विशेष रूप से जसाधार रेंज में तैनात कर शेरों की स्क्रीनिंग, ट्रैकिंग और निरंतर हेल्थ मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
'बेबीसिया' संक्रमण की आशंका; शुरू हुआ 'डी-टिकिंग' महा-अभियान
गुजरात के वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोधवाडिया ने इस संकट पर आधिकारिक बयान जारी करते हुए बताया कि प्राथमिक जांच में शेरों के भीतर 'बेबीसिया' (Babesia) संक्रमण के लक्षण दिखे हैं। यह एक ऐसा खतरनाक संक्रमण है जो पशुओं के शरीर पर चिपकने वाली किलनी यानी इतरड़ी (Ticks) नामक परजीवी के जरिए फैलता है।
इस जानलेवा परजीवी को खत्म करने के लिए वन विभाग ने गिर के सेंचुरी क्षेत्र और उसके बाहरी इलाकों में बड़े पैमाने पर 'डी-टिकिंग' (De-ticking) ऑपरेशन शुरू कर दिया है। इसके साथ ही गर्मियों के मौसम में शेर शारीरिक रूप से कमजोर न पड़ें, इसके लिए भी विशेष एहतियाती (Preventive) मेडिकल उपाय किए जा रहे हैं।
10 किलोमीटर का प्रभावित दायरा 'आइसोलेट'
वन मंत्री अर्जुन मोधवाडिया ने ट्रांसक्रिप्ट के जरिए बताया कि यह पूरा संक्रमण गिर सेंचुरी के बाहर गीर सोमनाथ जिले के गढड़ा तालुका और अमरेली जिले के बाबरीयावाड़ क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 10 किलोमीटर के दायरे में देखा गया है। इस संभावित वायरस या संक्रमण को गीर के दूसरे सुरक्षित इलाकों में फैलने से रोकने के लिए:
-प्रभावित 10 किलोमीटर के दायरे को पूरी तरह चिन्हित कर लिया गया है।
-इस क्षेत्र में रहने वाले शेरों को विशेष निगरानी और आइसोलेशन (एकांतवास) में रख दिया गया है ताकि वायरस का ट्रांसमिशन रुक सके।
-मृत शेरों के विसरा सैंपल जांच के लिए गांधीनगर स्थित गुजरात बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर (GBRC) भेजे गए हैं, जिसकी अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही मौतों की असली वजह आधिकारिक रूप से साफ होगी।
पीएमओ (PMO) भी रख रहा है नजर
इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए देश के प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से भी लगातार मार्गदर्शन और मदद मिल रही है। गुजरात सरकार और वन विभाग का फ्रंटलाइन स्टाफ पूरी मुस्तैदी से रेस्क्यू और ट्रीटमेंट ऑपरेशन में जुटा है। वन मंत्री ने भरोसा जताते हुए कहा है कि, 'गिर सिर्फ जंगल नहीं है, यह एशियाई शेरों का आखिरी बड़ा घर है। हम सभी के सहयोग से इस संभावित भय और संकट से निश्चित रूप से बाहर आ जाएंगे।'
देश और दुनिया की ताजा ख़बरें (News in Hindi) पढ़ें हिंदी में और देखें छोटी बड़ी सभी न्यूज़ Times Now Navbharat Live TV पर। देश (India News) अपडेट और (आज की ताजा खबर) के लिए जुड़े रहे Times Now Navbharat से ।
